'लव इन हिरोशिमा', चीन में बने पटाखों का यह नया मॉडल सोशल मीडिया पर वायरल, जानें इसका साइंस

Viral: चीन के लियुयांग से आतिशबाजी का एक 27 सेकंड का वीडियो वायरल हो रहा है, जिसे यूजर्स 'लव इन हिरोशिमा' कहकर पुकार रहे हैं. आइए जानते हैं इस बारे में.

Viral: चीन के लियुयांग से आतिशबाजी का एक 27 सेकंड का वीडियो वायरल हो रहा है, जिसे यूजर्स 'लव इन हिरोशिमा' कहकर पुकार रहे हैं. आइए जानते हैं इस बारे में.

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Namrata Mohanty
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Viral: चीन में बने एक नए पटाखे के मॉडल का नाम 'लव इन हिरोशिमा' रखा गया है. चीन के मशहूर आतिशबाजी केंद्र लियुयांग से एक वीडियो सामने आया है, जो 27 सेकंड का है. इस वीडियो को ऑनलाइन यूजर्स ने लव इन हिरोशिमा नाम दिया है. इस आतिशबाजी के पीछे का साइंटिफिक कारण क्या है? आइए जानते हैं.

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आधुनिक आतिशबाजी इंजीनियरिंग का उदाहरण

ऐसी आतिशबाजी में सही समय पर होने वाले विस्फोट आसमान को रोशनी और रंगों से भर देते हैं. यह आधुनिक आतिशबाजी इंजीनियरिंग का एक बेहतरीन उदाहरण है. हालांकि, इस नाम ने ऑनलाइन विवाद भी खड़ा कर दिया लेकिन विज्ञान प्रेमी इस तकनीक से बेहद प्रभावित हैं, जो इस तरह के प्रदर्शन को संभव कर पाते हैं. 

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क्यों ट्रेंड कर रहा है लव इन हिरोशिमा?

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो क्लिप ने अपने शानदार दृश्यों के चलते खूब सुर्खियां बटोरी हैं. नेटिजन्स ने इसके नाटकीय प्रदर्शन की प्रशंसा की है. वायरल वीडियो में आतिशबाजी का अद्भुत नजारा देखने को मिलता है, जो आम दर्शकों ने पहले कभी नहीं देखा. इतने बड़े पैमाने पर विस्फोट करने के लिए सावधानीपूर्वक सुरक्षा योजना की भी आवश्यकता पड़ती है.

लियुयांग है बेहद खास शह

लियुयांग को लंबे समय से आतिशबाजी का वैश्विक केंद्र कहा जा रहा है. यहां के इंजीनियर आकार और रंग की सीमाओं को आगे बढ़ाने के लिए अलग-अलग फॉर्मूलेशन, लॉन्च, एंगल और इग्नीशन प्रोसेस के साथ ऐसे प्रयोग करते हैं. यह एक नई और ज्यादा एनर्जी वाला डिजाइन है, जो फिल्मी लुक क्रिएट कर रहा है, जिन्हें कई किलोमीटर दूर से भी देखा जा सकता है. 

क्या है इसका साइंस?

आधुनिक आतिशबाजी का कारण है सही रसायन विज्ञान यानी केमिस्ट्री और फिजिक्स. विस्फोट के पीछे जिन पटाखों का इस्तेमाल किया गया है कि उसमें कई प्रकार के मेटेलिक सॉल्ट्स को मिलाया गया है. गर्मी के कारण उन सॉल्ट्स में से रंग पैदा होते हैं. जैसे कि स्ट्रोंटियम से लाल रंग, कॉपर से नीला रंग और सोडियम से पीला रंग.

यह धमाका कैसे होता है?

पटाखों में कुछ रसायन होते हैं जिन्हें ऑक्सीडाइजर कहते हैं. ये विस्फोट के लिए ऊर्जा देते हैं. इनमें सभी रसायनों को सही मात्रा में मिलाया जाता है. पटाखा कितनी ऊंचाई तक जाएगा, कब फटेगा और कितनी तेज रोशनी या आवाज होगी, यह सब कुछ पहले से तय किया जाता है.

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