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चीन के 'आर्ट ऑफ वार' पर भारी पड़ेगी भारत की 'चाणक्य नीति', जानें कैसे

भारत चीन का बढ़ता तनाव और लद्दाख में छाए जंग के बादलों के पीछे क्या किसी किताब का हाथ भी हो सकता है. आपको शायद अजीब लगे लेकिन ड्रैगन अपनी एक-एक चाल आर्ट ऑफ द वार (Art of the War) नाम की अपनी एक प्राचीन किताब के हिसाब से चल रहा है.

News Nation Bureau | Edited By : Yogendra Mishra | Updated on: 04 Jul 2020, 08:02:35 AM
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K (Photo Credit: फाइल फोटो)

नई दिल्ली:

भारत चीन का बढ़ता तनाव और लद्दाख में छाए जंग के बादलों के पीछे क्या किसी किताब का हाथ भी हो सकता है. आपको शायद अजीब लगे लेकिन ड्रैगन अपनी एक-एक चाल आर्ट ऑफ द वार (Art of the War) नाम की अपनी एक प्राचीन किताब के हिसाब से चल रहा है. लेकिन आप ये जानकर हैरान होंगे कि पीएम मोदी भी एक प्राचीन किताब के हिसाब से ही चीन की हर चाल का जवाब दे रहे हैं. आइए जानते हैं कौन सी है वो किताब.

ड्रैगन सरहद पर जो भी हरकत कर रहा है. उसे वो करीब 2500 साल पुरानी द आर्ट ऑफ वॉर की नीति से कर रहा है. एक ऐसी किताब जिसमें जंग में दुश्मनों को घेरने. और फिर वार करने के तौर तरीके बताये गये हैं. लेकिन चीन की इस 2500 साल पुरानी नीति का तोड़ हिंदुस्तान के पास है और हिंदुस्तान उसी के मुताबिक चीन को सीमा पर ही नहीं बल्कि हर मोर्चे पर शिकस्त दे रहा है. जी हां, भारत चाणक्य नीति से ड्रैगन को मात दे रहा है. आज आपको चीन के खिलाफ हिंदुस्तान की चाणक्य नीति को बतायेंगे. बताएंगे कि कैसे 2400 साल पहले लिखी चाणक्य की नीतियां चीन को चीखने पर मजबूर कर देंगी. ये भी बताएंगे कि कैसे पीएम मोदी एक-एक कदम चाणक्य नीति के हिसाब से चल रहे हैं. आज हम आपको बताएंगे कि चाणक्यनीति के चलते क्यों चीन का भारत से हारना पक्का है.

आज से 2400 साल पहले जन्मा वो शख्स जिसने एक आम इंसान सम्राट बना डाला. आज उसी चाणक्य की नीति से भारत चालबाज चीन की तबाही का प्लान बना चुका है. जी हां आज हम आपको सिलसिलेवार ढंग से बताएंगे कि कैसे ड्रैगन की प्राचीन आर्ट ऑफ वॉर किताब की नीतियों पर मोदी की चाणक्य नीति भारी पड़ रही है.

11000 फीट ऊंचे रणक्षेत्र में पहुंचे पीएम मोदी के चेहरे पर आत्मविश्वास की चमक देख चीन सहमकर रह गया होगा. भारतीय फौज की हौसला अफजाई करने और लद्दाख के रणक्षेत्र को समझने के लिए मोदी ने अचानक दौरा इसलिए किया क्योंकि चाणक्य नीति कहती है कि युद्ध को जीतने के लिए युद्धक्षेत्र के बारे में जानना बेहद ज़रूरी है. अब समझिए कि कैसे मोदी चाणक्य के शिष्य के समान चाणक्य की नीतियों को अपनाकर चीन की बाजू मरोड़ रहे हैं.

