हिंगोली के बाभुळगांव स्थित येडोबा नागनाथ मंदिर का अद्भुत रहस्य, अंगारों पर चलने के बाद भी भक्तों के नहीं जलते पैर!

Yedoba Nag Nath Mandir: महाराष्ट्र के हिंगोली जिले में स्थित इस मंदिर में भक्त जलते अंगारों पर नंगे पैर चलते हैं. आइए जानते हैं इस रहस्यमयी मंदिर के बारे में.

Yedoba Nag Nath Mandir: महाराष्ट्र के हिंगोली जिले में स्थित इस मंदिर में भक्त जलते अंगारों पर नंगे पैर चलते हैं. आइए जानते हैं इस रहस्यमयी मंदिर के बारे में.

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Namrata Mohanty
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yedaoba mandir Photograph: (yedaoba mandir)


Yedoba Nag Nath Mandir: महाराष्ट्र के हिंगोली जिले के बाभुळगांव गांव में स्थित येडोबा नागनाथ मंदिर आस्था का प्रमुख केंद्र है. यह मंदिर अपने एक अद्भुत और रहस्यमयी धार्मिक अनुष्ठान के कारण भी जाना जाता है. यहां हर साल खास पर्वों पर ऐसा दृश्य देखने को मिलता है, जिसे देखकर श्रद्धालु ही नहीं बल्कि सामान्य लोग भी हैरान हो जाते हैं. दरअसल, इस मंदिर में दर्शन के लिए आने वाले भक्त जलते हुए अंगारों के ढेर पर नंगे पांव चलते हैं. मान्यता है कि इसके बावजूद उनके पैर नहीं जलते है.

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सालों पुरानी है परंपरा

इस मंदिर की यह परंपरा वर्षों पुरानी बताई जाती है और स्थानीय लोगों के अनुसार यह येडोबा नागनाथ की कृपा का प्रमाण है. येडोबा नागनाथ को भगवान शिव के लोकदेवता स्वरूप माने जाते हैं. ऐसी मान्यता है कि भक्तों का विश्वास है कि जो भी श्रद्धा, विश्वास और शुद्ध मन से अंगारों पर चलता है, उसकी भगवान स्वयं रक्षा करते हैं.

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कहां है यह मंदिर?

यह मंदिर महाराष्ट्र के हिंगोली जिले के औंधा नागनाथ में स्थित है. यह भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है. इस मंदिर में शिव जी के नागनाथ और नागेश्वरी रूप की पूजा की जाती है. मान्यता है कि इस मंदिर के दर्शन करने से कालसर्प दोष उतरता है.

किसने बनवाया मंदिर?

लोक मान्यताओं और इतिहासकारों की मानें तो इस मंदिर को पांडवों ने बनवाया था. युद्धिष्ठिर ने वनवास के दौरान यहां मंदिर स्थापित किया था. मुगलकाल में भी इस मंदिर को नुकसान पहुंचाया गया था. हालांकि, इसके बाद अहिल्यादेवी ने मंदिर को मराठा संस्कृति में दोबारा निर्मित करवाया.

महाशिवरात्रि और सावन में लगती है भीड़

धार्मिक आयोजनों के दौरान मंदिर परिसर में जलते हुए कोयले बिछाए जाते हैं. इसके बाद 'येडोबा महाराज की जय' के जयघोष के साथ भक्त एक-एक कर अंगारों पर चलते हैं. मगर भक्तों के पैर नहीं जलते हैं. हालांकि, इसको लेकर कोई मान्यता नहीं है लेकिन भक्तों के विश्वास को लेकर इसे किया जाता है. इस मंदिर में महाशिवरात्रि और सावन के महीने में भक्तों का आना-जाना ज्यादा होता है.

अद्भुत रहस्य है इस मंदिर का

इस मंदिर का सबसे बड़ा अद्भुत रहस्य और आकर्षण जलते अंगारों पर नंगे पैर चलने की परंपरा है. यहां लहाडी पौर्णिमा पर हर साल बड़ी यात्रा होती है. इस दौरान भक्त धधकते अंगारों पर चलते हैं, लेकिन उनके पैरों में न तो जलन होती है और न ही छाले नहीं पड़ते हैं. यह चमत्कार भक्तों की अटूट श्रद्धा, येडोबा महाराज की कृपा और दिव्य शक्ति से जुड़ा माना जाता है.

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