News Nation Logo

मनाली से लेह जाने के लिए अगले महीने खुल जाएगी 8.8 किमी लंबी सुरंग, यहां पढ़ें A to Z डीटेल्स

3200 करोड़ रुपये की लागत से बन रही इस सुरंग में 80 की रफ्तार से वाहन दौड़ सकेंगे. खास बात ये है कि इस सुरंग से सेना को भी काफी लाभ मिलेगा.

News Nation Bureau | Edited By : Sunil Chaurasia | Updated on: 26 Aug 2020, 03:58:35 PM
Rohtang Tunnel

रोहतांग सुरंग (Photo Credit: न्यूज नेशन)

नई दिल्ली:

मनाली से लेह के बीच बन रही 8.8 किलोमीटर लंबी रोहतांग सुरंग इस साल सितंबर के अंत तक खुल जाएगी. सुरंग का काम पूरा हो जाने के बाद मनाली और लेह के बीच की दूरी 474 किलोमीटर से घटकर 428 किलोमीटर रह जाएगी. फिलहाल अभी, मनाली से लेह तक के लिए 474 किलोमीटर का सफर तय करने में 8 घंटे का समय लगता है. सुरंग के जरिए सफर में 46 किलोमीटर कम हो जाएंगे. बता दें कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के निधन के बाद रोहतांग सुरंग को अटल सुरंग का नाम दे दिया गया है.

ये भी पढ़ें- गर्लफ्रेंड ने ऑटो वाले के साथ भागकर की शादी, दिलजले आशिक ने ऐसे लिया बदला और फिर...

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने 3 जून, 2000 को रोहतांग सुरंग परियोजना का ऐलान किया था. बता दें कि ये सुरंग समुद्रतल से 3000 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है. सरकार ने सुरंग बनाने का काम सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) को दिया था. रोहतांग सुरंग परियोजना देश की सबसे चुनौतीपूर्ण परियोजनाओं में से एक है, जिसके लिए काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा. इसके लिए साल 2011 में खुदाई का काम शुरू हुआ था. पहले इसे साल 2015 में ही पूरा होना था लेकिन ताकतवर चट्टानों और पानी की निकासी, खनन पर लगे प्रतिबंध, भूमि आवंटन जैसी समस्याओं की वजह से इसमें काफी देरी हो गई.

ये भी पढ़ें- 3 मासूम बच्चों को लेकर महिला ने नहर में लगाई छलांग, 3 महीने का नवजात बच्चा भी था साथ

जानकारी के मुताबिक सुरंग के निर्माण कार्य के लिए एक शिफ्ट में करीब 700 लेबर काम करती है. कोरोना वायरस महामारी की वजह से भी इसमें देरी हुई. हालांकि, राज्य सरकार और केंद्र सरकार के साथ बातचीत कर सुरक्षा को ध्यान में रखकर इसका काम चलता रहा. देश के रक्षामंत्री राजनाथ सिंह जुलाई में सुरंग का दौरा करने के लिए आने वाले थे. लेकिन भारत-चीन के बीच हुई तनातनी को देखते हुए उन्होंने अपना दौरा रद्द कर दिया था. अब बताया जा रहा है कि रक्षामंत्री अगले कुछ दिनों में यहां आ सकते हैं.

ये भी पढ़ें- कोरोना के तांडव के बावजूद इस राज्य में स्कूल खोलने के निर्देश, 5 सितंबर से शुरू होंगी कक्षाएं

3200 करोड़ रुपये की लागत से बन रही इस सुरंग में 80 की रफ्तार से वाहन दौड़ सकेंगे. खास बात ये है कि इस सुरंग से सेना को भी काफी लाभ मिलेगा. देश की सीमा तक पहुंचने के लिए सेना का न सिर्फ समय बचेगा बल्कि यात्रा में भी सहुलियत मिलेगी. बर्फबारी के समय में लाहौल और स्पीति घाटी तक पहुंचना आसान हो जाएगा. यह सुरंग किसी भी मौसम में हर दिन 3000 वाहनों का लोड झेलने में पूरी तरह से सक्षम है. बता दें कि साल 2010 में इसकी लागत 1700 करोड़ थी, जो 10 साल बाद सीधे दोगुनी होकर 3200 करोड़ रुपये हो गई.

LIVE TV NN

NS

NS

First Published : 26 Aug 2020, 03:31:59 PM

For all the Latest Offbeat News, Download News Nation Android and iOS Mobile Apps.