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nordic diet Photograph: (SORA)
Nordic Diet: हाल ही में हुई एक रिसर्च में सामने आया है कि फल, हरी सब्जियां, मछली और साबुत अनाज से भरपूर नॉर्डिक डाइट अपनाने से समय से पहले मौत होने का खतरा करीब 23% तक कम हो सकता है. शोधकर्ताओं के मुताबिक यह 'प्लैनेट-फ्रेंडली' डाइट न सिर्फ दिल की बीमारियों और डायबिटीज जैसी गंभीर समस्याओं के जोखिम को घटाती है, बल्कि लंबी और स्वस्थ जिंदगी जीने में भी मददगार साबित हो सकती है. आइए जानते हैं इस बारे में.
नॉर्डिक डाइट क्या है?
नॉर्डिक डाइट उत्तरी यूरोप (जैसे स्वीडन, डेनमार्क, नॉर्वे) में वहां के प्रचलित खान-पान पर आधारित डाइट होती है. इस प्रकार की डाइट के सेवन से सिर्फ इंसानों की सेहत नहीं बल्कि पर्यावरण को भी सुरक्षा मिलती है. यहां के लोगों को साल 2023 में जारी नए दिशानिर्देशों में लोगों को सलाह दी गई है कि वे:
- लाल मांस और चीनी कम खाएं.
- साबुत अनाज (जैसे जई, राई), दालें और फल-सब्जियां ज्यादा खाएं.
- मछली का सेवन बढ़ाएं.
- कम वसा वाले डेयरी उत्पाद चुनें.
क्या आपको पता है इन सिफारिशों का मकसद सिर्फ लोगों को स्वस्थ बनाना नहीं है बल्कि वहां के पर्यावरण को भी सुरक्षित रखना है. क्योंकि मांस उत्पादन से ग्रीनहाउस गैसें ज्यादा निकलती हैं, जो जलवायु परिवर्तन को बढ़ाती हैं.
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रिसर्च में क्या मिला?
इस अध्ययन में पाया गया है कि 76,000 से अधिक स्वीडिश पुरुषों और महिलाओं का विश्लेषण किया गया है. शोधकर्ताओं ने पाया कि जो लोग नॉर्डिक आहार दिशानिर्देशों का सख्ती से पालन करते थे, उनमें मृत्यु का खतरा 23% तक कम था. वहीं, जो लोग इन नियमों का पालन नहीं करते थे, उन्हें जल्दी मृत्यु का सामना करना पड़ता था.
कैंसर और दिल की बीमारियों का इलाज
इतना ही नहीं, दिशानिर्देशों का पालन करने वालों में कैंसर और हृदय रोग से होने वाली मौतों का खतरा भी कम पाया गया. खास बात यह है कि इस शोध में शिक्षा, आय और शारीरिक गतिविधि जैसे अन्य कारकों को भी विशेष रूप से ध्यान दिया गया है.
सेहत और जलवायु दोनों के लिए फायदेमंद
खाद्य उत्पादन और उपभोग से दुनिया में होने वाले कुल ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन का लगभग 30% हिस्सा जुड़ा है. इसलिए, ऐसा आहार जो पर्यावरण पर कम असर डालता है, वह जलवायु परिवर्तन को भी कम करने में मदद कर सकता है. नॉर्डिक डाइट इसी सोच के साथ बनाई गई थी यानी ऐसा खाना जो शरीर के लिए भी अच्छा हो और पृथ्वी के लिए भी.
और अध्ययन की जरूरत
हालांकि, यह अध्ययन समय से पहले मृत्यु के जोखिम पर ज्यादा केंद्रित था, लेकिन शोधकर्ताओं का मानना है कि इसमें आगे और अध्ययन की जरूरत है ताकि यह समझा जा सके कि यह आहार मोटापा, टाइप-2 डायबिटीज, हृदय रोगों और कैंसर जैसी बीमारियों को कम कर सकती है या नहीं.
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