क्या 38 हजार साल पहले भी एडवांस्ड तकनीकों का होता था इस्तेमाल? रिसर्चर का चौंकाने वाला दावा

Advanced Global Civilization: एक स्वतंत्र रिसर्चर ने हाल ही में ऐसा खुलासा किया है जिससे सुन आपको भी थोड़ी हैरानी होगी. उनका मानना है कि सालों पहले भी दुनिया में एडवांस तकनीकों का इस्तेमाल होता रहा है.

Advanced Global Civilization: एक स्वतंत्र रिसर्चर ने हाल ही में ऐसा खुलासा किया है जिससे सुन आपको भी थोड़ी हैरानी होगी. उनका मानना है कि सालों पहले भी दुनिया में एडवांस तकनीकों का इस्तेमाल होता रहा है.

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Namrata Mohanty
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Photograph: (SORA)

Advanced Global Civilization: आर्कियोलॉजिस्टों की दुनिया में एक बार फिर से नया विवाद खड़ा हो गया है. हाल ही में एक इंडिपेंडैंट रिसर्चर मैथ्यू लाक्रॉइक्स ने दावा किया है कि आज की आधुनिक सभ्यताओं से हजारों साल पहले यानी करीब 38,000 से 40,000 वर्ष पूर्व, पृथ्वी पर एक अत्यंत उन्नत वैश्विक सभ्यता मौजूद थी. उनका कहना है कि इस प्राचीन सभ्यता ने अपने ज्ञान और चेतावनियों को ज्यामिति, प्रतीकों और स्मारक संरचनाओं के जरिए दुनिया से छिपाकर रखा, जिसे आज तक सही तरीके से कोई समझ नहीं पाया है.

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रिसर्चर ने क्या कहा?

मैथ्यू लाक्रॉइक्स के अनुसार, यह सभ्यता कॉस्मिक साइकल्स, पृथ्वी पर आने वाली विनाशकारी आपदाओं और मानवीय अस्तित्व के गहरे रहस्यों को समझती थी. जब उन्हें भविष्य में होने वाले बड़े विनाश का आभास हुआ तो उन्होंने अपना ज्ञान नष्ट होने से बचाने के लिए उसे पत्थरों, मंदिरों और पवित्र स्थलों में एक कोड के रूप में सुरक्षित तरीके से रख दिया.

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दुनिया भर में एक जैसे प्रतीक मिले

अपनी रिसर्च में लाक्रॉइक्स ने दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में पाए जाने वाले कुछ समान प्रतीकों की पहचान की है. इनमें बड़े साइज की T-आकार की संरचनाएं, तीन स्तरों वाले सीढ़ीदार पिरामिड, उल्टे पिरामिड, शेर की आकृतियां और पवित्र जियोमेटरी शामिल हैं. ये प्रतीक तुर्की, मिस्र, साउथ अमेरिका और कंबोडिया जैसे क्षेत्रों में पाए गए हैं.

लाक्रॉइक्स का कहना है कि एक दूसरे से इतनी दूर स्थित संस्कृतियों में एक जैसे प्रतीकों का मिलना संयोग नहीं हो सकता है. उनके अनुसार, यह एक आपस में साझा किया जाने वाला ग्लोबल सिस्टम हो सकता है. 

तुर्की के वान झील क्षेत्र से शुरू हुई ये कहानी

शोधकर्ता के मुताबिक, इस रहस्यमय सभ्यता की उत्पत्ति पूर्वी तुर्की के वान झील में स्थित आयोनिस नामक स्थान से हुई थी. उन्होंने इस क्षेत्र को दुनिया की सबसे पुरानी सांस्कृतिक और प्रतीकात्मक प्रणाली का केंद्र बताया है. यहीं से यह ज्ञान मिस्र के गीजा, स्फिंक्स और दक्षिण अमेरिका के तिवानाकू जैसे स्थलों तक पहुंचा है.

वान झील के पास मौजूद, केफकालेसी रिलीफ को लाक्रॉइक्स अपने शोध का सबसे मजबूत प्रमाण मानते हैं. इस पत्थर की नक्काशी में वही T-आकार, सीढ़ीदार पिरामिड और शेर की आकृतियां दिखाई देती हैं, जो मिस्र और अमेरिका में भी मिलती हैं.

स्फिंक्स और मिस्र को लेकर बड़ा दावा

लाक्रॉइक्स ने मिस्र के स्फिंक्स मंदिर की एक पुरानी तस्वीर को लेकर दावा किया कि वहां एक उल्टी सीढ़ीदार पिरामिड छिपी हुई है. उनका मानना है कि स्फिंक्स, ग्रेट पिरामिड और आसपास के मंदिर करीब 38,000 साल पुराने हैं जबकि मुख्यधारा का पुरातत्व इन्हें लगभग 4,500 साल पुराना मानता है.

मेनस्ट्रीम विशेषज्ञ नहीं है सहमत

हालांकि, अधिकांश पुरातत्वविद इन दावों को खारिज करते हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि वान झील क्षेत्र के स्थल हजारों साल पुराने उरार्टियन काल से जुड़े हुए हैं और हिमयुग से पहले की वैश्विक उन्नत सभ्यता के पक्ष में कोई ठोस वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है. साथ ही, लाक्रॉइक्स के दावों पर अब तक कोई भी शोध प्रकाशित नहीं हुआ है.

दावे और प्रमाण के बीच जंग जारी

फिलहाल, यह शोध वैज्ञानिकों में बहस का विषय बना हुआ है. जहां एक तरफ यह सिद्धांत मानव इतिहास को नए सिरे से देखने की चुनौती दे रहा हैं तो वहीं दूसरी ओर विशेषज्ञ ठोस प्रमाणों के कमी की वजह से इसे स्वीकार करने से इनकार कर रहे हैं. आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या ये दावे इतिहास की किताबों को बदल पाएंगे या ये सिर्फ एक थ्योरी बनकर रह जाएंगे.

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