चाणक्य नीति जिन पर अमल कर रहा भारत

  1. चाणक्य नीति कहती है कि शत्रु बलशाली हो तो उसे उसी के समान व्यवहार करके हराया जा सकता है. दरअसल पीएम मोदी चाणक्य की इस नीति का इस्तेमाल 15 जून को हुई झड़प के बाद से ही कर रहे हैं. दरअसल लद्दाख में सेना चीन के खिलाफ मिरर फॉर्मेशन का इस्तेमाल कर रही है. यानी जितनी सेना और जैसे हथियार चीन LAC पर ला रहा है, भारत भी उतनी ही फौज और वैसे ही हथियार LAC पर तैनात कर रहा है. यानी चाणक्य नीति के मुताबिक भारत चीन के समान ही व्यवहार कर रहा है.
  2. चाणक्य नीति कहती है कि शत्रुओं से घिरे होने पर घबराएं नहीं. उनकी हर चाल पर नज़र रखें और सतर्क रहें. पीएम मोदी यही कर रहे हैं, भारत चीन की हर हरकत पर नज़र बनाए हुए है. चीन के साथ-साथ वो पाक फौज के मूवमेंट पर भी बारीक नज़र रख रहे हैं. और जैसा कि चाणक्य ने कहा भारत की फौज हर पल सतर्क है.
  3. चाणक्य नीति कहती है कि अपनी नीति तो अपनाओ, लेकिन शत्रु की युद्ध नीति को समझना भी उतना ही जरूरी है. युद्ध में अपने शत्रु की तरह सोचना भी जरूरी है. जो भी नीति हो, उसे गुप्त रखो. हालांकि विपक्ष लगातार पीएम मोदी को उकसा रही है. उनसे जवाब मांग रही है कि लद्दाख में क्या हुआ पीएम इस पर बोंलें. लेकिन पीएम खामोश हैं. क्योंकि वो शत्रु की नीति समझ रहे हैं और अपनी नीति को गुप्त रखे हए हैं. यहां तक की मीडिया को भी गलवान से दूर ही रखा गया है.
  4. चाणक्य नीति कहती है शत्रु को जहां से भी आर्थिक, सामाजिक, मानसिक एवं शारीरिक शक्ति प्राप्त हो रही है, उस स्रोत को शत्रु तक पहुंचने से पहले ही मिटा दो. सही समय का इंतजार करो. जब शत्रु पूरी तरह से कमजोर हो तब उस पर मिलकर आक्रमण कर दो. चाणक्य नीति को मानकर पीएम मोदी चीन को आर्थिक चोट तो दे ही रहे हैं. सरकारी ठेके रद्द किए जा रहे हैं. चीन के 59 मोबाइल एप पर रोक लगाई गई है. चीन से आ रही स्टील पर डंपिंग ड्यूटी लगाई गई है. लेकिन इसके साथ साथ पीएम मोदी चीन के अमेरिका जैसे शत्रुओं के साथ मिलकर चीन पर दबाव भी बना रहे हैं. यानी चाणक्य नीति पर पूरी तरह से भारत अमल कर रहा है. चाणक्य नीति ऐसी किताब है जिसमें हर तरह के दुश्मन का जिक्र है.
  5. विजिगीषु (विजय की आकांक्षा रखने वाला) के शत्रु 2 प्रकार के होते हैं. एक तो स्वाभाविक शत्रु होता है, जो बराबर का ताकतवर है और जिसकी सीमाएं देश से लगी हुई हैं. दूसरा काल्पनिक शत्रु है, जो इतना ताकतवर नहीं है कि युद्ध करके जीत जाए किंतु दुश्मनी का भाव रखता है. चाणक्य के इस सूत्र के आधार पर चीन भारत का बलवान शत्रु है और पाकिस्तान कमज़ोर. जो भारत से जीत तो नहीं रखता लेकिन दुश्मनी का भाव रखता है. पाक इस मौके का फायदा ना उठा ले भारत का ध्यान इस बात पर भी टिका हुआ है.
  6. चाणक्य नीति कहती है कि शत्रु का सबसे घातक हथियार होता है उकसाना. शत्रु हमेशा ऐसा प्रयास करता है कि आपको उकसाया जाए जिससे आपको क्रोध आए. क्रोध में शक्ति और विवेक आधी हो जाती और शत्रु आपकी कमजोरी का फायदा उठा ले. जैसा कि चाणक्य नीति में लिखा है ठीक वैसे ही चीन भारत को उकसाने की कोशिश कर रहा है. उसका भोंपू ग्लोबल टाइम्स लगातार उकसाऊ बयानबाजी कर रहा है. लेकिन भारत शांति के साथ अडिग खड़ा है.
