Somnath Swabhiman Parv: आक्रमणों के बाद भी नहीं झुका गुजरात के सोमनाथ मंदिर का गौरव, चंद्र दोष से मुक्ति का है पावन धाम, जानें इतिहास

Somnath Swabhiman Parv: आज गुजरात के सोमनाथ मंदिर पर महमूद गजनवी के हमले के पूरे 1000 साल हो चुके हैं. यह दिन भारत के इतिहास में काला दिन माना जाता है. आज से सोमनाथ स्वाभिमान पर्व का शुभारंभ हुआ है. ऐसे में जानते हैं इस मंदिर का इतिहास.

Somnath Swabhiman Parv: आज गुजरात के सोमनाथ मंदिर पर महमूद गजनवी के हमले के पूरे 1000 साल हो चुके हैं. यह दिन भारत के इतिहास में काला दिन माना जाता है. आज से सोमनाथ स्वाभिमान पर्व का शुभारंभ हुआ है. ऐसे में जानते हैं इस मंदिर का इतिहास.

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Namrata Mohanty
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somnath mandir Photograph: (somnath mandir (X))

Somnath Swabhiman Parv: गुजरात के सौराष्ट्र तट पर स्थित सोमनाथ मंदिर सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं है. यह भारत की अटूट आस्था, सांस्कृतिक स्वाभिमान और पुनर्निर्माण की शक्ति का प्रतीक है. आज से सोमनाथ स्वाभिमान पर्व शुरू हो रहा है. दरअसल, आज के दिन (8 जनवरी, 1026) 1000 साल पहले, महमूद गजनवी की सेना ने पहली बार सोमनाथ मंदिर पर हमला किया था. 

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इस अवसर पर हमें इस सवाल का उत्तर जरूर जानना चाहिए कि आखिर क्यों बार-बार आक्रमणों के बावजूद सोमनाथ मंदिर नष्ट नहीं हुआ, बल्कि हर बार और अधिक भव्य रूप में खड़ा हुआ. 

पीएम मोदी ने शेयर की तस्वीरें

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज अपने एक्स अकाउंट पर कुछ तस्वीरें शेयर की है. उन्होंने पोस्ट में लिखा कि वे सोमनाथ मंदिर के पुनर्निमाण से जुड़े ऐतिहासिक क्षणों को याद कर रहे हैं. पीएम ने आज से सोमनाथ स्वाभिमान पर्व का भी शुभारंभ किया है. 8 से 11 जनवरी तक इस पर्व के लिए सोमनाथ में खास कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है. पीएम भी इसमें शामिल होने वाले हैं, जिसके लिए 3 दिन गुजरात में रहेंगे.

पहले ज्योतिर्लिंग की कहानी बेहद खास

गुजरात का सोमनाथ मंदिर 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है. इतना ही नहीं इसे पहला ज्योतिर्लिंग भी कहा जाता है. अरब सागर के किनारे बसा यह खूबसूरत मंदिर आस्था का प्रतीक है. प्राचीन काल में यह मंदिर चालुक्य शैली से बनाया गया था. यहां सोने-चांदी की घंटियां और रत्नों से जड़ी दीवारें बनी हुई थीं.

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1026 में गजनवी के लुटेरों ने किया था मंदिर पर हमला

साल 1025 में 18 अक्टूबर को महमूद गजनवी अपने साथ 30 हजार घुड़सवारों को लेकर गजनी से रवाना हुआ था. रेगिस्तानों को पार करते हुए वह जनवरी, 1026 में सोमनाथ पहुंचा. उसने 6 जनवरी को मंदिर को घेरा, इसके बाद 7 जनवरी को मंदिर पर हमला करवाया और 8 जनवरी को मंदिर के गर्भग्रह पर हमला कर अपने कब्जे में कर लिया. इस दौरान मंदिर को सुरक्षित रखने के लिए 50,000 से ज्यादा लोगों ने अपनी जान गंवाई थी. इन लोगों में निहत्थे पुजारी और कई हजार भक्त थे. मगर बावजूद इसके मंदिर को खंडित होने से नहीं रोका जा सका.

इतिहासकार बताते हैं कि उस लूट में गजनवी ने करीब 2 करोड़ दीनार की संपत्ति को लूटा था. उसने सोने-चांदी के बेशकीमती बर्तन, रत्नों, मंदिर के सोने-चांदी जड़ित दिवारों और दरवाजों को भी लूटा था. गजनवी ने शिवलिंग को तोड़कर उसके टुकड़े भी चुराए थे, जिन्हें उसने मस्जिदों में लगाया था. 

पौराणिक मान्यताएं

बताया जाता है कि यह मंदिर एक शाश्वत तीर्थ स्थल है. इस मंदिर में च्रंद देव ने सोने से निर्माण करवाया था. इसके बाद रावण ने चांदी से और श्री कृष्ण ने चंदन की लकड़ियों से बनवाया था. इसलिए, ये एक प्रमुख मंदिर के साथ-साथ ज्योतिर्लिंग भी है.

चंद्र दोषों से मुक्ति के लिए पावन धाम

सनातन धर्म में चंद्र ग्रह को कुंडली का अहम हिस्सा माना जाता है. अगर चंद्र कमजोर होता है तो मां के साथ संबंध खराब हो जाते हैं. जातक को जीवन में कई प्रकार की समस्याएं आती है. ऐसे लोग मानसिक रूप से असंतुलित होते हैं. चंद्र कमजोर होने से मनुष्य को दिमागी बीमारियां होती है. 

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गुजरात का सोमनाथ मंदिर कमजोर चंद्रमा को मजबूत करने के लिए एक पवित्र स्थल माना जाता है. दरअसल, पौराणिक कथाओं के अनुसार, राजा दक्ष ने अपनी 27 बेटियों का विवाह चंद्रमा से करवाया था. मगर चंद्रमा का लगाव रोहिणी के साथ अधिक था. इसलिए, बाकी बेटियों ने राजा दक्ष से इसकी शिकायत की. इसके बाद उन्होंने चंद्रमा को श्राप दिया कि हर दिन तुम्हारा तेज कम होता जाएगा. 

इस पाप से मुक्त होने के लिए चंद्र देव ने इस स्थल पर ही भोलेनाथ की कृपा पाने के लिए घोर तप किया. भोलेनाथ ने प्रसन्न होकर उन्हें दर्शन दिए तो चंद्रमा ने उन्हें यहां बसने के लिए कहा. तब से इस जगह पहला ज्योतिर्लिंग स्थापित हुआ, जिसे सोमनाथ नाम दिया गया था. इसलिए, इस मंदिर को चंद्र दोषों से मुक्ति पाने के लिए पावन धाम माना जाता है. 

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