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Photograph: (BNP Media Cell)
Who is Tariq Rahman:बांग्लादेश में 12 फरवरी को हुए 13वें संसदीय चुनाव में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) को भारी बहुमत मिला है. इसके साथ ही पार्टी के कार्यकारी प्रमुख तारिक रहमान का अगला प्रधानमंत्री बनना लगभग तय माना जा रहा है. उन्होंने सरकार बनाने का दावा भी पेश कर दिया है. यह बांग्लादेश की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत मानी जा रही है. तो आइए जानते हैं तारिक अहमद से जुड़ी सारी अहम बातें.
कौन हैं तारिक रहमान?
तारिक रहमान का जन्म 20 नवंबर 1965 को ढाका में हुआ था. वे पूर्व राष्ट्रपति जियाउर रहमान और तीन बार प्रधानमंत्री रहीं खालिदा जिया के बड़े बेटे हैं. उनका परिवार लंबे समय से बांग्लादेश की राजनीति का केंद्र रहा है. मुक्ति युद्ध के दौरान उनका परिवार भी नजरबंद रहा था.
तारिक की पढ़ाई-लिखाई
तारिक की शुरुआती पढ़ाई ढाका के बीएएफ शाहीन कॉलेज में हुई. इसके बाद उन्होंने ढाका विश्वविद्यालय में अंतरराष्ट्रीय संबंध विषय में दाखिला लिया. हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि उन्होंने वहां से पढ़ाई पूरी की या नहीं. चुनावी हलफनामे में उन्होंने अपनी शैक्षणिक योग्यता उच्च माध्यमिक (12वीं) तक बताई है.
राजनीतिक करियर की शुरुआत
तारिक ने 1988 में औपचारिक रूप से बीएनपी जॉइन की. 1991 के चुनाव में उन्होंने अपनी मां खालिदा जिया के चुनाव अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. 2001 के चुनाव के बाद, जब बीएनपी गठबंधन को दो-तिहाई बहुमत मिला, तब पार्टी में उनकी पकड़ मजबूत हो गई. उन्हें वरिष्ठ संयुक्त महासचिव बनाया गया और वे पार्टी के प्रभावशाली नेता बनकर उभरे.
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— Press Trust of India (@PTI_News) February 13, 2026
(Full video available on PTI Videos - https://t.co/n147TvrpG7) pic.twitter.com/M6RoR3Ws43
इसी दौरान ढाका स्थित ‘हवा भवन’ चर्चा में आया, जिसे तारिक के नेतृत्व से जोड़ा गया. विपक्षी अवामी लीग ने उन पर भ्रष्टाचार और सत्ता के दुरुपयोग के आरोप लगाए. 2004 में शेख हसीना की रैली में हुए ग्रेनेड हमले के मामले में भी उनका नाम सामने आया. बाद में उन्हें इस मामले में सजा सुनाई गई, हालांकि बीएनपी ने इन आरोपों को राजनीतिक साजिश बताया.
निर्वासन और वापसी
2007 में सैन्य समर्थित अंतरिम सरकार ने भ्रष्टाचार विरोधी अभियान चलाया. तारिक को गिरफ्तार किया गया और उनके खिलाफ दर्जनों मुकदमे दर्ज हुए. जेल में रहने के दौरान उन्हें यातनाएं झेलनी पड़ीं और उनकी सेहत भी खराब हुई. 2008 में जमानत मिलने के बाद वे इलाज के लिए लंदन चले गए और करीब 17 साल तक निर्वासन में रहे.
इस दौरान वे लंदन से ही बीएनपी का नेतृत्व करते रहे. अगस्त 2024 में देश में हुए राजनीतिक बदलाव और अंतरिम सरकार बनने के बाद अदालतों ने उनके खिलाफ कई मामलों में राहत दी. दिसंबर 2025 में उन्होंने स्वदेश वापसी की घोषणा की और ढाका लौटे, जहां उनका भव्य स्वागत हुआ.
वापसी के बाद उन्होंने चुनाव लड़ा और दो सीटों से जीत हासिल की. अब वे भ्रष्टाचार पर सख्ती, युवाओं को रोजगार और लोकतंत्र की मजबूती का वादा कर रहे हैं. विवादों और चुनौतियों से भरे लंबे सफर के बाद तारिक रहमान बांग्लादेश की राजनीति के शीर्ष पर पहुंचने जा रहे हैं.
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