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नोएडा में इंजीनियर की मौत के मामले में अब तक क्या कुछ हुआ? Photograph: (File/ANI)
Noida Engineer Death: ग्रेटर नोएडा के सेक्टर-150 में शुक्रवार-शनिवार की रात एक दर्दनाक हादसा हो गया. जिसमें एक होनहार युवा सॉफ्टवेयर की जान चली गई. युवराज मेहता गुरुग्राम की एक कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर थे, वे हमेशा की तरह शुक्रवार रात को अपनी दफ्तर से ग्रेटर नोएडा स्थित अपने घर लौट रहे थे, लेकिन घना कोहरा और अंधेरा होने की वजह से सेक्टर-150 की एक सुनसान सड़क पर उनकी कार अनियंत्रित होकर एक गड्ढे में गिर गई. जिसमें पानी भरा हुआ था. ये गड्ढा एक निर्माणाधीन मॉल के बेसमेंट का था. जिसे नोएडा अथॉरिटी ने अपने कब्जे में ले रखा था.
कार के गड्ढे में गिरने के बाद युवराज ने बाहर निकलने की तमाम कोशिश की उन्होंने मदद के लिए आवाज लगाई. उसके बाद उन्होंने अपने पिता को कॉल किया और बताया कि वे एक गड्डे में गिर गए. जिसमें पानी भरा हुआ है. पानी बहुत ठंडा है वे आकर उन्हें बचा ले. बेटे का कॉल आते ही बदहवास पिता ने किसी तरह से खुद को संभाला. युवराज के पिता ने पुलिस और फायर ब्रिगेड को कॉल कर पूरे मामले की जानकारी दी और मदद की गुहार लगाई.
पुलिस और फायर ब्रिगेड के पहुंचने से पहले युवराज के पिता घटनास्थल पर पहुंच गए. उस वक्त युवराज अपनी कार के ऊपर आ चुके थे और उन्होंने मोबाइल की लाइट जला रखी थी. युवराज जोर-जोर से मदद मांग रहे थे.
पुलिस और फायर ब्रिगेड और एसडीआरएफ की टीम मौके पर पहुंच गई. लेकिन युवराज को बजाने में सब बेबस नजर आए. युवराज कई घंटे तक जिंदगी और मौत से जूझते रहे और आखिर में अपनी कार के साथ 40 फीट गहरे गड्ढे में समा गए. युवराज इस दुनिया से जा चुके हैं लेकिन उनकी मौत नोएडा अथॉरिटी और सिस्टम पर तमाम सवालियां निशान खड़े कर रही है. युवराज की मौत के बाद प्रशासन की नींद खुली और कार्रवाई का सिलसिला शुरू हो गया.
#WATCH | Noida techie death case | Barricades have been set up in front of the water-filled ditch at the Sector-150 intersection, where the car of Yuvraj, age 27, fell in day before yesterday, resulting in his death. pic.twitter.com/ec9xXYouAT
— ANI (@ANI) January 19, 2026
जानें पूरे मामले में अब तक क्या कुछ हुआ?
गुरुग्राम की एक निजी आईटी कंपनी में कार्यरत युवराज मेहता शुक्रवार रात अपनी विटारा कार से ऑफिस से टाटा यूरेका पार्क सोसाइटी स्थित अपने घर लौट रहे थे, घना कोहरा होने की वजह से विजिबिलिटी शून्य हो गई थी. सड़क पर किसी भी तरह के संकेत या रिफ्लेक्टर नहीं लगे हुए थे. जिसके चलते युवराज को सड़क के तीखे मोड़ का अंदाजा नहीं हुआ.
जैसे ही वे सेक्टर-150 में एटीएस ली-ग्रैंडियोज मोड़ के पास पहुंचे उनकी कार अचानक सड़क किनारे बने निर्माणाधीन मॉल के 40 फीट गहरे बेसमेंट में गिर गई. जिसमें पानी भरा हुआ था. उन्होंने कार के बेसमेंट में गिरते ही अपने पिता राजकुमार मेहता को कॉल किया और कहा कि, 'पापा, मैं गहरे गड्ढे में गिर गया हूं, चारों तरफ पानी है. मैं डूब रहा हूं. प्लीज मुझे आकर बचा लीजिए, मैं अभी मरना नहीं चाहता.' यह सुनकर बदहवास पिता मौके पर पहुंचे. तब युवराज कार की छत पर खड़े होकर मोबाइल की टॉर्च जलाकर 'बचाओ-बचाओ' चिल्ला रहे थे.
