News Nation Logo
Banner

'पूंजी की समस्या को दूर करने के लिए कॉर्पोरेट घरानों को बैंक स्थापित करने की मिले अनुमति'

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक नीति आयोग (NITI Aayog) के पूर्व उपाध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया (Arvind Panagariya) का कहना है कि भारत में बैंक से मिलने वाले कर्ज की मात्रा अपर्याप्त है.

News Nation Bureau | Edited By : Dhirendra Kumar | Updated on: 06 Feb 2021, 09:07:00 AM
Banks

Banks (Photo Credit: newsnation)

नई दिल्ली :

भारतीय अमेरिकी अर्थशास्त्री और नीति आयोग (NITI Aayog) के पूर्व उपाध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया (Arvind Panagariya) ने भारतीय बैंकिंग सिस्टम को लेकर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा है कि भारत में उत्पादन बढ़ाने कि लिए पूंजी एक महत्वपूर्ण कारक है और भारत में वाणिज्यिक क्षेत्र को मिलने वाली पूंजी का सबसे बड़ा स्रोत बैंक हैं. मतलब यह कि वाणिज्यिक क्षेत्र पूंजी के लिए बैंकों के ऊपर 60 फीसदी से ज्यादा निर्भर हैं और शेष पूंजी को जुटाने के लिए अन्य स्रोतों का इस्तेमाल किया जाता है. बता दें कि जनवरी 2015 में अरविंद पनगढ़िया को नीति आयोग का पहला उपाध्यक्ष बनाया गया था. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक उनका कहना है कि भारत में बैंक से मिलने वाले कर्ज की मात्रा अपर्याप्त है. उनका कहना है कि 2018 में जीडीपी के अनुपात के रूप में बैंकों द्वारा निजी क्षेत्र को दिए जाने वाले घरेलू ऋण की हिस्सेदारी महज 50 फीसदी थी.  

यह भी पढ़ें: RBI Credit Policy: RBI ने ब्याज दरों में नहीं किया कोई बदलाव

भारत वैश्विक निर्यात बाजार में महत्वपूर्ण हिस्सेदारी पर कब्जा करने में है सक्षम: अरविंद पनगढ़िया
उनका कहना है कि चीन में यह अनुपात 158 फीसदी, दक्षिण कोरिया में 141 फीसदी, थाईलैंड में 112 फीसदी, चिली में 81 फीसदी, दक्षिण अफ्रीका में 66 फीसदी और ब्राज़ील में 61 फीसदी थी. उनका कहना है कि 5 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए बैंक ऋण की उपलब्धता को बढ़ाने का महत्व तब तक नहीं है तक भारत के वर्तमान बेरोजगार श्रमिकों के लिए अच्छी तरह से भुगतान किए गए रोजगार का सृजन नहीं किया जा सकता है. परिधान, फुटवियर, फर्नीचर, खिलौने और लाइट मैन्युफैक्चरर्स के मेजबान के रूप में श्रम गहन क्षेत्रों में उभरने के लिए भारत को मध्यम और बड़े पैमाने के उद्यमों की आवश्यकता है, जो वैश्विक निर्यात बाजार में महत्वपूर्ण हिस्सेदारी पर कब्जा करने में सक्षम हैं. 

यह भी पढ़ें: कच्चे तेल में तेजी से दुनियाभर की अर्थव्यवस्था को पहुंचेगा नुकसान, धर्मेंद्र प्रधान ने दी चेतावनी

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक उनका कहना है कि सरकार ने कुछ महत्वपूर्ण सुधार किए हैं जैसे कॉर्पोरेट प्रॉफिट टैक्स को कम करना और नए श्रम कानून प्रमुख हैं. हालांकि भारत को बैंक ऋण की उपलब्धता को बढ़ाने के लिए बहुत कुछ किए जाने की आवश्यकता है. उनका कहना है कि इसके संदर्भ में आरबीआई के आंतरिक कार्य समूह (IWG) की नवंबर 2020 की रिपोर्ट में दिए गए विचारोत्तेजक और रचनात्मक सुझाव काफी महत्वपूर्ण हैं. हालांकि, अफसोस की बात है कि रिपोर्ट में बहुत सारी टिप्पणी नकारात्मक रही है. मुख्य रूप से बैंकों के प्रमोटरों के रूप में कॉर्पोरेट घरानों के प्रवेश की अनुमति देने की अपनी सिफारिश पर टिप्पणी निराशाजनक है. 

First Published : 06 Feb 2021, 08:59:57 AM

For all the Latest Business News, Banking News, Download News Nation Android and iOS Mobile Apps.