बढ़ता स्क्रीन टाइम बन रहा बच्चों की भाषा का दुश्मन! नई रिसर्च में हुआ खुलासा

क्या आपका बच्चा भी बहुत ज्यादा समय मोबाइल और ब्लू स्क्रीन्स पर बिताता है? आज ही इस आदत को बदल दें क्योंकि इससे उसकी भाषा प्रभावित हो रही है. नई रिसर्च में हुआ खुलासा.

क्या आपका बच्चा भी बहुत ज्यादा समय मोबाइल और ब्लू स्क्रीन्स पर बिताता है? आज ही इस आदत को बदल दें क्योंकि इससे उसकी भाषा प्रभावित हो रही है. नई रिसर्च में हुआ खुलासा.

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Namrata Mohanty
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vocabulary Photograph: (SORA)

डिजिटल वर्ल्ड में जहां मोबाइल, टैबलेट और टीवी बच्चों की रोज़मर्रा की जिंदगी का आम हिस्सा बन चुके हैं, वहीं नई रिसर्च ने एक गंभीर चिंता उजागर कर दी है. अध्ययन में पाया गया हैं कि बढ़ता स्क्रीन टाइम बच्चों की शब्दावली यानी Vocabulary और भाषा के विकास पर नकारात्मक असर डाल रहा है. खासकर कम उम्र के बच्चों में यह प्रभाव ज्यादा देखने को मिल रहा है.

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ब्रिटेन की मशहूर Lexicographer ने बताई वजह

ब्रिटेन की प्रसिद्ध लेक्सिकोग्राफर और टीवी शो काउंटडाउन की स्टार सुसी डेंट ने चेतावनी दी है कि बच्चों की शब्दावली लगातार खराब हो रही है. उनका कहना है कि बच्चे पढ़ने और बातचीत की बजाय स्क्रीन पर ज्यादा समय बिता रहे हैं, जिससे उनकी भाषा पर असर पड़ रहा है. डेंट के मुताबिक 'शब्दावली का अंतर बढ़ता जा रहा है और इसका सीधा प्रभाव बच्चों की पढ़ाई और उनकी सीखने की क्षमता पर भी पड़ता दिखाई दे रहा है.

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ऑक्सफर्ड यूनिवर्सिटी की रिपोर्ट में खुलासा

Oxford University Press की 2023 की एक रिपोर्ट में पाया गया है कि हर पांच में से दो छात्र शब्दावली के विकास में पिछड़ रह हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि इसका बड़ा कारण पढ़ने की आदत में गिरावट और डिजिटल कंटेंट पर बढ़ती हुई निर्भरता है. जबसे बच्चे किताबों से दूर हुए हैं, उनका नए शब्दों से परिचय भी कम से कम हो गया है. 

आंकड़ों में क्या मिला?

आंकड़ों के मुताबिक, 2 साल की उम्र तक लगभग 98% बच्चे रोजाना किसी न किसी स्क्रीन के संपर्क में आ जाते हैं. जिन बच्चों का स्क्रीन टाइम सबसे ज्यादा यानी करीब पांच घंटे प्रतिदिन था, वे उन बच्चों की तुलना में काफी कम शब्द बोल पाते है, जो औसतन 44 मिनट तक ही स्क्रीन प्रतिदिन देखते है. यह अंतर भाषा विकास के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण बताया जा रहा है.

बच्चों की शिक्षा के साथ उनकी आदतों पर ध्यान देना जरूरी

ब्रिजेट फिलिप्सन, जो ब्रिटेन में शिक्षा मंत्रालय की सचिव रह चुकी है. उन्होंने भी माना है कि माता-पिता, शिक्षक और नर्सरी कर्मचारी ऐसे बच्चों की संख्या बढ़ती देख रहे हैं जिन्हें बातचीत करने, ध्यान केंद्रित करने और सीखने में कठिनाई हो रही है. सरकार जल्द ही पांच साल से कम उम्र के बच्चों के लिए स्क्रीन उपयोग को लेकर दिशानिर्देश जारी करने वाली है.

क्या स्क्रीन को पूरी तरह बैन करना सही होगा?

हालांकि, विशेषज्ञ स्क्रीन को पूरी तरह खारिज नहीं करते है. उनका मानना है कि यदि तकनीक का इस्तेमाल सही तरीके से किया जाए, जैसे ई-बुक्स पढ़ना, शैक्षिक खेल खेलना या माता-पिता के साथ इंटरैक्टिव कंटेंट देखना, तो यह बच्चों की शब्दावली को बढ़ाने में सहायक भी हो सकता है.

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