News Nation Logo

ब्रिटिश संसद में कश्मीर पर 'झूठे दावे', भारत ने दिखाया आईना

भारत ने कहा कि यह चर्चा एक तीसरे देश (पाकिस्तान) द्वारा किये गये झूठे दावों और अपुष्ट आरोपों पर आधारित थी.

News Nation Bureau | Edited By : Nihar Saxena | Updated on: 15 Jan 2021, 12:10:45 PM
British Parliament

ब्रिटिश संसद में पाकिस्तान ने फिर फैलाया झूठ कश्मीर पर. (Photo Credit: न्यूज नेशन)

लंदन:

लंदन में संसद भवन परिसर में कश्मीर के मुद्दे पर चर्चा में कुछ सांसदों के भाग लेने पर निराशा प्रकट करते हुए भारत ने कहा कि यह चर्चा एक तीसरे देश (पाकिस्तान) द्वारा किये गये झूठे दावों और अपुष्ट आरोपों पर आधारित थी. हाउस ऑफ कॉमन्स के वेस्टमिंस्टर हॉल में कुछ ब्रिटिश सांसदों द्वारा आयोजित चर्चा का शीर्षक 'कश्मीर में राजनीतिक परिस्थिति' था. लंदन में भारतीय उच्चायोग ने इस तरह के शब्दों के इस्तेमाल पर भी आपत्ति जताते हुए इन्हें अपने आप में समस्या वाला बताया.

उच्चायोग ने एक बयान में कहा, 'शीर्षक में कश्मीर शब्द के इस्तेमाल के संदर्भ में : केंद्रशासित प्रदेश जम्मू कश्मीर, जो भारत का अभिन्न अंग है और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (जब पूर्ववर्ती कश्मीर राज्य को कानूनी तरीके से अक्टूबर 1947 में भारत में शामिल किया गया था, तो इस हिस्से को पाकिस्तान ने जबरन और अवैध तरीके से कब्जा लिया था) के बीच अंतर समझने की जरूरत है.'

यह भी पढ़ेंः LAC पर भारतीय जवानों ने दिया मुंहतोड़ जवाब, आर्मी डे पर नरवणे का संदेश

उसने कहा, 'इस बात पर भी संज्ञान लिया गया कि जमीनी रूप से दिखने वाले तथ्यों और अद्यतन जानकारी के आधार पर सार्वजनिक रूप से उपलब्ध पर्याप्त प्रामाणिक जानकारी होने के बावजूद, भारत के केंद्रशासित प्रदेश जम्मू कश्मीर के संदर्भ में, मौजूदा जमीनी हकीकत की अनदेखी की गयी और एक तीसरे देश द्वारा किये जाने वाले झूठे दावों को प्रदर्शित किया गया जिनमें नरसंहार और हिंसा तथा प्रताड़ना जैसे अपुष्ट आरोप थे.'

ब्रिटेन की सरकार की ओर से चर्चा का जवाब देते हुए विदेश, राष्ट्रमंडल और विकास कार्यालय (एफडीसीओ) के मंत्री निगेल एडम्स ने यह आधिकारिक रुख दोहराया था कि ब्रिटेन को भारत-पाकिस्तान के द्विपक्षीय मामले में कोई मध्यस्थ भूमिका नहीं निभानी. हालांकि उन्होंने कहा कि नियंत्रण रेखा (एलओसी) के दोनों ओर मानवाधिकार संबंधी चिंताएं हैं. एशिया के लिए मंत्री की जिम्मेदारी होने के नाते से एडम्स ने कहा, 'सरकार की (कश्मीर पर) नीति स्थिर है और इसमें कोई बदलाव नहीं है. हम लगातार यह मानते आये हैं कि हालात का दीर्घकालिक राजनीतिक समाधान भारत और पाकिस्तान को तलाशना है जिसमें कश्मीरी जनता की आकांक्षाओं का ध्यान रखा जाए, जैसा कि शिमला समझौते में उल्लेखित है.'

यह भी पढ़ेंः ममता को एक और झटका! बीरभूम सांसद शताब्दी रॉय के तेवर बगावती

लेबर पार्टी की सारा ओवेन द्वारा आयोजित चर्चा में ब्रिटेन के विभिन्न राजनीतिक दलों के सांसदों ने भाग लिया जिनमें से अधिकतर के निर्वाचन क्षेत्रों में कश्मीरी मूल के लोगों की अच्छी आबादी है. उन्होंने कथित मानवाधिकार उल्लंघन पर चिंता जताई और ब्रिटेन की सरकार से क्षेत्र तक सुगम पहुंच के लिए अनुरोध किया ताकि भविष्य में जम्मू कश्मीर और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) से सीधी रिपोर्ट ब्रिटिश संसद में पेश की जा सके.

लंदन में भारतीय उच्चायोग ने इस बात को रेखांकित किया कि पिछले साल से एक स्मार्ट वाई-फाई परियोजना से क्षेत्र में हाईस्पीड इंटरनेट एक्सेस संभव हुआ है और आतंकी हमलों की धमकियों, चुनौतीपूर्ण मौसम संबंधी हालात और कोविड-19 महामारी के बावजूद यहां पिछले महीने डीडीसी के ऐतिहासिक चुनाव संपन्न हुए. भारतीय उच्चायोग ने अपने बयान में कहा, 'जम्मू कश्मीर, अगस्त 2019 में प्रशासनिक पुनर्गठन के बाद से, सुशासन और त्वरित विकास के पथ पर बढ़ रहा है. जम्मू कश्मीर में भारत सरकार द्वारा उठाये गये सभी प्रशासनिक कदम पूरी तरह से भारत का आंतरिक विषय हैं.'

यह भी पढ़ेंः  PAK के होश ठिकाने लगाएगा तेजस! वायुसेना प्रमुख बोले- चीन के जेएफ-17 से भी है बेहतर

बयान में कहा गया कि किसी विदेशी संसद के अंदर हुई आंतरिक चर्चा में अनावश्यक रुचि लेने की भारत की नीति नहीं है, लेकिन भारतीय उच्चायोग भारत के बारे में सभी को प्रामाणिक जानकारी उपलब्ध कराके और गलत धारणाएं तथा गलत सूचनाएं दूर करके सभी संबंधित पक्षों के साथ संवाद रखता है जिनमें ब्रिटेन की सरकार और सांसद शामिल हैं.

First Published : 15 Jan 2021, 12:10:45 PM

For all the Latest World News, Download News Nation Android and iOS Mobile Apps.