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सीएम योगी आदित्यनाथ Photograph: (X@myogiadityanath)
UP News: योगी सरकार राज्य के गरीब और जरूरतमंद लोगों के लिए तमाम योजनाएं चला रही है. जिससे उन्हें बेहतर जीवन दिया जा सके. इसी कड़ी में योगी सरकार ने एक और राहत भरी खबर दी है. दरअसल, सीएम योगी के आश्वासन के बाद अब विधायक निधि (MLALAD) के नियमों में ऐतिहासिक संशोधन की तैयारी शुरू हो गई है. जिसके तहत जल्द ही राज्य में विधायक निधि के पैसों का इस्तेमाल न सिर्फ 'असाध्य रोगों' के लिए, बल्कि सड़क दुर्घटनाओं और सामान्य बीमारियों के इलाज में लोगों की मदद के लिए भी किया जा सकेगा.
राजा भैया की पहल पर हुई शुरुआत
बता दें कि विधायक निधि में इस महत्वपूर्ण बदलाव की पहल कुंडा से विधायक और जनसत्ता दल लोकतांत्रिक के अध्यक्ष रघुराज प्रताप सिंह उर्फ 'राजा भैया' ने की. दरअसल, चालू विधानसभा सत्र के दौरान राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा करते हुए राजा भैया ने विधायक निधि के मौजूदा नियमों की विसंगतियों का मुद्दा जोरशोर से उठाया. जिसमें उन्होंने तर्क दिया कि वर्तमान नियमावली के तहत सिर्फ 'असाध्य रोगों' जैसे जैसे कैंसर या किडनी फेलियर के लिए ही आर्थिक मदद का प्रावधान है.
इसके साथ ही राजा भैया ने सदन में बताया कि, "सड़क दुर्घटनाएं या कई अन्य गंभीर बीमारियां तकनीकी रूप से असाध्य रोगों की श्रेणी में नहीं आतीं, लेकिन उनका इलाज इतना महंगा होता है कि गरीब व्यक्ति उसे वहन नहीं कर सकता. उन्होंने कहा कि यदि 'असाध्य' शब्द की बाध्यता समाप्त कर दी जाए, तो विधायक अपने क्षेत्र के अधिक से अधिक जरूरतमंदों की जान बचा सकेंगे. सीएम योगी ने राजा भैया के इस सुझाव की सराहना की साथ ही सदन में ही आश्वस्त किया कि सरकार जनहित में इन नियमों को शिथिल करने पर विचार करेगी.
ग्राम्य विकास विभाग ने शुरू किया परीक्षण
वहीं अब सीएम के निर्देश के बाद शासन स्तर पर हलचल तेज हो गई है. सूत्रों के मुताबिक, ग्राम्य विकास विभाग ने विधायक निधि के वर्तमान दिशा-निर्देशों का सूक्ष्मता से परीक्षण करना शुरू कर दिया है. जैसे ही विधानसभा की कार्यवाही समाप्त होगी, विभाग इस संबंध में उच्च स्तरीय बैठकें शुरू करेगा और उसके बाद नए संशोधित शासनादेश जारी किए कर देगा. इसमें सहायता राशि की सीमा और पात्रता के मानकों को भी पुनर्परिभाषित किए जाने का अनुमान है.
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बता दें कि विधायक निधि के आड़े आने वाली एक और बड़ी अड़चन 'एक बार सहायता' का प्रावधान है. यानी वर्तमान में एक मरीज बीमारी के दौरान सिर्फ एक बार ही आर्थिक मदद दे सकता है. कई विधायकों का तर्क है कि इन बीमारियों में इलाज लंबा चलता है इसलिए महीज की सीमित मदद ही हो पाती है. ऐसा माना जा रहा है कि नई नियमावली में इस परेशानी को भी दूर किया जा सकता है. जिससे मरीजों को एक से ज्यादा बार मदद मिल सकेगी.
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