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somnath mandir Photograph: (somnath mandir (X))
Somnath Swabhiman Parv: गुजरात के सौराष्ट्र तट पर स्थित सोमनाथ मंदिर सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं है. यह भारत की अटूट आस्था, सांस्कृतिक स्वाभिमान और पुनर्निर्माण की शक्ति का प्रतीक है. आज से सोमनाथ स्वाभिमान पर्व शुरू हो रहा है. दरअसल, आज के दिन (8 जनवरी, 1026) 1000 साल पहले, महमूद गजनवी की सेना ने पहली बार सोमनाथ मंदिर पर हमला किया था.
इस अवसर पर हमें इस सवाल का उत्तर जरूर जानना चाहिए कि आखिर क्यों बार-बार आक्रमणों के बावजूद सोमनाथ मंदिर नष्ट नहीं हुआ, बल्कि हर बार और अधिक भव्य रूप में खड़ा हुआ.
पीएम मोदी ने शेयर की तस्वीरें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज अपने एक्स अकाउंट पर कुछ तस्वीरें शेयर की है. उन्होंने पोस्ट में लिखा कि वे सोमनाथ मंदिर के पुनर्निमाण से जुड़े ऐतिहासिक क्षणों को याद कर रहे हैं. पीएम ने आज से सोमनाथ स्वाभिमान पर्व का भी शुभारंभ किया है. 8 से 11 जनवरी तक इस पर्व के लिए सोमनाथ में खास कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है. पीएम भी इसमें शामिल होने वाले हैं, जिसके लिए 3 दिन गुजरात में रहेंगे.
जय सोमनाथ !
— Narendra Modi (@narendramodi) January 8, 2026
सोमनाथ स्वाभिमान पर्व का आज से शुभारंभ हो रहा है। एक हजार वर्ष पूर्व, जनवरी 1026 में सोमनाथ मंदिर ने अपने इतिहास का पहला आक्रमण झेला था। साल 1026 का आक्रमण और उसके बाद हुए अनेक हमले भी हमारी शाश्वत आस्था को डिगा नहीं सके। बल्कि इनसे भारत की सांस्कृतिक एकता की भावना… pic.twitter.com/dDXCPf1TMM
पहले ज्योतिर्लिंग की कहानी बेहद खास
गुजरात का सोमनाथ मंदिर 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है. इतना ही नहीं इसे पहला ज्योतिर्लिंग भी कहा जाता है. अरब सागर के किनारे बसा यह खूबसूरत मंदिर आस्था का प्रतीक है. प्राचीन काल में यह मंदिर चालुक्य शैली से बनाया गया था. यहां सोने-चांदी की घंटियां और रत्नों से जड़ी दीवारें बनी हुई थीं.
मैं 31 अक्टूबर 2001 को सोमनाथ में आयोजित एक कार्यक्रम की कुछ झलकियां भी आपसे साझा कर रहा हूं। यह वो साल था, जब हमने 1951 में पुनर्निर्मित सोमनाथ मंदिर के उद्घाटन के 50 वर्ष पूर्ण होने का उत्सव मनाया था। 1951 में वो ऐतिहासिक समारोह तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद जी की… pic.twitter.com/pA8ob5jgE5
— Narendra Modi (@narendramodi) January 8, 2026
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1026 में गजनवी के लुटेरों ने किया था मंदिर पर हमला
साल 1025 में 18 अक्टूबर को महमूद गजनवी अपने साथ 30 हजार घुड़सवारों को लेकर गजनी से रवाना हुआ था. रेगिस्तानों को पार करते हुए वह जनवरी, 1026 में सोमनाथ पहुंचा. उसने 6 जनवरी को मंदिर को घेरा, इसके बाद 7 जनवरी को मंदिर पर हमला करवाया और 8 जनवरी को मंदिर के गर्भग्रह पर हमला कर अपने कब्जे में कर लिया. इस दौरान मंदिर को सुरक्षित रखने के लिए 50,000 से ज्यादा लोगों ने अपनी जान गंवाई थी. इन लोगों में निहत्थे पुजारी और कई हजार भक्त थे. मगर बावजूद इसके मंदिर को खंडित होने से नहीं रोका जा सका.
इतिहासकार बताते हैं कि उस लूट में गजनवी ने करीब 2 करोड़ दीनार की संपत्ति को लूटा था. उसने सोने-चांदी के बेशकीमती बर्तन, रत्नों, मंदिर के सोने-चांदी जड़ित दिवारों और दरवाजों को भी लूटा था. गजनवी ने शिवलिंग को तोड़कर उसके टुकड़े भी चुराए थे, जिन्हें उसने मस्जिदों में लगाया था.
पौराणिक मान्यताएं
बताया जाता है कि यह मंदिर एक शाश्वत तीर्थ स्थल है. इस मंदिर में च्रंद देव ने सोने से निर्माण करवाया था. इसके बाद रावण ने चांदी से और श्री कृष्ण ने चंदन की लकड़ियों से बनवाया था. इसलिए, ये एक प्रमुख मंदिर के साथ-साथ ज्योतिर्लिंग भी है.
#SomnathSwabhimanParv का ये अवसर, भारत माता के उन असंख्य सपूतों को स्मरण करने का पर्व है, जिन्होंने कभी अपने सिद्धांतों और मूल्यों से समझौता नहीं किया। समय कितना ही कठिन और भयावह क्यों ना रहा हो, उनका संकल्प हमेशा अडिग रहा। हमारी सभ्यता और सांस्कृतिक चेतना के प्रति उनकी निष्ठा…
— Narendra Modi (@narendramodi) January 8, 2026
चंद्र दोषों से मुक्ति के लिए पावन धाम
सनातन धर्म में चंद्र ग्रह को कुंडली का अहम हिस्सा माना जाता है. अगर चंद्र कमजोर होता है तो मां के साथ संबंध खराब हो जाते हैं. जातक को जीवन में कई प्रकार की समस्याएं आती है. ऐसे लोग मानसिक रूप से असंतुलित होते हैं. चंद्र कमजोर होने से मनुष्य को दिमागी बीमारियां होती है.
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गुजरात का सोमनाथ मंदिर कमजोर चंद्रमा को मजबूत करने के लिए एक पवित्र स्थल माना जाता है. दरअसल, पौराणिक कथाओं के अनुसार, राजा दक्ष ने अपनी 27 बेटियों का विवाह चंद्रमा से करवाया था. मगर चंद्रमा का लगाव रोहिणी के साथ अधिक था. इसलिए, बाकी बेटियों ने राजा दक्ष से इसकी शिकायत की. इसके बाद उन्होंने चंद्रमा को श्राप दिया कि हर दिन तुम्हारा तेज कम होता जाएगा.
इस पाप से मुक्त होने के लिए चंद्र देव ने इस स्थल पर ही भोलेनाथ की कृपा पाने के लिए घोर तप किया. भोलेनाथ ने प्रसन्न होकर उन्हें दर्शन दिए तो चंद्रमा ने उन्हें यहां बसने के लिए कहा. तब से इस जगह पहला ज्योतिर्लिंग स्थापित हुआ, जिसे सोमनाथ नाम दिया गया था. इसलिए, इस मंदिर को चंद्र दोषों से मुक्ति पाने के लिए पावन धाम माना जाता है.
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