/newsnation/media/media_files/2026/02/12/trump-netanyahu-meeting-2026-02-12-10-26-04.jpg)
ट्रंप-नेतन्याहू की व्हाइट हाउस में हुई बैठक Photograph: (X@IsraeliPM)
Trump-Netanyahu Meeting: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायल के पीएम बेंजामिन नेतन्याहू के बीच बुधवार को व्हाइट हाउस में बैठक हुई. इस बैठक से पहले माना जा रहा था कि दोनों नेता ईरान को लेकर कोई निर्णायक रणनीति बनाएंगे, लेकिन इस बैठक में ऐसा कोई समझौता नहीं हुआ. करीब दो घंटे तक चली ये बैठक एक बंद कमरे में हुई. बता दें कि अमेरिका की सत्ता में वापसी के बाद ट्रंप की नेतन्याहू के साथ ये सातवीं बैठक थी.
ईरान से बातचीत चलती रहनी चाहिए- ट्रंप
दोनों नेताओं के बीच हुई इस बैठक के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट किया. जिसमें उन्होंने लिखा कि इस मुलाकात में कोई पक्का फैसला नहीं हुआ. ट्रंप ने कहा कि, "इस बैठक में बस इतना तय हुआ है कि मैंने कहा है कि ईरान से बातचीत चलती रहनी चाहिए, जिससे देखा जा सके कि कोई समझौता बन पाता है या नहीं. अगर समझौता हो जाता है तो वही हमारी पहली पसंद होगी. अगर नहीं हुआ, तो फिर आगे क्या करना है, वो बाद में देखा जाएगा."
ट्रंप ने 'मिडनाइट हैमर' का किया जिक्र
हालांकि राष्ट्रपति ट्रंप ने ये साफ नहीं किया कि इस बात को लेकर नेतन्याहू सहमत हुए हैं या नहीं. इसके साथ ही ट्रंप ने ऑपरेशन मिडनाइट हैमर का भी जिक्र किया. इसी ऑपरेशन के तहत अमेरिका ने पिछले साल ईरान की न्यूक्लियर साइट्स पर हमला किया था. ट्रंप ने अपनी पोस्ट में कहा कि, "पिछली बार ईरान ने समझौता न करने का फैसला किया था, और उन्हें 'मिडनाइट हैमर' जैसी कार्रवाई का सामना करना पड़ा - जो उनके लिए कारगर साबित नहीं हुई. उम्मीद है कि इस बार वे अधिक समझदार और जिम्मेदार होंगे. इसके अलावा, हमने गाजा और पूरे क्षेत्र में हो रही जबरदस्त प्रगति पर चर्चा की. मध्य पूर्व में वास्तव में शांति है. इस मामले पर ध्यान देने के लिए धन्यवाद!"
/filters:format(webp)/newsnation/media/media_files/2026/02/12/donald-trum-on-truth-social-2026-02-12-10-53-37.jpg)
ईरान को लेकर नहीं लिया गया कोई बड़ा निर्णय
बैठक से पहले माना जा रहा था कि इजरायली पीएम नेतन्याहू ट्रंप से ईरान के साथ बातचीत को महज परमाणु कार्यक्रम तक ही सीमित नहीं रखेंगे, बल्कि वे बैलिस्टिक मिसाइलों और क्षेत्रीय गतिविधियों तक बढ़ाने का भी ट्रंप से आग्रह करेंगे. हालांकि नेतन्याहू ने इजरायल की सुरक्षा जरूरतों पर जरूर जोर दिया, लेकिन इस बात के संकेत नहीं मिले कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने उनकी बातें मान लीं.
बता दें कि इजरायली अधिकारी पहले ही चेतावनी दे चुके हैं कि सिर्फ परमाणु समझौता ईरान की व्यापक सैन्य शक्ति को नियंत्रित नहीं कर सकेगा. वहीं ट्रंप भी कई बार कह चुके हैं कि अगर कूटनीति से काम नहीं चला तो उनके पास सैन्य विकल्प भी मौजूद है. हालांकि तेहरान ट्रंप और नेतन्याहू के किसी भी हमले का जवाब देने की पहले ही चेतावनी दे चुका है. जो मध्य पूर्व में किसी बड़े संघर्ष की ओर इशारा करता है.
ये भी पढ़ें: ट्रंप ने एक बार फिर किया दावा, भारत और पाकिस्तान समेत कई "परमाणु संघर्ष" को रोका
क्या है इजरायल की चिंता?
दरअसल, इजरायल का मानना है कि अगर अमेरिका सीमित समझौते करता है तो ईरान के हमास और हिजबुल्लाह जैसे समूहों को समर्थन देने से नहीं रोका जा सकेगा. नेतन्याहू के कार्यालय ने एक बयान में कहा कि, "प्रधानमंत्री ने बातचीत के संदर्भ में इजरायल की सुरक्षा जरूरतों पर जोर दिया. दोनों देशों ने निकट समन्वय और संपर्क जारी रखने पर सहमति जताई है." दरअसल, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी भी इस बात के संकेत दिए हैं कि फिलहाल अमेरिका का लक्ष्य ईरान में सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि उसे परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना है. वेंस ने कहा कि अगर कूटनीति काम नहीं करती, तो अन्य विकल्प भी खुले हैं.
ये भी पढ़ें: 'परमाणु युद्ध हो जाता अगर...', ट्रंप ने फिर दोहराया भारत-पाकिस्तान संघर्ष को रोकने का अपना दावा
/newsnation/media/agency_attachments/logo-webp.webp)
Follow Us