News Nation Logo
एकनाथ शिंदे ने आगे की रणनीति पर चर्चा के लिए दोपहर 2 बजे गुवाहाटी के होटल में बैठक बुलाई भारत में पिछले 24 घंटों में कोरोना के 17,073 नए मामले सामने आए दिल्ली हाईकोर्ट के नए मुख्य न्यायाधीश सतीश चंद्र शर्मा को आज LG दिलाएंगे शपथ महाराष्ट्र: मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने बुलाई कैबिनेट बैठक, 2.30 बजे होगी मीटिंग असम : एकनाथ शिंदे गुवाहाटी स्थित कामाख्या मंदिर पहुंचे भारत में पिछले 24 घंटों में कोरोना के 14,506 नए मामले सामने आए महाराष्ट्र: कल होगा फ्लोर टेस्ट, राज्यपाल ने बुलाया विधानसभा का विशेष सत्र असम बाढ़ के लिए मुख्यमंत्री राहत कोष में 51 लाख रुपए दान करेंगे एकनाथ शिंदे बीजेपी के 164 विधायकों का दावा- देवेंद्र फडणवीस कल देर रात सीएम पद का शपथ ले सकते हैं बीजेपी के कोर ग्रुप के सदस्यों और विधायकों की बैठक देवेंद्र फडणवीस के घर शुरू

पुलिस की मजबूरी थी तुरत-फुरत गुड वर्क दिखाना, सुबह हत्या और रात को अपहरण से फंसी थी नाक

कानपुर गोलीकांड में 8 पुलिसवालों की हत्या, फिर उनके हत्यारे विकास दुबे के एनकांउटर के बाद से उत्तर प्रदेश में पुलिस के इकबाल पर सवालिया निशान खड़े हो रहे थे.

News Nation Bureau | Edited By : Dalchand Kumar | Updated on: 25 Jul 2020, 09:30:51 AM
Police

पुलिस की मजबूरी थी तुरत-फुरत गुड वर्क दिखाना, क्योंकि फंसी थी नाक (Photo Credit: फाइल फोटो)

लखनऊ:  

कानपुर गोलीकांड (Kanpur encounter) में 8 पुलिसवालों की हत्या, फिर उनके हत्यारे विकास दुबे के एनकांउटर के बाद से उत्तर प्रदेश में पुलिस के इकबाल पर सवालिया निशान खड़े हो रहे थे. रही सही कसर कानपुर में ही लैब टेक्नीशियन संजीत यादव (Sanjeet Yadav) की अपहरण के बाद हत्या और इसके बाद गोंडा जिले से ऐन पुलिस चौकी की नाक के नीचे से हुए बच्चे के अपहरण ने पूरी कर दी. विपक्ष ने लगातार सवाल पूछ रहा था. अखिलेश यादव से लेकर प्रियंका गांधी ने योगी सरकार (Yogi Government) पर तीखे हमले बोल रखे थे. ऐसे में पुलिस को तुरत फुरत कुछ करके दिखाना ही था.

यह भी पढ़ें: गोंडा अपहरण कांडः पुलिस ने बच्चे को बरामद कर 4 करोड़ फिरौती मांगने वाली महिला समेत 5 को किया गिरफ्तार

कानपुर के बिकरू गांव में कुख्यात अपराधी विकास दुबे को पकड़ने पुलिस पहुंची थी तो यहां खाकी वर्दी के पीछे छिपे कानून के कुछ गद्दारों ने ही अपराधियों का साथ दिया. भले ही विकास दुबे के एनकांउटर के साथ ही उसके राजनीतिक और प्रशासनिक अधिकारियों से संबंध दफन हो चुके हैं, मगर सब यह जानते हैं कि विकास दुबे एक खौफ का डंका नेताओं और अफसरों की शह पर ही बजता था. 2-3 जुलाई की रात अगर पुलिसवालों ने ही विकास दुबे के लिए कथित तौर पर मुखबिरी न की होती तो वह 8 पुलिसकर्मी आज जिंदा हो सकते थे, जो कानपुर गोलीकांड में शहीद हो गए.

भले ही विकास दुबे का एनकाउंटर कर पुलिस ने इस पूरे घटनाक्रम को ही खत्म कर दिया हो मगर सवाल फिर वही सामने आ खड़ा होता है कि आखिर अपराधियों के खात्मे का दावा करने वाली योगी सरकार की पुलिस कर क्या आ रही है. क्योंकि कानपुर के ही बर्रा से करीब एक महीने पहले अगवा किए गए लैब टेक्नीशियन संजीत यादव के मामले में भी उसकी लापरवाही और लेटलतीफी साफ तौर पर देखी गई. जिसका नतीजा यह है कि पुलिस के सामने फिरौती की रकम देने के बाद भी संजीत यादव आज अपनों के बीच नहीं रहा.

यह भी पढ़ें: जम्मू-कश्मीर: श्रीनगर में फिर शुरू हुई मुठभेड़, 2-3 आतंकी घिरे

22 जून की शाम संजीत यादव का अपहरण हुआ. 23 जून को गुमशुदगी की शिकायत लिखी गई थी. इसके बाद 26 जून को उसे एफआईआर में तब्दील किया गया. 29 जून को परिजनों के पास फिरौती के लिए कॉल आया था. मगर इसके बाद भी कुछ नहीं हो पाया. 13 जुलाई की रात पुलिस ने ही फिरौती की रकम लेकर परिजनों को भेजा था. फिर भी अपहरणकर्ता गुजैनी पुल से फिरौती की रकम लेकर फरार हो गए और पुलिस देखती रह गई.

इतना ही नहीं, हम तो तब हो गई जब उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में पुलिस की नाक के नीचे से ही एक 4 साल के बच्चे का अपहरण हो गया. शुक्रवार को मास्क और सेनिटाइजर बांटने के बहाने बदमाशों ने एक किराना व्यवसायी के बेटे का अपहरण कर लिया. यहां भी बच्चे के अपहरण के बाद बदमाशों ने परिजन को फोन कर 4 करोड़ रुपए की फिरौती मांगी.

यह भी पढ़ें: CRPF के सब-इंस्पेक्टर ने अपने सीनियर की हत्या कर की खुदकुशी

गोंडा के करनैलगंज इलाके में जिस जगह से बदमाशों ने बच्चे को किडनैप किया, ठीक उसी जगह पर पुलिस चौकी है. स्थानीय लोग कहते हैं कि दिनदहाड़े हुई इस वारदात पर यही कह सकते हैं कि बदमाश आंखों से काजल निकाल ले गए. लेकिन पुलिस चौकी के ठीक पीछे हुई इस बड़ी वारदात ने पुलिस के इकबाल पर सवाल तो उठा ही दिए हैं.

First Published : 25 Jul 2020, 09:24:45 AM

For all the Latest States News, Uttar Pradesh News, Download News Nation Android and iOS Mobile Apps.