नोएडा सेक्टर 150 में सिस्टम की 'जल समाधि', "सब खड़े थे लेकिन बचाने कोई नहीं गया..." डिलीवरी बॉय ने किया खुलासा

उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा के सेक्टर 150 में शुक्रवार देर रात एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर की कार निर्माणाधीन मॉल के बेसमेंट में भरे पानी में गिर गई. कोहरे और लापरवाही के चलते हुए इस हादसे में युवक की मौके पर ही मौत हो गई.

उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा के सेक्टर 150 में शुक्रवार देर रात एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर की कार निर्माणाधीन मॉल के बेसमेंट में भरे पानी में गिर गई. कोहरे और लापरवाही के चलते हुए इस हादसे में युवक की मौके पर ही मौत हो गई.

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Ravi Prashant
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नोएडा सेक्टर हादसा न्यूज़ Photograph: (X/@Abhishek__ch)

उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा स्थित सेक्टर 150 इलाके में शनिवार देर रात हुए दर्दनाक हादसे ने शहरी सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है. यहां एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर की कार सड़क से फिसलकर निर्माणाधीन मॉल के बेसमेंट में जा गिरी, जहां पहले से ही कई फीट पानी भरा हुआ था. इस हादसे में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौके पर ही मौत हो गई.

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आखिर कैसे हुआ हादसा?

स्थानीय जानकारी के अनुसार, हादसे के समय इलाके में घना कोहरा छाया हुआ था. विजिबिलिटी बेहद कम होने के कारण युवराज मेहता सड़क और नाले के बीच फर्क नहीं कर सके. बताया जा रहा है कि सड़क के किनारे निर्माणाधीन मॉल के बेसमेंट की बाउंड्री अधूरी थी, जिससे कार सीधे पानी से भरे बेसमेंट में जा गिरी.

दो घंटे तक जलती रही मोबाइल टॉर्च

घटना से जुड़ा एक सनसनीखेज खुलासा एक चश्मदीद ने किया है. उसके अनुसार, रात करीब 12.15 बजे कार पानी में गिरी. इसके बाद करीब दो घंटे तक कार के अंदर से मोबाइल की टॉर्च जलती रही. युवक लगातार मोबाइल दिखाकर सड़क पर खड़े लोगों से मदद मांगता रहा.

मौके पर मौजूद रहे पुलिस और फायर ब्रिगेड

चश्मदीद के अनुसार, घटनास्थल पर 100 से अधिक लोग मौजूद थे. पुलिस की कई गाड़ियां और फायर ब्रिगेड की टीम भी वहां पहुंच चुकी थी. इसके बावजूद कोई भी व्यक्ति पानी में उतरकर युवक को बचाने की हिम्मत नहीं जुटा सका. प्रशासन यह कहकर टालता रहा कि पानी ठंडा है और नीचे उतरना खतरनाक है.

फ्लिपकार्ट कर्मचारी ने की बचाने की कोशिश

घटनास्थल पर मौजूद एक युवक, जो खुद को फ्लिपकार्ट कर्मचारी बता रहा है, उसने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए. उसने बताया कि उसने अपनी कमर में रस्सी बांधकर पानी में उतरने की कोशिश की. करीब 40 मिनट तक वह बेसमेंट में युवक और कार को तलाशता रहा, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी.

एसडीआरएफ पर भी सवाल

युवक ने आगे कहा कि मौके पर संसाधन होने के बावजूद एसडीआरएफ का कोई भी कर्मी पानी में नहीं उतरा. लोगों ने आरोप लगाया कि यह केवल हादसा नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही से हुई मौत है.

पहले भी हो चुका है ऐसा हादसा

चश्मदीदों के अनुसार, करीब 15 दिन पहले भी इसी स्थान पर एक ट्रक पानी में गिर गया था, जिसे स्थानीय लोगों ने बचाया था. इसके बावजूद न तो सुरक्षा इंतजाम दुरुस्त किए गए और न ही बाउंड्री को मजबूत किया गया.

यह हादसा न सिर्फ एक परिवार की त्रासदी है, बल्कि शहरी विकास और सुरक्षा व्यवस्था पर भी बड़ा सवाल खड़ा करता है. अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कार्रवाई करता है और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं.

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