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Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को पांच जनहित याचिकाओं को फालतू और बेबुनियाद बताकर खारिज कर दीं. खास बात है कि पांचों पीआईएल सुप्रीम कोर्ट में एक वकील ने दायर की थी. इनमें से एक पीआईएल में कहा गया था कि प्याज और लहसुन में तामसिक और नेगेटिव एनर्जी होती है या फिर नहीं, इसकी रिसर्च की मांग की गई थी.
सोमवार को मामले की चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत ने सुनवाई की. सुनवाई के दौरान उन्होंने एडवोकेट सचिन गुप्ता को फटकार लगाई. सीजेआई ने नाराजगी जताते हुए उनसे सवाल किया कि आधी रात को ये सारी पिटीशन्स ड्राफ्ट करते हो क्या.
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मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, सीजेआई और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने वकील की पांचों जनहित याचिकाओं को फालतू, बेबुनियाद और अस्पष्ट बताकर खारिज कर दीं. इस पर याचिकाकर्ता ने कहा कि ये आम मुद्दा है. उन्होंने दावा किया कि गुजरात में खाने में प्याज के इस्तेमाल को लेकर कथित रूप से एक तालाक हुआ था.
आप जैन समुदाय की भावना को ठेस पहुंचाना चाहते हैं?- CJI
याचिका में प्याज और लहसुन से संबंधित जैन समुदाय के खाने-पीने के तरीकों का जिक्र किया गया था, जो पारंपरिक रूप से लहसुन, प्याज और जड़ वाली सब्जियों को तामसिक खाना मानते हुए उससे परहेत करते हैं. इस पर सीजेआई सूर्यकांत ने याचिकाकर्ता से सवाल किया कि क्या आप जैन समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाना चाहते हैं.
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आप वकील नहीं होते फाइन लगाते- बेंच ने कहा
बेंच ने इन याचिकाओं को खारिज करते हुए कहा कि अगर पिटीशनर वकील नहीं होता तो हम बहुत ज्यादा फाइन लगाकर इसे खारिज करते. बेंच ने कहा कि याचिका कैजुअल ड्राफ्टिंग और सुप्रीम कोर्ट पर बोझ डालने का एक उदाहरण है. गुप्ता ने चेतावनी दी कि अगली बार अगर आप ऐसी पिटीशन फाइल करेंगे तो आप पर बहुत ज्यादा फाइन लगाएंगे.
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एडवोकेट सचिन गुप्ता की ये याचिकाएं भी खारिज
- शराब और तंबाकू प्रोडक्ट्स में नुकसानदायक कंटेंट को रेगुलेट करने के लिए निर्देश देने की मांग.
- क्लासिकल भाषाओं की घोषणा पर गाइडलाइंस की मांग.
- प्रॉपर्टी का जरूरी रजिस्ट्रेशन पक्का करने के लिए निर्देश देने की मांग.
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