Auto Brewery Syndrome: बिना पिए कैसे पेट में पहुंची शराब? नई स्टडी में सामने आई ये बात, जानें क्या है ऑटो-ब्रूअरी सिंड्रोम

Auto Brewery Syndrome: आपने शराब पीने के बाद होने वाले नशे के बारे में सभी ने सुना होगा लेकिन क्या आपको पता है कि हमारा शरीर खुद से भी अल्कोहल बना सकता है? इससे व्यक्ति बिना पिए भी नशे में धुत्त हो जाता है. आइए जानते हैं इस दुर्लभ बीमारी के बारे में

Auto Brewery Syndrome: आपने शराब पीने के बाद होने वाले नशे के बारे में सभी ने सुना होगा लेकिन क्या आपको पता है कि हमारा शरीर खुद से भी अल्कोहल बना सकता है? इससे व्यक्ति बिना पिए भी नशे में धुत्त हो जाता है. आइए जानते हैं इस दुर्लभ बीमारी के बारे में

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Namrata Mohanty
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Auto Brewery Syndrome

Auto Brewery Syndrome Photograph: (Auto Brewery Syndrome (freepik))

Auto Brewery Syndrome: हम सभी जानते हैं कि शराब हमारी सेहत के लिए बिल्कुल सही नहीं होती है. शराब का सेवन करने से लिवर से लेकर कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियां होती हैं. मगर इतना सब कुछ जानने के बाद भी लोग इसे पीने से परहेज नहीं करते हैं. बरहाल, आप ये तो जानते ही होंगे कि शराब पीने के बाद नशा होता है. मगर क्या आपको पता है हमारा शरीर भी खुद से अल्कोहल बनाता है. जी हां, इसमें इंसान की आंतों में कुछ शराब जैसे तत्व रिलीज होते हैं. इससे इंसान को बिना पिए नशा हो जाता है.  

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इतना ही नहीं, इस नशे से अल्कोहल टेस्ट भी पॉजिटिव आ जाता है. आपको बता दें कि यह एक दुर्लभ बीमारी है जिसका नाम ऑटो-ब्रूअरी सिंड्रोम है. हाल ही में इस बीमारी पर शोधकर्ताओं ने रिसर्च की है. चलिए जानते हैं इस बारे में विस्तार से.

क्या कहती है स्टडी?

मास जनरल ब्रिघम द्वारा एक स्टडी की गई है. इसमें उन्होंने पेट की आंतों में मौजूद बैक्टीरिया की टेस्टिंग की. इसमें पाया गया कि ये बैक्टीरिया भोजन से अल्कोहल बना सकते हैं. इस टेस्टिंग में पता चला है कि रोगियों के पेट के सैंपल में स्वस्थ लोगों की तुलना में कहीं अधिक अल्कोहल था. 

क्या है ऑटो-ब्रूअरी सिंड्रोम?

यह एक बीमारी है, जिसे गट फर्मेंटेशन सिंड्रोम भी कहते हैं. इस बीमारी में शरीर खुद ही अल्कोहल बनाने लगता है. इस बीमारी में जठराग्नियों में एक प्रकार की फंगी होती है. ये सूक्ष्मजीव आंतों में इथेनॉल को प्रड्यूस करते हैं. यही हमारे शरीर में शराब बनाने का काम करते हैं.

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ऑटो-ब्रूअरी सिंड्रोम के लक्षण

  • ब्रेन-फॉग
  • मूड स्विंग्स
  • कंफ्यूजन होना
  • हमेशा चक्कर और थकान रहना.
  • पेट में सूजन, दस्त और पेट फूलने की समस्या
  • मतली और उल्टी
  • याददाश्त में कमी
  • डिहाइड्रेशन

क्या है इस बीमारी का इलाज?

ऑटो-ब्रूअरी सिंड्रोम से पीड़ित मरीजों को अपनी डाइट में कार्बोहाइड्रेट कम करना चाहिए. इन्हें डॉक्टर से तुरंत मिलना चाहिए. वे इन्हें प्रोबायोटिक्स और एंटीफंगल दवाएं दे सकते हैं. इसके अलावा, स्ट्रेस कम करने और एक्सरसाइज करने से भी बीमारी की रोकथाम हो सकती है. इस बीमारी के रोगियों को शराब का सेवन संभलकर करना चाहिए. ऐसा करने से इनके पेट में फंगस का बैलेंस गड़बड़ा सकता है और बीमारी बढ़ सकती है.

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