सार्वजनिक समारोह में 'जन गण मन' से पहले बजेगा 'वंदे मातरम्', सबका खड़ा होना अनिवार्य; आदेश जारी

Vande Mataram: सार्वजनिक कार्यक्रमों के दौरान अब वंदे मातरम् बजाना अनिवार्य कर दिया गया है. केंद्र ने इसे लेकर आदेश भी जारी कर दिया है. इस दौरान सभी का खड़ा होना अनिवार्य होगा.

Vande Mataram: सार्वजनिक कार्यक्रमों के दौरान अब वंदे मातरम् बजाना अनिवार्य कर दिया गया है. केंद्र ने इसे लेकर आदेश भी जारी कर दिया है. इस दौरान सभी का खड़ा होना अनिवार्य होगा.

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Suhel Khan
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अब सार्वजनिक कार्यक्रम में बजेगा वंदे मातरम् Photograph: (File)

Vande Mataram: अब सार्वजनिक कार्यक्रमों के दौरान जन गण मन से पहले 'वंदे मातरम्' बजाना अनिवार्य होगा. जिसे लेकर केंद्रीय गृह मंत्रालय ने नया प्रोटोकॉल जारी कर दिया है. नए नियमों के तहत सार्वजनिक आयोजनों के दौरान राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम्' के छह छंद यानी अंतरों को (3.10 मिनट)  बजाया या गाया अनिवार्य होगा. इसे लेकर गृह मंत्रालय ने 10 पन्नों का आदेश जारी किया है. जिसे 28 जनवरी को जारी किया गया था. इस आदेश को देश के सभी राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों, मंत्रालयों और संवैधानिक संस्थाओं को भेज दिया गया है.

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कब और कहां बजाया जाएगा वंदे मातरम्?

केंद्र सरकार के आदेश के मुताबिक, नए नियमों के तहत तिरंगा फहराए जाने के वक्त, राष्ट्रपति के किसी कार्यक्रम में आगमन और प्रस्थान के दौरान, राष्ट्र के नाम उनके संबोधन से ठीक पहले और बाद में वंदे मातरम बजाना अनिवार्य होगा. इसके साथ ही राज्यपाल या उपराज्यपाल के आगमन-प्रस्थान और भाषणों से पहले और बाद में भी 'वंदे मातरम्'बजाना या गाना अनिवार्य होगा.

वंदे मातरम् के समय सभी का खड़ा होना अनिवार्य

इसके साथ ही अगर किसी कार्यक्रम के दौरान 'वंदे मातरम्' और राष्ट्रगान 'जन गण मन' दोनों को बजाया जाता है तो पहले 'वंदे मातरम्' को बजाया जाएगा. उसके बाद 'जन गण मन' गाया जाएगा. जब वंदे मातरम बजाया जाएगा उस दौरान वहां उपस्थित लोगों को सावधान की मुद्रा में खड़े होना अनिवार्य होगा. इसके साथ ही मंत्रालय ने साफ किया है कि जब 'वंदे मातरम्' का आधिकारिक संस्करण बजाया या गाया जाए उस दौरान लोगों को सम्मान में खड़ा होना चाहिए.

कब 'वंदे मातरम्' बजने पर खड़ा होना अनिवार्य नहीं 

हालांकि, किसी समाचार फिल्म या डॉक्यूमेंट्री में ये गीत फिल्म का हिस्सा हो, तब दर्शकों का खड़ा होना अनिवार्य नहीं होगा. जिससे कार्यक्रम में अव्यवस्था पैदा ना हो. बता दें कि अब तक 'वंदे मातरम्' को लेकर कोई स्पष्ट आधिकारिक प्रोटोकॉल लागू नहीं था. जबकि राष्ट्रगान 'जन गण मन' के लिए समय, धुन और प्रस्तुति के नियम पहले से ही तय हैं. लेकिन ये पहली बार है जब छह अंतरों वाले वंदे मातरम के विस्तारित संस्करण को आधिकारिक कार्यक्रमों में शामिल करने के निर्देश दिए गए हैं.

तीन श्रेणी में बांटे गए कार्यक्रम

सरकारी आदेश में इन कार्यक्रमों को तीन कैटेगरी में बांटा गया है. पहली श्रेणी के कार्यक्रमों के दौरान राष्ट्रीय गीत केवल बजाया जाएगा. इनमें नागरिक अलंकरण समारोह, राष्ट्रपति का औपचारिक राजकीय समारोहों में आगमन-प्रस्थान, आकाशवाणी और दूरदर्शन पर राष्ट्रपति के राष्ट्र के नाम संबोधन, राज्यपाल या उपराज्यपाल का औपचारिक कार्यक्रमों में आगमन-प्रस्थान, परेड में राष्ट्रीय ध्वज लाए जाने के समय वंदे मातरम बजाना होगा.

वहीं दूसरी श्रेणी में वे कार्यक्रम शामिल हैं, जहां गीत को बजाने के साथ-साथ सामूहिक गायन भी करना होगा. इनमें राष्ट्रीय ध्वज फहराने के दौरान, सांस्कृतिक और औपचारिक समारोह (परेड को छोड़कर), तथा राष्ट्रपति का किसी सरकारी या सार्वजनिक कार्यक्रम में आगमन और प्रस्थान शामिल है. जिसके लिए कोयर, साउंड सिस्टम और जरूरत होने पर गीत के बोल वितरित करने की भी सलाह दी गई है.

जबकि तीसरी श्रेणी में उन अवसर का जिक्र किया गया है जहां 'वंदे मातरम्' गाया जाएगा. इनमें स्कूलों के कार्यक्रम शामिल हैं. आदेश में कहा गया है कि स्कूलों में दिन की शुरुआत सामूहिक रूप से राष्ट्रीय गीत गाकर की जा सकती है. साथ ही छात्रों में राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति सम्मान बढ़ाने की कोशिश की जाए.

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