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पाकिस्तान को तालिबान से रिश्ते पड़ रहे भारी, 31 फीसद कम हुआ FDI

जुलाई में नए वित्तीय वर्ष के पहले महीने में पाकिस्तान (Pakistan) में एफडीआई प्रवाह 8.99 लाख डॉलर रहा, जो 2020 में इसी महीने की तुलना में 31 प्रतिशत कम है.

News Nation Bureau | Edited By : Nihar Saxena | Updated on: 10 Sep 2021, 11:09:30 AM
Imran Khan

एफएटीएफ की ग्रे सूची और तालिबान से रिश्ते पड़ रहे इमरान सरकार को भारी. (Photo Credit: न्यूज नेशन)

highlights

  • पाकिस्तान में एफडीआई प्रवाह 8.99 लाख डॉलर, जो बीते साल से 31 फीसद कम
  • एफडीआई का एक हिस्सा चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) में प्रवाहित
  • 38 अरब डॉलर का वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद के नुकसान की है आशंका

इस्लामाबाद:

अफगानिस्तान (Afghanistan) में जारी राजनीतिक उथल-पुथल के बीच पाकिस्तान में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) धीमा पड़ रहा है. आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार जुलाई में नए वित्तीय वर्ष के पहले महीने में पाकिस्तान (Pakistan) में एफडीआई प्रवाह 8.99 लाख डॉलर रहा, जो 2020 में इसी महीने की तुलना में 31 प्रतिशत कम है. पाकिस्तान स्थित थिंक टैंक तबलाब ने सुझाव दिया कि 2008 से शुरू होकर 2019 तक एफएटीएफ की ग्रे-लिस्टिंग के नतीजतन लगभग 38 अरब डॉलर का वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद का नुकसान हो सकता है. विशेषज्ञों का मानना है कि अफगानिस्तान में अस्थिरता पाकिस्तान की एफडीआई को आकर्षित करने की क्षमता को प्रभावित कर सकती है. खासकर ऐसे समय में जब अर्थव्यवस्था बढ़ते कर्ज के स्तर के साथ नाजुक दौर से गुजर रही है. 

तालिबान से याराना पड़ रहा है महंगा
हालांकि अफगानिस्तान में मौजूदा अंतरिम तालिबान सरकार के पास पाकिस्तान की इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई) की मुहर है. इमरान खान प्रशासन को न केवल संयुक्त राष्ट्र ब्लैकलिस्टेड मुल्ला मोहम्मद हसन अखुंद के खिलाफ, बल्कि इस्लामाबाद के खिलाफ भी व्यापक विरोध के बीच अत्यधिक सावधानी बरतनी होगी. तालिबान ने पेशावर आर्मी पब्लिक स्कूल में हुए भीषण हमले के अलावा 2007 के बाद से नागरिकों और सुरक्षा बलों की कई हत्याओं के लिए जिम्मेदार तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के सभी 4000 लड़ाकों को मुक्त कर दिया है, जिसमें 130 से अधिक स्कूली बच्चों और स्टाफ सदस्यों की मौत हो गई थी. द एक्सप्रेस ट्रिब्यून ने नोट किया कि इतना एफडीआई आकर्षित करना बहुत मुश्किल लगता है और इसलिए पड़ोसी अफगानिस्तान में नवीनतम राजनीतिक विकास के कारण अगस्त के मध्य में तालिबान द्वारा काबुल का अधिग्रहण राजनीतिक स्थिरता के लिए कथित चुनौतियों के कारण संभावित विदेशी निवेशकों को डरा सकता है.

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चीनी निवेश भी हो रहा है कम
सेंटेंडर व्यापार-आर्थिक डेटा और सूचना पोर्टल ने कहा कि आतंकवादी संगठनों के संचालन के कारण महत्वपूर्ण सुरक्षा जोखिम पाकिस्तान से जुड़ा हुआ है. इसके अलावा, भ्रष्टाचार का एक बड़ा जोखिम है. पाकिस्तान ने ओईसीडी भ्रष्टाचार विरोधी सम्मेलन पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं यह भी चिंता का कारण है. पिछले वित्तीय वर्ष जुलाई से जून में कुल एफडीआई प्रवाह 2019-20 के 2.598 अरब डॉलर से 1.87 अरब डॉलर कम होने का अनुमान लगाया गया था, जबकि कोविड-19 महामारी और उसके बाद के विश्वव्यापी प्रतिबंध बहुत आवश्यक एफडीआई प्रवाह में मंदी का कारण बना, वहां कहा जा रहा है कि चीन से निवेश कम हो रहा है.

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एफएटीएफ की ग्रे सूची और बिगाड़ रही खेल
पाकिस्तान के सबसे बड़े निवेशक चीन ने आतंकी हमलों के बाद बिगड़ती सुरक्षा स्थिति पर चिंता व्यक्त की है. एफडीआई का एक हिस्सा चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) में प्रवाहित होता है. एक विश्लेषक ने इंडिया नैरेटिव को बताया, 'सीपीईसी में चीनी निवेश बहुत ही शांत तरीके से कम हो रहा है.' गौर करें तो 20 अगस्त को बलूचिस्तान के ग्वादर इलाके में हुए एक बम विस्फोट में दो पाकिस्तानी बच्चों की मौत हो गई, लेकिन चीनियों को निशाना बनाया गया. जुलाई में दासू जलविद्युत परियोजना के पास एक बस के अंदर हुए बम विस्फोट में नौ चीनी नागरिकों सहित कम से कम 13 लोगों की मौत हो गई थी. इससे पहले क्वेटा के एक अपमार्केट होटल में बम धमाका हुआ था. तथ्य यह है कि पाकिस्तान वित्तीय कार्रवाई कार्य बल (एफएटीएफ) की ग्रे सूची में बना हुआ है.

First Published : 10 Sep 2021, 07:58:02 AM

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