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बिहार: लोजपा में टूट....किसने तैयार किया कथानक और किसने लिखी पटकथा?

लोकजनशक्ति पार्टी (लोजपा) में टूट की खबरों के बीच राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) में शामिल जनता दल युनाइटेड के अध्यक्ष आर. सी. पी. सिंह ने सोमवार को कहा कि जैसा बोईएगा, वैसी फसल काटिएगा

News Nation Bureau | Edited By : Mohit Sharma | Updated on: 14 Jun 2021, 07:44:49 PM
chirag paswan

chirag paswan (Photo Credit: Google)

highlights

  • लोकजनशक्ति पार्टी (लोजपा) में टूट की खबरों से बिहार की सियासत में घमासान
  • आरसीपी सिंह ने कहा कि जैसा बोईएगा, वैसी फसल काटिएगा
  • सिंह ने कहा कि कांग्रेस डूबता हुआ जहाज है, उससे सब अलग होने चाहते हैं

पटना:  

लोकजनशक्ति पार्टी (लोजपा) में टूट की खबरों के बीच राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) में शामिल जनता दल युनाइटेड के अध्यक्ष आर. सी. पी. सिंह ने सोमवार को कहा कि जैसा बोईएगा, वैसी फसल काटिएगा। इस बीच उन्होंने कांग्रेस में भी टूट की बात कही। भीतरी खबरों की बात करें तो केंद्रीय मंत्रिमंडल ज्यादा से ज्यादा जगह पाने के लिए JDU के द्वारा यह कथानक तैयार की गई है. जदयू संसद लालन सिंह और लोजपा नेता सूरजभान सिंह ने ये पटकथा लिखी है. जिससे ना सिर्फ जदयू की ताकत बढ़ेगी बल्कि जदयू अपने दुश्मन नंबर एक चिराग को निपटाने में भी सफल हो गई है.

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JDU जो अब तक केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल नहीं है लेकिन अब केंद्रीय मंत्रिमंडल में उचित हिस्सेदारी की बात कह रही है .दरअसल बिहार में भारतीय जनता पार्टी और जदयू दोनों बराबर बराबर सीटों पर चुनाव लड़े थे और दोनों ने 16 और 17 सीटों पर जीत दर्ज की.  17 सीटों पर जीत दर्ज करने के बाद भारतीय जनता पार्टी के पांच सांसद केंद्र में मंत्री बने और जेडीयू कहती है 16 सांसदों वाली पार्टी को भी कम से कम चार या पांच जगह मिलनी चाहिए, लेकिन 6 सीटों वाली लोजपा से पांच को तोड़कर जदयू अब 21 हो जाएगी. जाहिर है 21 सांसदों के बल पर जेडीयू ने केंद्रीय मंत्रिमंडल में हिस्सेदारी की मांग भारतीय जनता पार्टी से की है. वैसे भी चिराग पासवान को जदयू अपना दुश्मन नंबर वन मानती है .जिनकी वजह से जदयू बिहार में छोटे भाई की हैसियत में आ गई. 

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हालांकि माना यह जाता है कि भारतीय जनता पार्टी ने अपनी रणनीति के तहत अपने हनुमान से जदयू को उसकी औकात बता दी, लेकिन तब भी पशुपति कुमार पारस जो नीतीश सरकार में तब मंत्री रहे हैं जब वह किसी सदन के सदस्य भी नहीं थे और नीतीश कुमार की वजह से वह एमएलसी बने, नीतीश विरोधी चिराग के फैसलों में कभी पशुपति कुमार पारस उनके साथ नहीं रहे. अब जबकि केंद्रीय मंत्रिमंडल में स्थान मिलने की बात आई है तो जेडीयू सांसद ललन सिंह और महेश्वर हजारी और दूसरी तरफ लोजपा के वरिष्ठ नेता सूरजभान सिंह ने इस बड़ी टूट की पटकथा तैयार कर दी, जिसमें हनुमान ने लंका की जगह खुद अपनी किष्किंधा में ही आग लगा ली. रामविलास पासवान ने पार्टी और परिवार दोनो को एक सूत्र में बांधकर रखा.लोजपा में पहली बार रामविलास के जाने के बाद, 21साल बाद ना सिर्फ पार्टी टूटी बल्कि परिवार भी विखर गया.

First Published : 14 Jun 2021, 07:44:33 PM

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