  7. शत्रु को पराजित करने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि कभी उस पर पहला वार हथियार से ना करें. शत्रु को पहले अपनी कूटनीति में फंसाएं यानी उसकी शक्तियों और सहयोगियों को उससे दूर करें. चाणक्य नीति कहती है कि दुश्मन पर पहला वार हथियार से मत करो. गलवान घाटी में भारत ने यही किया. भारतीय जवानों ने सिर्फ हाथों से ही चीन के सैनिकों की गर्दनें मरोड़कर उन्हें मौत के घाट उतार दिया और जाहिर है कि इससे चीन की फौज में भारतीय फौज का खौफ भी पैदा हो गया है.
  8. चाणक्य नीति कहती है कि राजा शक्तिशाली होना चाहिए तभी राष्ट्र उन्नति करता है. राजा की शक्ति के 3 प्रमुख स्रोत हैं- मानसिक, शारीरिक और आध्यात्मिक. मानसिक शक्ति उसे सही निर्णय के लिए प्रेरित करती है, शारीरिक शक्ति युद्ध में वरीयता प्रदान करती है और आध्यात्मिक शक्ति उसे ऊर्जा देती है. प्रजाहित में काम करने की प्रेरणा देती है. जाहिर है कि मोदी भी योग और ध्यान के के ज़रिए अपनी सेहत का पूरा ख्याल रखते हैं. तभी तो 11,000 फीट ऊंचे रणक्षेत्र में सीधे यूं ही पहुंच जाने में सक्षम हैं. साफ है मोदी और भारत चाणक्य नीति के मार्ग पर चल रहे हैं और ये एक ऐसी रणनीति है जिसका चीन के पास कोई जवाब नहीं है. यानी इस बार चाणक्य नीति ही चीन की तबाही की वजह बनेगी.
  9. सरहहद पर जारी इस शतरंज में चीन अपनी ऐतिहासिक किताब द आर्ट ऑफ वॉर से चाल चल रहा है तो भारत चाणक्य नीति से उसकी हर चाल को बेकार कर रहा है. इससे दुनिया हैरान है और चीन परेशान है। चीन को समझ नहीं आ रहा कि चाणक्य का जवाब ढूंढने वो आखिर जाए तो कहां जाए. चाणक्य की 'साम' नीति! यानी शत्रु से मित्रता के प्रयास करना. चाणक्य की साम नीति के तहत भारत गलवान में चीन को गर्दनतोड़ जवाब देने के बाद भी भारत शांति के प्रयास कर रहा है. वो बार-बार चीन को समझाने के लिए बातचीत कर रहा है। ये बातचीत सैन्य स्तर के अलावा राजनयिक स्तर पर और बैकडोर चैनल के ज़रिए भी जारी है. लेकिन दोस्ती का ये प्रस्ताव भारत कमज़ोरी के साथ नहीं बल्कि आंख से आंख मिलाकर रख रहा है.
  10. चाणक्य की 'दाम नीति'! यानी शत्रु पर पैसे से प्रहार करना. चाणक्य की दाम नीति के तहत भारत चीन पर बिना हथियार का इस्तेमाल किये वार कर रहा है. चीन को पैसे की ताकत दिखाने के लिए भारत ने चीनी कंपनियों के ठेके रद्द कर दिये. चीनी सामान के बहिष्कार का अभियान छेड़ दिया. ऐसे एक दर्जन से ज्यादा प्रोजेक्ट हैं. जिनके ठेके रद्द कर दिये गये. इसके अलावा भारत ने 59 चीनी एप पर बैन लगा दिया है..इससे चीन को अरबों डॉलर का नुकसान उठाना पड़ रहा है.
  11. चाणक्य की 'दंड नीति'! यानी शत्रु को शक्ति से दंडित करना. 43 चीनी सैनिकों की गर्दन तोड़ने के बाद भी भारत चीन की धमकियों से बेपरवाह है। भारत खुलकर LAC पर अपनी सैन्य क्षमताओं का विस्तार भी कर रहा है। सेना को जवाब देने की खुली छूट की घोषणा की जा चुकी है। भारत सरहद पर भारी हथियारों की तैनाती भी कर रहा है और दुश्मन को दंड देने के लिए दनादन हथियार खरीद भी कर रहा है.

