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blood rain Photograph: (SORA)
Blood Rain in Britain: ब्लड रेन जिसे खूनी बारिश कहा जाता है. ये शब्द आपको सुनने में खतरनाक लग रहा होगा लेकिन ऐसा होने वाला है. हाल ही में ब्रिटेन के लिए मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि यहां के लोग खूनी बारिश का सामना कर सकते हैं. बता दें कि बीते साल से ब्रिटेन बरसात की मार झेल रहा है. यहां कुछ इलाकों में हर दूसरे दिन बरसात हो रही है, जिसके बाद अब नई चेतावनी जारी की गई है.
वैज्ञानिकों ने दी चेतावनी
बारिश के प्रकोप को देखते हुए अब वैज्ञानिकों ने अलर्ट जारी किया है कि आने वाले दिनों में यहां खून की बारिश यानी लाल रंग की बारिश हो सकती है. हालांकि, नाम सुनकर यह डरावना लग सकता है, लेकिन असल में यह कोई खतरनाक घटना नहीं है. इसे ब्लड रेन भी कहते हैं.
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किसने जारी किया अलर्ट?
ब्रिटेन के लिए यह जानकारी Copernicus Atmosphere Monitoring Service (CAMS) ने दी है. यह यूरोप की एक वैज्ञानिक संस्था है, जो दुनिया भर में हवा की गुणवत्ता और वातावरण में मौजूद धूल-धुएं पर नजर रखती है. बताया जा रहा है कि ब्लड रेन का मतलब धूल से ही है.
क्या है खून की बारिश?
'खून की बारिश' दरअसल लाल रंग की बारिश को कहते हैं. जब सहारा रेगिस्तान की लाल-भूरी धूल तेज हवाओं के कारण आसमान में बहुत ऊंचाई तक उड़ जाती है, तो यह हजारों किलोमीटर दूर तक पहुंच सकती है. इस बार यह धूल उत्तरी अटलांटिक महासागर पार करते हुए ब्रिटेन की ओर बढ़ रही है. यह धूल मुख्य रूप से सहारा रेगिस्तान से आती है. इसके साथ भूमध्यरेखीय अफ्रीका में मौसमी बायोमास जलाने से उठने वाला धुआं भी इसमें मिल जाता है. जब यह धूल और धुआं बारिश के बादलों के साथ मिलता है, तो बारिश की बूंदे लाल रंग की आती है. इसलिए, इसे ब्लड रेन या खूनी बारिश कहा जाता है.
कब और कहां दिखेगा असर?
डेली मेल की रिपोर्ट के मुताबिक, CAMS के अनुसार, यह धूल 24-25 फरवरी को ब्रिटेन पहुंच सकती है और बारिश के साथ मिलकर यहां कुछ घंटों के लिए लाल बारिश होने का कारण बन सकती है. वहीं, दक्षिणी इंग्लैंड में बुधवार तक इसका असर रह सकता है.
आसमान भी होगा लाल
वैज्ञानिकों के अनुसार, लाल बारिश के दौरान आसमान भी लाल या नारंगी रंग का दिखाई दे सकता है. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि हवा में धूल की मात्रा बढ़ने से सूरज की रोशनी अलग तरह से बिखरती है, जिससे आसमान का रंग भी बदल जाता है.
क्या यह खतरनाक है?
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, यह घटना असामान्य है लेकिन खतरनाक नहीं है. साल के इस समय उत्तरी अटलांटिक क्षेत्र में अफ्रीकी धूल का पहुंचना कोई नई बात नहीं है. फर्क सिर्फ इतना है कि इस बार धूल ज्यादा है.
कुछ परेशानियां हो सकती हैं
इस बारिश का सबसे ज्यादा असर कारों, खिड़कियों और खुली सतहों पर पड़ने वाला है. बारिश के बाद इन पर लाल या भूरे रंग की धूल की परत जम सकती है, जिसे साफ करना पड़ेगा. सेहत पर आमतौर पर इसका गंभीर असर नहीं पड़ेगा लेकिन जिन लोगों को सांस से जुड़ी समस्या है, उन्हें थोड़ी सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है.
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