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चीन के खिलाफ और भारत के पक्ष में आए दुनिया के बड़े देश, समझें इस नए समीकरण को

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) के बाद कई देश भारत के समर्थन में आते गए. ताजा नाम जापान (Japan) का जुड़ा है, जो भारत का न सिर्फ मित्र है, बल्कि वर्तमान हालात में भारत को अपने 'स्टेट सीक्रेट लॉ' में शामिल कर रहा है.

Nihar Ranjan Saxena | Edited By : Nihar Saxena | Updated on: 04 Jul 2020, 09:38:23 AM
India China Standoff

ड्रैगन की फुफकार का डटकर सामना कर रहा हाथी यानी भारत. (Photo Credit: न्यूज नेशन)

highlights

  • ताजा सीमा विवाद पर भारत को मिला कई देशों का साथ.
  • कई देश तो चीन के खिलाफ सामरिक मोर्चाबंदी में भी जुटे.
  • जापान और ऑस्ट्रेलिया सामरिक खेमेबंदी के प्रबल पक्षधर है.

नई दिल्ली:

कोरोना वायरस (Corona Virus) के वैश्विक प्रचार-प्रसार में चीन की संदिग्ध भूमिका सामने के बाद से दुनिया के सैकड़ों देश उसके खिलाफ आ चुके हैं. इसके बावजूद अपनी आदत से मजबूर ड्रैगन ने कोरोना से इस जंग के बीच पूर्वी लद्दाख (Ladakh) में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर भारत से मोर्चा और खोल लिया. ऐसे में सीमा पर जारी तनाव और तनातनी के बीच शुक्रवार को अचानक लेह पहुंचकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने चीन समेत पूरी दुनिया को एक संदेश दे दिया. अब इस मसले पर वैश्विक मंच पर भी चीन (China) के खिलाफ धड़ेबंदी को पीएम मोदी की कूटनीतिक पहल के बरक्स देखना होगा. इसकी शुरुआत अमेरिका ने की थी. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने सीमा विवाद मसले पर खुलकर भारत के साथ खड़े रहने का ऐलान किया था. फिर तो एक के बाद एक कई देश समर्थन में आते गए. ताजा नाम जापान (Japan) का जुड़ा है, जो भारत का न सिर्फ मित्र है, बल्कि वर्तमान हालात में भारत को अपने 'स्टेट सीक्रेट लॉ' में शामिल कर रहा है. चीन के खिलाफ यह एक बड़ा कदम है. एक नजर डालते हैं भारत-चीन सीमा विवाद पर कौन-कौन देश भारत के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं.

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अमेरिका
कोरोना काल से भी पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप 'ट्रेड वॉर' के जरिये चीन पर निशाना साधते आए हैं. कोरोना संक्रमण के विस्तार के बाद तो अमेरिकी राष्ट्रपति के चीन पर हमले और तेज व तीखे हो गए हैं. वह खुलेआम चीन पर कोरोना वायरस फैलाने का आरोप लगा चुके है. इसके अलावा अमेरिका ने साफ-साफ शब्दों में कहा है कि वास्तविक नियंत्रण रेखा पर विवाद के लिए चीन पूरी तरह जिम्मेदार है. यहां तक कि व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कायले मैकनेनी ने जिक्र किया कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का दो टूक मानना है कि भारत-चीन सीमा पर बीजिंग का आक्रामक रवैया चीन की कम्युनिस्ट पार्टी का असली चेहरा है. इसके अलावा अमेरिका ने भारत की तरफ से चीनी एप पर प्रतिबंध लगाने का भी समर्थन किया है. और तो और, अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने भारत के इस कदम का स्वागत किया है.

फ्रांस
भारत और फ्रांस की दोस्ती अब दि्वपक्षीय संबंधों से कहीं आगे बढ़कर सामरिक रिश्तों में तब्दील हो चुकी है. फ्रांस ने चीन से सीमा विवाद के बीच अत्याधुनिक राफेल विमानों की आपूर्ति जल्द करने का वादा किया है. इसके साथ ही खुलेतौर पर चीन से सीमा विवाद पर भारत को फ्रांस का भी समर्थन मिला है. फ्रांस के रक्षामंत्री ने राजनाथ सिंह को चिट्ठी लिखकर भारतीय जवानों की शहादत पर दुख जताया था. फ्रांस की रक्षा मंत्री फ्लोरेंस पार्ली ने लिखा था 'ये सैनिकों, उनके परिवारों और राष्ट्र के खिलाफ एक कठिन आघात था. इस कठिन हालात में, मैं फ्रांसीसी सेना के साथ अपना समर्थन को व्यक्त करना चाहती हूं. फ्रांस की सेना आपके साथ खड़ी है.' इसके अलावा मंगलवार को फ्रांस के विदेश मंत्री ने एस जयशकंर से इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की. भारत फ्रांस से 36 राफेल विमान खरीदने का सौदा भी कर चुका है. यहां यह भी कतई नहीं भूलना होगा कि फ्रांसीसी नौसेना प्रशांत महासागर में भारत के साथ संयुक्त सैन्य अभ्यास और पेट्रोलिंग का प्रस्ताव देकर सामरिक संबंधों को एक नई दिशा देने के लिए आगे बढ़ चुका है.