युवराज के पिता राजकुमार मेहता ने क्या बताया?
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, राजकुमार मेहता ने बताया कि, "मैं वहां मौजूद पुलिस और लोगों से गुहार लगाता रहा कि कोई मेरे बेटे को बचा ले, लेकिन कड़ाके की ठंड और गहरे पानी के डर से कोई अंदर नहीं गया. पुलिस और प्रशासन केवल रस्सी फेंककर खानापूर्ति करते रहे." युवराज करीब पौने दो घंटे तक मदद का इंतजार करते रहे लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका. प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, अधिकारियों के पास न तो पर्याप्त गोताखोर थे और न ही सही उपकरण.
डिलीवरी ब्वॉय ने दिखाया साहस
इस दौरान मोनिंदर नाम के एक डिलीवरी ब्वॉय ने जरूर हिम्मत की और अपनी कमर में रस्सी बांधकर करीब 70 फीट गहरे पानी में छलांग लगा दी. मोनिंदर का कहना है कि जब तक वह युवराज तक पहुंचे युवराज डूब चुके थे. रात करीब 1:45 बजे कार पूरी तरह पानी में समा गई. इस तरह से एक बेटा अपने ही पिता के सामने मौत के मुंह में समा गया.
युवराज की मौत के बाद प्रशासन ने क्या की कार्रवाई?
इस दर्दनाक हादसे का बाद जनता का आक्रोश फूट पड़ा. रविवार को सोसाइटी के लोगों ने जस्टिस फॉर युवराज के पोस्टर लेकर कैंडल मार्च निकाला. लोगों के दबाव के बाद नोएडा प्राधिकरण के सीईओ लोकेश एम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए ट्रैफिक सेल के जूनियर इंजीनियर (JE) नवीन कुमार को बर्खास्त कर दिया.
इसके अलावा संबंधित क्षेत्र के अधिकारियों और कर्मचारियों को नोटिस भी जारी किया है. इसके साथ ही पिता की शिकायत के बाद पुलिस ने दो बिल्डरों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है. साथ ही लोटस बिल्डर के आवंटन और निर्माण कार्य की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है.
इन लापरवाहियों के चलते चली गई युवराज की जान
युवराज की मौत के पीछे प्रशासन और नोएडा अथॉरिटी की घोर लापरवाही सामने आई है. इसके साथ ही रिहायशी इलाके के पास मॉल के लिए गहरा गड्ढा खोदकर उसे खुला छोड़ दिया गया. जिसमें पानी भरा हुआ था. इसके साथ ही सड़क पर न तो कोई रिफ्लेक्टर था और ना ही 'कार्य प्रगति पर है' का कोई बोर्ड लगाया गया था. यही नहीं जिस मोड पर ये हादसा हुआ वहां कोई पुख्ता बैरिकेडिंग भी नहीं थी.
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इसके अलावा देर से रेस्क्यू करना भी युवराज की मौत की वजह बन गया. एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें घटनास्थल पर पहुंची तो लेकिन काफी देरी से. पुलिस और बचाव दल के पास न तो उचित क्रेन थी और न ही गोताखोर. मोड़ पर स्ट्रीट लाइट ना होने की वजह से अंधेरे में गड्ढा दिखाई नहीं दिया और हादसा हो गया.
पहले भी हो चुके हैं हादसे, सांसद और विधायक ने लिखा था अथॉरिटी को पत्र
बता दें कि जहां युवराज अपनी कार के साथ पानी में डूब गए उस स्थान पर पहले ही हादसे हो चुके हैं. 31 दिसंबर की रात भी इसी स्थान पर एक ट्रक गड्ढे में गिर गया था. लेकिन तब भी डिलीवरी व्बॉयज ने ड्राइवर की जान बचा ली थी. स्थानीय लोगों ने कई बार लिखित शिकायत की लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई. लोगों ने सांसद महेश शर्मा और विधायक तेजपाल सिंह नागर के माध्यम से भी अथॉरिटी को पत्र लिखा. ये पक्ष अथॉरिटी के पास पहुंचा लेकिन प्रशासन की नींद नहीं खुली.
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