वंदे मातरम् के वे 4 छंद जो 89 साल बाद एक बार फिर चर्चा में, 1937 में कांग्रेस ने क्यों किया था ऐसा फैसला?

आज वंदे मातरम् राष्ट्रगीत के विस्तार के लिए नई एडवाइजरी जारी की गई है. इस गाने और बजाने के लिए नए नियम बने हैं. क्यों कांग्रेस ने 89 साल पहले इस गाने में की थी कांटा-छांटी? जानिए.

आज वंदे मातरम् राष्ट्रगीत के विस्तार के लिए नई एडवाइजरी जारी की गई है. इस गाने और बजाने के लिए नए नियम बने हैं. क्यों कांग्रेस ने 89 साल पहले इस गाने में की थी कांटा-छांटी? जानिए.

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Namrata Mohanty
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vande matram Photograph: (SORA)

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राष्ट्रीय संगीत वंदे मातरम् के लिए नई एडवाइजरी जारी कर दी है. अब से यह गाना राष्ट्रगान से पहले बजाया जाएगा. गाने को छह छंदों वाला होना अनिवार्य कर दिया गया है. इसके लिए मंत्रालय ने चार पन्नों वाला नया आदेश पारित किया है. साल 1937 में कांग्रेस ने वंदे मातरम् गाने के मूल स्वरूप में से कुछ पंक्तियों को हटा दिए थे. बता दें कि उस वक्त यह फैसला सांप्रदायिक हित के लिए लिया गया था. इसके प्रमुख अंशों को काट दिया गया था. आइए जानते हैं इस बारे में सब कुछ. 

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क्या हुआ था साल 1937 में?

साल 1937 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की कार्यसमिति ने एक समिति गठित की थी, जिसमें जवाहरलाल नेहरू, मौलाना आजाद और सुभाषचंद्र बोस जैसे नेता शामिल थे. इस समिति का उद्देश्य था-'वंदे मातरम्' को लेकर उठ रहे धार्मिक विवादों का समाधान निकालना.

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विवाद की वजह क्या थी?

इस गीत के तीसरे से छठे छंद में भारत माता को दुर्गा, लक्ष्मी, सरस्वती जैसे देवी स्वरूप में प्रस्तुत किया गया है. जैसे-
'त्वं हि दुर्गा दशप्रहरणधारिणी…'
'कमला कमलदल विहारिणी…'

दरअसल, कुछ मुस्लिम संगठनों और नेताओं ने इन छंदों पर आपत्ति जताई थी. उनका कहना था कि वे मूर्ति पूजा या देवी-उपासना का समर्थन नहीं करते हैं. इसलिए, पूरे गीत को गाना उनके लिए धार्मिक रूप से उचित नहीं होगा. मगर कुछ लोगों का मानना था कि जवाहर लाल नेहरू ने राजनीतिक दबाव के चलते गाने में बदलाव किए थे. 

कांग्रेस का निर्णय क्या था?

वंदे मातरम् को लेकर आ रही आपत्तियों को ध्यान में रखते हुए साल 1937 में कांग्रेस ने निर्णय लिया कि इस गाने के केवल पहले दो छंद ही सार्वजनिक कार्यक्रमों में गाए जाएंगे. बाकी चार छंदों को आधिकारिक आयोजनों से अलग रखा जाएगा. बता दें कि इस गाने के पहले 2 छंदों में सिर्फ मातृभूमि की प्रकृति, सौंदर्य और समृद्धि का वर्णन किया गया है, जिसमें कोई धार्मिक देवी-स्वरूप नहीं है.

वंदे मातरम् के अब तक कौन से छंद गाए जाते हैं?

साल 1950 में 24 जनवरी को संविधान सभा द्वारा फैसला लिया गया कि अब से हर सरकारी और सार्वजनिक सभाओं में 'जन गण मन' को राष्ट्रीय गान का दर्जा दिया जाएगा. वहीं, 'वंदे मातरम्' को राष्ट्रीय गीत का सम्मान दिया जाएगा. उस वक्त जिन छंदों को मान्यता दी गई, वह इस प्रकार है-

वंदे मातरम्।
सुजलां सुफलां मलयजशीतलाम्,
शस्यश्यामलां मातरम्।
वंदे मातरम्॥

शुभ्रज्योत्स्ना पुलकितयामिनीम्,
फुल्लकुसुमित द्रुमदलशोभिनीम्,
सुहासिनीं सुमधुर भाषिणीम्,
सुखदां वरदां मातरम्।
वंदे मातरम्॥

वंदे मातरम् का मूल स्वरूप

वंदे मातरम्।
सुजलां सुफलां मलयजशीतलाम्,
शस्यश्यामलां मातरम्।
वंदे मातरम्॥

शुभ्रज्योत्स्ना पुलकितयामिनीम्,
फुल्लकुसुमित द्रुमदलशोभिनीम्,
सुहासिनीं सुमधुर भाषिणीम्,
सुखदां वरदां मातरम्।
वंदे मातरम्॥

सप्तकोटि कण्ठ कलकल निनाद कराले,
द्विसप्तकोटि भुजैर्धृत खरकरवाले।
के बोले मा तुमि अबले?
बहुबलधारिणीं नमामि तारिणीं,
रिपुदलवारिणीं मातरम्।
वंदे मातरम्॥

तुमि विद्या, तुमि धर्म,
तुमि हृदि, तुमि मर्म,
त्वं हि प्राणाः शरीरे।
बाहुते तुमि मा शक्ति,
हृदये तुमि मा भक्ति,
तोमारई प्रतिमा गढ़ि मन्दिरे-मन्दिरे।
वंदे मातरम्॥

त्वं हि दुर्गा दशप्रहरणधारिणी,
कमला कमलदलविहारिणी,
वाणी विद्यादायिनी नमामि त्वाम्।
नमामि कमलाम्, अमलाम्, अतुलाम्,
सुजलां सुफलां मातरम्।
वंदे मातरम्॥

श्यामलां सरलां सुस्मितां भूषिताम्,
धरणीं भरणीं मातरम्।
वंदे मातरम्॥

वंदे मातरम् गीत के नए प्रोटोकॉल क्या है?

आज जारी हुए नए आदेश में राष्ट्रगीत वंदे मातरम् को सिविल सम्मान समारोह, औपचारिक समारोह और सरकारी आयोजनो में गाया जाएगा. राष्ट्रपति के आने और जाने के बाद वंदे मातरम् गाना अनिवार्य हो गया है. एडवाइजरी में बताया गया है कि परेड, झंड़ा फहराने पर और सभी सार्वजनिक कार्यक्रमों में इसे गाना होगा. स्कूलों में छात्रों द्वारा राष्ट्र गीत को अपने कार्यक्रमों में शामिल करना अनिवार्य हो गया है. 

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Vande Matram
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