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जापान
जापान ने भी सीमा विवाद पर भारत का समर्थन किया है. जापान ने शुक्रवार को ही कहा है कि वह नियंत्रण रेखा पर यथास्थिति को बदलने वाले किसी भी एकतरफा प्रयास का विरोध करता है. इसके साथ ही जापान ने भारत के प्रयासों की तारीफ की है. जापान के भारत में राजदूत सतोषी सुजूकी ने भारतीय विदेश सचिव हर्ष श्रींगला से मुलाकात के बाद ट्वीट किया, 'भारत सरकार के शांतिपूर्व समाधान के प्रयासों की मैं तारीफ करता हूं. जापान आशा करता है कि इस विवाद का शांतिपूर्वक समाधान होगा.' गौरतलब है कि जापान और चीन के बीच सेनकाकू द्वीप को लेकर भी तनातनी का माहौल है. ऐसे में जापान भारत को एक और विशिष्ट दर्जा देने जा रहा है. चीन से बढ़े खतरे को देखते हुए जापान अब भारत, ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन के साथ अपनी डिफेंस इंटेलिजेंस साझा करके अपने स्टेट सीक्रेट लॉ का दायरा बढ़ाना चाहता है. पिछले महीने इसे लेकर कानून में बदलाव किया गया है जिसके बाद इन देशों को विशेष दर्जा दिया गया है.

ऑस्ट्रेलिया
ऑस्ट्रेलिया ने कहा है कि भारत-प्रशांत क्षेत्र में अमेरिका और चीन में बढ़ते तनाव के बीच वह अपने सैन्य खर्चों का बजट बढ़ाएगा. ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन ने कहा है कि वह अगले 10 साल में सेना का बजट 270 अरब ऑस्ट्रेलियन डॉलर करेंगे. ये 40 फ़ीसदी की बढोत्तरी है. भारत-प्रशांत क्षेत्र में ऑस्ट्रेलिया ने सिर्फ चीन-अमेरिकी वर्चस्व को ही चुनौती नहीं दी है, बल्कि भारत, जापान, दक्षिण कोरिया, इंडोनेशिया, मलेशिया, सिंगापुर और वियतनाम को भी अपने साथ जुड़ने का न्योता दिया है. अगर ऑस्ट्रेलिया के भारत के पक्ष में आने की टाइमिंग पर गौर करें तो साफतौर पर यह चीन के खिलाफ मोर्चाबंदी है. गौरतलब है कि ऑस्ट्रेलिया अपने 5जी टेलकॉम सेक्टर में चीनी कंपनी को प्रतिबंधित कर चुका है. इसके साथ ही संकेतों में चीन पर आरोप लगा चुका है कि एक आधुनिक देश ऑस्ट्रेलियाई सरकार के प्रतिष्ठानों और संवेदनशील संस्थानों पर साइबर अटैक्स को अंजाम दे रहा है.

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आसियान देश
दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों के नेताओं ने दक्षिण चीन सागर को लेकर चीन के खिलाफ सख्‍त टिप्‍पणी की है. सदस्‍य देशों के नेताओं ने कहा कि 1982 में हुई संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि के आधार पर दक्षिण चीन सागर में संप्रभुता का निर्धारण किया जाना चाहिए. चीन ने हाल के सालों में रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इस समुद्री क्षेत्र पर दावे को लेकर आक्रमक रुख अपनाया है. उसके द्वारा जिन इलाकों पर दावा किया जा रहा है, उससे आसियान सदस्य देशों वियतनाम, मलेशिया, फिलीपींस और ब्रुनेई के क्षेत्र में अतिक्रमण होता है. ताइवान ने भी विवादित क्षेत्र के बड़ हिस्से पर दावा किया है. हालांकि भारत-चीन विवाद पर इन देशों ने सार्वजनिक तौर पर कोई टिप्पणी नहीं की है, लेकिन अनौपचारिक स्तरपर साफ संदेश दिया है कि वह चीन की आक्रामक विस्तारवादी नीति के खिलाफ बनने वाले किसी भी समीकरण का हिस्सा बनने को तैयार हैं.

ब्रिटेन
हांगकांग में नए राष्ट्रीय सुरक्षा कानून लागू होने के बाद बवाल थमने का नाम नहीं ले रहा है. एक ओर जहां हांगकांग में लोग सड़कों पर जबरदस्त प्रदर्शन कर रहे हैं वहीं दूसरी ओर अंतर्राष्ट्रीय मंच पर कई देश चीन की आलोचना कर रहे हैं. ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने चीन पर समझौते के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए हांगकांग के लोगों को ब्रिटेन की नागरिकता देने की कोशिश की. इसपर चीन ने पलटवार करते हए कहा कि ब्रिटेन को हांगकांग के लोगों को नागरिकता देने का कोई अधिकार नहीं. चीन ने कहा कि वह ब्रिटेन को हांगकांग के लोगों को नागरिकता नहीं देने देंगे और इसके लिए कड़े कदम उठाएंगे. इससे पहले ब्रिटेन कोरोना संक्रमण पर संयुक्त राष्ट्र और विश्व स्वास्थ्य संगठन में चीन के खिलाफ जांच का प्रस्ताव पेश कर चुका है. भारत-चीन सीमा विवाद पर भी ब्रिटेन का पक्ष साफ है. उसने युद्ध को किसी विवाद का हल नहीं करार देते हुए दोनों देशों से शांतिपूर्ण ढंग से बातचीत के जरिये मसला सुलझाने की नसीहत दी है. हालांकि चीन के खिलाफ उसकी मोर्चाबंदी अपने आप ही उसे भारत के साथ खड़ा करती है.

First Published : 04 Jul 2020, 09:38:23 AM

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