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Chaitra Navratri 2022 Durga Saptashti Path Niyam: चैत्र नवरात्रि में करने जा रहे हैं दुर्गा सप्तशती का पाठ, इन नियमों का रखें खास ख्याल

चैत्र नवरात्रि (Chaitra Navratri 2022) 2 अप्रैल से शुरू होने जा रहे हैं. ऐसा माना जाता है कि चैत्र नवरात्रि में रोजाना दुर्गा सप्तशती (Durga Saptashati) पढ़ने से मां प्रसन्न होती हैं और व्यक्ति को धन-धान्य, मान-सम्मान और सौभाग्य का आशीर्वाद देती है.

Updated on: 31 Mar 2022, 10:32 AM

नई दिल्ली:

चैत्र नवरात्रि (chaitra navratri 2022) का त्योहार शुरू होने में सिर्फ एक ही दिन बाकी है. इस साल चैत्र नवरात्रि 2 अप्रैल से शुरू हो रहे है. ये त्योहार 9 दिनों तक मनाया जाता है. इन नौ दिनों में मां दुर्गा (goddess durga) के 9 स्वरूपों की पूजा की जाती है. वैसे तो मां दुर्गा की पूजा करना रोजाना ही करना शुभ माना जाता है. लेकिन, चैत्र नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा की पूजा करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है. इसके साथ ही लोगों के सारे कष्ट भी दूर हो जाते हैं. नवरात्रि के दौरान बहुत से लोग दुर्गा सप्तशती का पाठ भी करते हैं. जिसे करना शुभ माना जाता है. नवरात्रि में यदि दुर्गा सप्तशती का पाठ (durga saptashati path) किया जाए तो विशेष फल मिलता है.

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ऐसा माना जाता है कि चैत्र नवरात्रि में रोजाना दुर्गा सप्तशती (Durga Saptashati) पढ़ने से मां प्रसन्न होती हैं और व्यक्ति को धन-धान्य, मान-सम्मान और सौभाग्य का आशीर्वाद देती है. लेकिन, दुर्गा सप्तशती पढ़ने का पूरा लाभ आपको तभी मिलेगा जब आप कुछ नियमों (Shri Durga Saptashati rules) को ध्यान में रखेंगे. तो, चलिए वो नियम कौन-से हैं.   

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दुर्गा सप्तशती पाठ करने के नियम 

दुर्गा सप्तशती का पाठ शुरू करने से पहले पुस्तक को लाल कपड़े पर रखकर उस पर अक्षत और फूल चढ़ाएं. पूजा करने के बाद ही किताब पढ़ना शुरू करें. हमेशा ये बात याद रखें कि पुस्तक को कभी भी हाथ में लेकर पाठ ना करें. शास्त्रों में पुस्तक को कभी भी हाथ में लेकर पाठ नहीं करना (Shri Durga Saptashati rules) चाहिए. 

दुर्गा सप्तशती का पाठ करते वक्त आपको कभी भी विराम नहीं लेना चाहिए. जब भी आप दुर्गा सप्तशती का पाठ शुरू करें तो बीच में रुकना नहीं चाहिए. हां, एक अध्यान खत्म होने के बाद आप 10 से 15 सेकेंड का विराम ले सकते हैं.  

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दुर्गा सप्तशती का पाठ करते टाइम इस बात का भी ध्यान रखें कि आपके पाठ करने की गति न ही ज्यादा तेज होनी चाहिए और न ही ज्यादा धीरे. मध्यम गति में ही दुर्गा सप्तशती का पाठ करना चाहिए. दुर्गा सप्तशती के पाठ में एक-एक शब्द का उच्चारण साफ और स्पष्ट होना चाहिए. इसमें शब्दों को उल्टा-पुल्टा न बोलें और ना ही शब्दों का हेर-फेर करें. पाठ इस तरह से करें कि आपको एक-एक शब्द स्पष्ट सुनाई दे.

दुर्गा सप्तशती का पाठ करने से पहले शुद्धता का पूरा ध्यान रखें. इसलिए स्नान वगैराह करके साफ वस्त्र पहनकर ही पाठ करें. कुशा के आसन या ऊन के बने आसन पर बैठकर ही पाठ करें. इसके साथ ही पाठ करते वक्त हाथों से पैर का स्पर्श न करें. उसके बाद ही सप्तशती का पाठ शुरू करें. 

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दुर्गा सप्तशती का पाठ करने से पहले पुस्तक को नमन और ध्यान करें. इसके बाद ही पुस्तक को प्रणाम करके पाठ शुरू करें. अगर संस्कृत भाषा में दुर्गा सप्तशती के पाठ का उच्चारण करने में कठिनाई हो रही हो तो इसे हिंदी में किया जा सकता है. लेकिन जो भी पढ़ें उसे सही और स्पष्ट बोलें. 

यदि एक दिन में पूरा पाठ न किया जा सके, तो पहले दिन केवल मध्यम चरित्र का पाठ करें और दूसरे दिन बाकी 2 चरित्र का पाठ करें. या फिर दूसरा विकल्प ये भी है कि एक, दो, एक चार, दो एक और दो अध्यायों को क्रम से सात दिन में पूरा करें. 

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इस बात का भी खास ध्यान रखना चाहिए कि पाठ करते वक्त जम्हाई नहीं लेनी चाहिए क्योंकि ये आलस को दर्शाता है. इसलिए मन को शांत और स्थिर करके ही पाठ शुरू करें. अगर किसी दिन आपके पास समय की कमी है और आप दुर्गा सप्तशती का पूरा पाठ नहीं कर सकते तो सप्तशती के आखिर में दिए गए कुंजिका स्तोत्र का पाठ करें और देवी से अपनी पूजा स्वीकार करने की प्रार्थना करें.  

इसका आखिरी नियम ये है कि पाठ खत्म हो जाने के बाद आखिर में मां दुर्गा से अपनी किसी भी तरह की भूल चूक के लिए क्षमा प्रार्थना (important rules for durga saptashti path) जरूर करें.