Magh Mela 2026: शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को 48 घंटे में मिला दूसरा नोटिस, माघ मेले में सुविधाएं वापस लेने की चेतावनी

Magh Mela 2026: प्रयागराज में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को दूसरा नोटिस भेजा गया है. प्रशासन ने उन्हें हमेशा के लिए माघ मेले में प्रतिबंधित करने की चेतावनी दी है.

Magh Mela 2026: प्रयागराज में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को दूसरा नोटिस भेजा गया है. प्रशासन ने उन्हें हमेशा के लिए माघ मेले में प्रतिबंधित करने की चेतावनी दी है.

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Namrata Mohanty
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swami avimukteshwaranand

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Magh Mela 2026: प्रयागराज में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और मेला प्रशासन के बीच लगातार टकराव बढ़ रहा है. प्रशासन ने उन्हें 48 घंटों के अंदर दूसरा नोटिस भेजा है. इस नोटिस में उन्हें मेले से हमेशा के लिए बैन करने की चेतावनी दी गई है. दरअसल, मौनी अमावस्या के दिन हुई घटना के चलते प्रशासन ने उनपर सख्त रुख अपनाया हुआ है. इस नए नोटिस में उन्हें सीधे तौर पर मेले से हमेशा के लिए प्रतिबंधित करने का और उनकी संस्था को आवंटित जमीन व सुविधाएं रद्द करने की चेतावनी दी है.

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प्रशासन ने उन पर आरोप लगााया है कि 'सुरक्षा घेरा तोड़ा, भगदड़ का खतरा पैदा किया' है. मौनी अमावस्या के दिन स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने इन सभी नियमों का उल्लंघन किया, जो आम जनता की सुरक्षा के लिए बनाए गए है.

समर्थकों में दिखा आक्रोश

दरअसल, प्रशासन ने दूसरा नोटिस पहले नोटिस का जवाब मांगते हुए दिया था, जिसमें यह भी स्पष्ट था कि मेले से प्रतिबंधित किया जा सकता है. शंकराचार्य के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी शैलेन्द्र योगिराज ने प्रशासन के इस रवैया पर तीखी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा है कि सरकार पूरी तरह बदले की भावना के साथ कार्रवाई कर रही है. प्रशासन ने पारदर्शिता का उल्लंघन किया है. शंकराचार्य के शिविर पांडाल के पीछे पुरानी डेट का नोटिस लगाया गया है और उसके बाद अधिकारियों ने जवाब मांगा.

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24 घंटों में मांगा जवाब

प्रशासन ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया था. इसमें उन्होंने कहा कि यदि 24 घंटे के अंदर संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो उन्हें भविष्य में कभी मेले में प्रवेश की अनुमति नहीं मिलेगी. 

'शंकराचार्य' पद पर छिड़ा है विवाद

प्रशासन ने उन्हें अनुशासनहीनता ही नहीं बल्कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद द्वारा शंकराचार्य की पदवी का इस्तेमाल करने पर भी आपत्ति जताई है. नोटिस में कहा गया है कि खुद को शंकराचार्य बताकर बोर्ड लगाना कोर्ट के नियमों का उल्लंघन है. बता दे कि ज्योतिषपीठ की पदवी को लेकर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और स्वामी वासुदेवानंद के बीच विवाद चल रहा है, जो न्यायालय में सक्रिय है. 

मानहानि का केस करेंगे अविमुक्तेश्वरानंद

प्रशासन द्वारा की गई कार्रवाई पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का रूख भी कड़ा है. उन्होंने भी मंगलवार रात को 8 पन्नों का विस्तृत जवाब भेजते हुए प्रशासन को चेतावनी दी है. उन्होंने कहा है कि यदि प्रशासन ने अपना नोटिस वापस नहीं लिया, तो वे मानहानि का मुकदमा दर्ज करेंगे. 

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