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epilepsy superstition Photograph: (SORA)
World Epilepsy Day 2026: मिर्गी की पहचान कई बार इसलिए देर से हो जाती है क्योंकि इसके सभी दौरे झटकों के रूप में नहीं आते हैं. जी हां, आज वर्ल्ड एपिलेप्सी डे हैं. हर साल यह दिन फरवरी को मनाया जाता है ताकि लोगों के बीच जागरुकता फैलाई जा सकें. हेल्थ एक्सपर्ट्स कहते हैं कि कुछ मामलों में मिर्गी के दौरे सिर्फ खालीपन, भ्रम या अचानक ध्यान भटकने जैसे लक्षण दिखाई देते हैं, जिससे मरीज इसे सामान्य समस्या समझकर नजरअंदाज कर देते हैं. वहीं, मिर्गी को लेकर आज भी लोगों में काफी हद तक गलतफहमियां भरी हुई हैं, जो इस बीमारी का इलाज करने में देरी करती है. इस रिपोर्ट में विस्तार से जानते हैं मिर्गी के बारे में.
क्या है मिर्गी?
मिर्गी एक गंभीर लेकिन इलाज योग्य दिमागी बीमारी है, जिसमें व्यक्ति को बार-बार दौरे पड़ते हैं. अनुमान के मुताबिक, भारत में करीब 1.5 करोड़ से अधिक लोग मिर्गी से पीड़ित हैं. इसके बावजूद बड़ी संख्या में मरीज समय पर डॉक्टर तक नहीं पहुंच पाते, जिससे माना जा रहा है कि मरीजों की गिनती अधिक हो सकती है. छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में डर, सामाजिक कलंक और गलत धारणाएं आज भी मिर्गी के इलाज में सबसे बड़ी रुकावट बनी हुई हैं.
मिर्गी का इलाज संभव है
जी हां, डॉक्टरों का कहना है कि मिर्गी को भी डायबिटीज या हाई ब्लड प्रेशर जैसी एक लंबी बीमारी की तरह देखना चाहिए. इसका सही समय पर इलाज और नियमित दवाओं से करीब 70% मरीज अपने दौरों को नियंत्रित कर सकते हैं. वहीं, जिन मरीजों पर दवाएं असर नहीं करतीं है उनके लिए अब भारत में एडवांस इलाज और सर्जरी जैसे विकल्प भी उपलब्ध हैं.
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क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
आकाश हेल्थकेयर के डायरेक्टर और न्यूरोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. मधुकर भारद्वाज बताते हैं कि मिर्गी का दौरा तब पड़ता है, जब दिमाग के इलेक्ट्रिकल सिग्नल कुछ समय के लिए सामान्य रूप से काम करना बंद कर देते हैं. उन्होंने बताया कि इस दौरान व्यक्ति को झटके आ सकते हैं, वह गिर सकता है या बेहोश हो सकता है. कई बार दौरे बहुत हल्के होते हैं और कुछ सेकंड में खत्म हो जाते हैं, जबकि कुछ गंभीर भी हो सकते हैं.
लोगों में फैली भूत-प्रेत जैसी भ्रांतियां
डॉ. मधुकर के मुताबिक, समाज में फैली गलत मान्यताएं मरीजों के लिए सबसे बड़ा खतरा हैं. उन्होंने कहा आज भी कई लोग मिर्गी को भूत-प्रेत या काले जादू से जोड़ते हैं. कुछ मानते हैं कि यह छूने से फैलती है या मिर्गी से पीड़ित व्यक्ति पढ़ाई, नौकरी या शादी नहीं कर सकता है. दौरे के समय मुंह में कुछ डालने जैसी धारणा बेहद खतरनाक है, जो मरीज की जान भी ले सकती है. ये सभी बातें पूरी तरह गलत हैं और मरीजों को नुकसान पहुंचाती हैं.
क्या है मिर्गी के कारण?
मिर्गी के कारण हर व्यक्ति में अलग-अलग हो सकते हैं. उन्होंने कहा, कई मामलों में इसका सटीक कारण पता नहीं चल पाता, लेकिन पारिवारिक इतिहास, सड़क दुर्घटनाओं में सिर पर चोट लगना, मेनिनजाइटिस जैसे दिमागी संक्रमण, स्ट्रोक या ब्रेन इंजरी मिर्गी का कारण बन सकते हैं.
वहीं, बच्चों में मिर्गी जन्म के समय ऑक्सीजन की कमी या गर्भावस्था के दौरान दिमाग के सही विकास न होने की वजह से भी हो सकती है. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि तनाव, नींद की कमी और शराब दौरे को ट्रिगर कर सकते हैं, लेकिन ये मिर्गी के सीधे कारण नहीं होते हैं.
मिर्गी का इलाज क्या है?
अगर सही समय पर इलाज शुरू हो जाए तो ज्यादातर मरीज पूरी तरह सामान्य जीवन जी सकते हैं. मारेंगो एशिया इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरो एंड स्पाइन के चेयरमैन डॉ. प्रवीण गुप्ता ने बताया है कि भारत में मिर्गी की सर्जरी अब सफलतापूर्वक हो रही है. सर्जन दिमाग के उस हिस्से की पहचान करते हैं, जहां से दौरे शुरू होते हैं. सही मरीजों में सर्जरी से दौरे काफी हद तक कम हो जाते हैं या पूरी तरह खत्म भी हो सकते हैं.
डॉ. प्रवीण बताते हैं कि जब दवाओं से फायदा नहीं होता है, जिसे ड्रग-रेजिस्टेंट एपिलेप्सी कहा जाता है, तब सर्जरी और आधुनिक न्यूरो-रोबोटिक तकनीकें मरीजों के लिए जरूरी हो जाती है.
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