चीन की आर्ट ऑफ वार

  1. भारत की चाणक्य नीति के बारे में तो आपको बता दिया लेकिन अब आपको बताते हैं चीन की उस किताब के बारे में. जो चीन की सारी साज़िशों की जड़ है. जिसकी नीतियों पर चलकर चीन सारी दुनिया से झगड़ता घूमता है. द आर्ट ऑफ वॉर वो चीनी किताब है जिसमें युद्ध से जुड़ी नीतियां बताई गई है. इस किताब को भी चाणक्य नीति के आसपास करीब 2500 साल पहले लिखा गया था.
  2. चीन की 'द ऑर्ट ऑफ वॉर' की नीति कहती है धीरे धीरे दुश्मन की तरफ बढ़ो! शुरू में चीन ने ऐसा ही किया. चीनी सैनिक गलवान से पहले डोकलाम और दौलत बेग ओल्डी में भारत की तरफ बढ़े. आगे बढ़ते हुए चीन ने भारत के हिस्से की जमीन पर तंबू लगाये. और इलाके को कब्जाने की नाकाम कोशिश की.
  3. चीन की 'द आर्ट ऑफ वॉर' की नीति कहती है सरहद पर दुश्मन से अड़ जाओ! सीमा पर चीन की हरकतों को लेकर दोनों देशों के सैनिकों के बीच झड़प भी हो चुकी है. हालांकि चीन की द आर्ट ऑफ वॉर की नीति कहती है कि दुश्मन से अड़ने के बाद पीछे हट जाओ. ऐसा ही चीन ने किया. उसने डोकलाम और दौलत बेग ओल्डी में विवाद खड़ा किया और फिर भारत के एक्शन के बाद पीछे भी हटा.
  4. चीन की 'द आर्ट ऑफ वॉर' की नीति कहती है दुश्मन के खिलाफ साज़िश करो! चीन ने गलवान घाटी में यही किया. उसने भारतीय सैनिकों पर हमले की पहले ही साजिश रच ली थी और फिर धोखे से हमला किया. हमले के लिए भी चीन ने नुकीले डंडों का इस्तेमाल किया. क्योंकि चीनी सैनिक सरहद पर हथियार इस्तेमाल नहीं कर सकते थे. इससे साफ पता चलता है कि चीन द आर्ट ऑफ वॉर की नीति पर चल रहा है.
  5. दुश्मन को आर्थिक तरक्की से रोको! भारत में चीनी माल की भरमार है. क्योंकि चीनी सामान भारत में बनने वाले सामान से कहीं ज्यादा सस्ते हैं. इसके पीछे चीन का इरादा भारत तो आर्थिक तरक्की से रोकने का था. लेकिन सीमा पर विवाद के बाद भारत में चीनी सामान का बहिष्कार किया जा रहा है और चीन की ये नीति उसपर भारी पड़ रही है.
  6. दुश्मन के दुश्मन को ताकतवर बनाओ! पाकिस्तान भारत के खिलाफ साजिशें रचता है और आतंक फैलाने का कोई मौका नहीं छोड़ता यही वजह रही कि चीन ने अपनी नीति के तहत पाकिस्तान को हर जरूरी मदद की. उसे हथियार दिये.पैसा दिया और पूरे मुल्क को अपने कब्जे में कर लिया. भारत का दुश्मन होने की ही वजह से चीन पाकिस्तान के आतंकियों को भी यूएन में आतंकी घोषित होने से बचाता आया हैय लेकिन ढाई हज़ारो साल पहले लिखी गई दो किताबों की इस जंग में चाणक्य नीति हर तरह से चीन की आर्ट ऑफ वॉर पर भारी पड़ रही है.

First Published : 03 Jul 2020, 11:57:12 PM

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