News Nation Logo
Breaking
Banner

हिंदूफोबिया और सिख-बौद्धों से हिंसा पर ध्यान दें, UNGC में भारत की दो टूक

धार्मिक आधार पर नफरत और उससे जुड़ी हिंसा में अब हिंदूफोबिया को भी शामिल किया जाए. सिख और बौद्ध धर्म अनुयायियों की ही तर्ज पर हिंदुओं को भी हिंसक धार्मिक भेदभाव का शिकार बनना पड़ रहा है.

News Nation Bureau | Edited By : Nihar Saxena | Updated on: 20 Jan 2022, 01:43:51 PM
UN Indian Envoy TS

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आतंक रोधी नीति को बताया खामियां भरी. (Photo Credit: न्यूज नेशन)

highlights

  • संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की दो टूक
  • हिंदूफोबिया को भी शामिल करें कृत्यों की सूची में
  • हिंसक राष्ट्रवाद-राइट विंग जैसे शब्दों पर जताई आपत्ति

न्यूयॉर्क:  

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की ओर से प्रतिबंधित लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे पाकिस्तानी आतंकवादी संगठनों के साथ अल-कायदा के संपर्क लगातार मजबूत हो रहे हैं. संयुक्त राष्ट्र में भारत के राजदूत ने यह बात कही है. उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि अफगानिस्तान में हाल के घटनाक्रम ने इस आतंकवादी संगठन को ताकतवर होने का मौका ही दिया है. इसके साथ ही उन्होंने दो टूक लहजे में कहा कि धार्मिक आधार पर नफरत और उससे जुड़ी हिंसा में अब हिंदूफोबिया को भी शामिल किया जाए. सिख और बौद्ध धर्म अनुयायियों की ही तर्ज पर हिंदुओं को भी हिंसक धार्मिक भेदभाव का शिकार बनना पड़ रहा है.

हिंसक राष्ट्रवाद पर जताई आपत्ति
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत टी एस तिरुमूर्ति ने ‘ग्लोबल काउंटर-टेररिज्म काउंसिल’ द्वारा आयोजित अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद निरोधक कार्रवाई सम्मेलन 2022 में कहा कि बीते साल वैश्विक आतंकरोधी रणनीति में कई गंभीर खामियां और चूक हैं. इसके साथ ही उन्होंने भारत के ऐतराज को जाहिर करते हुए कहा कि हिंसक राष्ट्रवाद या राइट विंग एक्सट्रीमिज्म जैसे शब्दों को आतंकवाद की बदलती परिभाषा के साथ नहीं जोड़ा जाना चाहिए. सच तो यह है कि ऐसी शब्दावली आतंकवाद की गंभीरता को कमतर करने का काम ही करेगी. 

यह भी पढ़ेंः SC का OBC Reservation पर ऐतिहासिक फैसला, कहा-सामाजिक न्याय के लिए जरूरी

अल-कायदा के संपर्क हो रहे मजबूत
इसके साथ ही उन्होंने कहा कि इस्लामिक स्टेट (आईएस) ने अपने तरीके बदल लिये हैं और उसका मुख्य रूप से ध्यान सीरिया तथा इराक में फिर से जमीन मजबूत करने पर है तथा इसके क्षेत्रीय सहयोगी संगठन विशेष रूप से अफ्रीका और एशिया में अपना विस्तार कर रहे हैं. उन्होंने कहा, ‘इसी तरह, अल-कायदा बड़ा खतरा बना हुआ है तथा अफगानिस्तान के हालिया घटनाक्रम ने उन्हें फिर से मजबूत होने का मौका ही दिया है. लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे सुरक्षा परिषद द्वारा प्रतिबंधित आतंकवादी संगठनों के साथ अल-कायदा के संपर्क लगातार मजबूत हो रहे हैं. अफ्रीका में इसके क्षेत्रीय सहयोगी लगातार विस्तार कर रहे हैं.’

आतंकवाद के सफाये के लिए समन्वित प्रयास जरूरी
तिरूमूर्ति यूएनएससी की आतंकवाद निरोधक कार्रवाई समिति के 2022 के लिए अध्यक्ष भी हैं. उन्होंने कहा कि वैश्विक आतंकवाद निरोधक कार्रवाई के संदर्भ में 2001 के 9/11 के आतंकवादी हमले ‘आतंकवाद को लेकर हमारे प्रयासों की दिशा में निर्णायक मोड़’ साबित हुए थे. उन्होंने कहा कि 11 सितंबर को हुए इन हमलों ने इस बात को रेखांकित किया था कि आतंकवाद का खतरा गंभीर और सार्वभौमिक है तथा संयुक्त राष्ट्र के सभी सदस्य देशों के समन्वित प्रयासों से ही इसे हराया जा सकता है.

यह भी पढ़ेंः IND vs WI : भारत-वेस्‍टइंडीज सीरीज के शेड्यूल में बदलाव, जानिए पूरी डिटेल

आतंकवाद को किसी धर्म से न जोड़ें
तिरुमूर्ति ने कहा, ‘आतंकवादियों को आपके आतंकवादी और मेरे आतंकवादी के रूप में वर्गीकृत करने का समय चला गया है. आतंकवाद के सभी स्वरूपों की निंदा होनी चाहिए और आतंकवाद के किसी भी कृत्य को अपवाद नहीं माना जा सकता या जायज नहीं ठहराया जा सकता, चाहे इस तरह के कृत्यों के पीछे मकसद कुछ भी हो और इन्हें कहीं भी, कभी भी और किसी ने भी अंजाम दिया हो.’ भारतीय राजनयिक ने कहा कि आतंकवाद की समस्या को किसी धर्म, राष्ट्रीयता, सभ्यता या जातीय समूह के साथ नहीं जोड़ा जाना चाहिए.

First Published : 20 Jan 2022, 01:43:51 PM

For all the Latest World News, Download News Nation Android and iOS Mobile Apps.