Board of Peace: डोनाल्ड ट्रंप के बोर्ड में पीस में शामिल होने के लिए इन आठ मुस्लिम देशों ने जताई सहमति, पीएम मोदी को भी मिला है न्योता

Board of Peace: गाजा शांति के लिए डोनाल्ड ट्रंप द्वार गठित ‘बोर्ड ऑफ़ पीस’ में शामिल होने के लिए आठ मुस्लिम देशों ने सहमति जताई है. जानें सभी आठ मुस्लिम देशों के बारे में...

Board of Peace: गाजा शांति के लिए डोनाल्ड ट्रंप द्वार गठित ‘बोर्ड ऑफ़ पीस’ में शामिल होने के लिए आठ मुस्लिम देशों ने सहमति जताई है. जानें सभी आठ मुस्लिम देशों के बारे में...

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Jalaj Kumar Mishra
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Trump File

Donald Trump (X@RealDonaldTrump)

इस्राइल और हमास के बीच लंबे वक्त तक हुए युद्ध ने गाजा को बर्बाद कर दिया है. गाजा के विकास के लिए अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कमर कस ली है. उन्होंने एक बोर्ड ऑफ पीस का गठन भी किया है, जिसकी कमान खुद ट्रंप ही संभालेंगे. उन्होंने दुनिया भर के देशों को बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने का न्योता दिया है. इस बीच, खबर आई है कि अरब सहित आठ मुस्लिम देशों ने ट्रंप के इस पहल और न्योते का स्वागत किया है. 

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जानें कौन-कौन से आठ देशों ने जताई सहमति

बुधवार को इंडोनेशिया, संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, तुर्की, जॉर्डन, कतर, मिस्र और पाकिस्तान के विदेश मंत्रियों ने एक संयुक्त बयान जारी किया, जिसमें उन्होंने उनके देश के बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने के फैसले की जानकारी दी. संयुक्त बयान के अनुसार, सभी देश अपने-अपने कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के तहत शामिल होने से जुड़े दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करेंगे. बता दें, पाकिस्तान, संयुक्त अरब अमीरात और मिस्र ने पहले ही इस बोर्ड में शामिल होने का ऐलान कर दिया था.   

आठों देशों के विदेश मंत्रियों ने संयुक्त बयान में डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में शांति प्रयासों के लिए अपना समर्थन दिया है. उन्होंने कहा कि बोर्ड ऑफ पीस, गाजा संघर्ष को खत्म करने की व्यापक योजना है, जो गाजा को विकसित करेगा. यह पहल संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2803 के अनुरूप होगी.

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युद्धविराम समझौते का दूसरा चरण है बोर्ड ऑफ पीस

बता दें, इस बोर्ड का उद्देश्य गाजा स्थायी युद्ध विराम को मजबूती देना, री-डेवलपमेंट कामों का समर्थन करना और इंटरनेशनल कानूनों के अनुसार, फलस्तीनी लोगों के निर्णय और राज्य के अधिकार को आगे बढ़ाना है. विदेश मंत्रियों ने अपने संयुक्त बयान में इससे न सिर्फ फलस्तीनी बल्कि पूरे क्षेत्र में स्थिरता, शांति और सुरक्षा का रास्ता तय होगा. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, बोर्ड ऑफ पीस का गठन इस्राइल-हमास युद्धविराम समझौते के दूसरे चरण के रूप में हुआ है.  

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