Gen-Z का दिमाग निकला कमजोर! पुरानी जनरेशन से कम आईक्यू वाले हैं आज के युवा, रिसर्च में चौंकाने वाला खुलासा

अमेरिकी न्यूरोसाइंटिस्ट ने चौंकाने वाला खुलासा किया है. डॉ. जारेड कूनी हॉर्वाथ ने बताया है कि जेन-Z पहली ऐसी पीढ़ी बन गई है, जो अपने माता-पिता की तुलना में कम IQ रखती है. इनका दिमाग कमजोर हो गया है जिसकी वजह तकनीक है. आइए जानते हैं इस बारे में.

अमेरिकी न्यूरोसाइंटिस्ट ने चौंकाने वाला खुलासा किया है. डॉ. जारेड कूनी हॉर्वाथ ने बताया है कि जेन-Z पहली ऐसी पीढ़ी बन गई है, जो अपने माता-पिता की तुलना में कम IQ रखती है. इनका दिमाग कमजोर हो गया है जिसकी वजह तकनीक है. आइए जानते हैं इस बारे में.

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Namrata Mohanty
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gen z iq levels

gen z iq levels Photograph: (SORA)

Gen-Z इस शब्द को आपने सुना ही होगा. सोशल मीडिया में हर जगह यह शब्द खूब वायरल हो रहा है. हाल ही में नेपाल का जेन-जी प्रोटेस्ट इसका जीता जागता सबूत है. हां, निश्चित ही जेन-जी बच्चे स्मार्ट और एक्टिव हैं, मगर क्या आपको पता है यह इतिहास की इकलौती या यूं कहें पहली ऐसी जेनरेशन बन गई है, जिसका दिमाग उनके माता-पिता से कमजोर है? यह बिल्कुल सच है. इस बारे में पूर्व शिक्षक रहे न्यूरोसाइंटिस्ट डॉ. जारेड कूनी हॉर्वाथ ने एक स्टडी की है. उन्होंने स्टडी की रिपोर्ट में जो खुलासे किए हैं, वह हैरान करने वाले हैं. आइए जानते हैं.

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क्या मिला रिसर्च में?

डॉ. जारेड कूनी हॉर्वाथ ने US सीनेट कमेटी के सामने एक रिपोर्ट पेश की है, जिसमें कहा गया है कि जेन-जी, जिनका जन्म 1997-2010 के बीच हुआ है, उनका IQ लेवल उनके माता-पिता की तुलना में काफी कम है. ये एक ऐतिहासिक रिकॉर्ड है क्योंकि सन 1800 के बाद ऐसा कभी नहीं हुआ है. Gen-Z का IQ, फोकस, मेमोरी, पढ़ाई, मैथ्स, प्रॉब्लम-सॉल्विंग स्किल्स पिछली जेनरेशन से काफी कम हैं. 

न्यूरोसाइंटिस्ट ने बताया कि रिपोर्ट के अनुसार, ये Flynn Effect यानी उल्टा होना है. इसमें IQ लेवल बढ़ने की जगह घट जाता है.

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क्या है इसका कारण?

न्यूरोसाइंटिस्ट ने बच्चों के कमजोर दिमाग के पीछे का कारण बढ़ती हुई तकनीक और उसके इस्तेमाल को बताया है. उन्होंने कहा कि अब बच्चे, जितने घंटे किताबों में बिताया करते थे, उससे कहीं अधिक समय वे लोग फोन स्क्रीन पर बिता रहे हैं. कंप्यूटर पर स्क्रोल करते हुए सिर्फ बुलेट पॉइंट्स को पढ़ना सही शिक्षा प्रणाली नहीं है. उन्होंने कहा कि तकनीक का इस्तेमाल सिर्फ हमारी मदद के लिए है. इंसान का दिमाग उससे तेज और ज्यादा समझ के लिए बना है. ऐसे में अगर हम अपने दिमाग में किताबों के विचारों की जगह छोटी वीडियो क्लिप के घुसाएंगे, तो IQ डाउन होगा. इससे विकास नहीं हो सकेगा. 

स्कूलों में भी अपनाई गई गलत शिक्षा प्रणाली!

एक्सपर्ट कहते हैं कि अब स्कूलों में भी पढ़ाई करने के लिए वीडियोज और स्क्रीन का प्रयोग होने लगा है. पहले स्कूल शिक्षक और छात्र आमने-सामने बैठकर बात करते थे, विचार करते थे और अपनी समस्याओं का हल निकालते थे. मगर अब स्क्रीन पर ये सब काम हो रहे हैं. वे कहते हैं कि स्क्रीन हमारे दिमाग की जैविक प्रक्रियाओं को बाधित कर रही है, जिससे समझ, याददाश्त और एकाग्रता कम हो रही है. Apps का प्रयोग उन्हें जानकारी दे रहा है लेकिन उनके दिमाग का विकास नहीं करता है.

कैसे दूर होगी ये परेशानियां?

न्यूरोसाइंटिस्ट ने बताया कि अब ये समस्या सिर्फ अमेरिका की नहीं रह गई है. दुनिया के करीब 80 देशों के बच्चे इस परेशानी से जूझ रहे हैं. बहुत ज्यादा डिजिटल प्रयोग से बच्चों में कॉग्निटिव प्रॉबल्मस बढ़ गई है. इसलिए, स्कूलों में इसके इस्तेमाल को सीमित करना होगा. छात्रों का कम से कम डिवाइस का इस्तेमाल भी मदद करेगा. पुरानी शिक्षा प्रणालियों को वापस अपनाने की जरूरत है. बहुत छोटे बच्चों को फोन देने की जल्दी बिल्कुल न करें.

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