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Jarange Patil's aamaran anashan begins
मराठा आरक्षण की लड़ाई अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है. मनोज जरांगे पाटील ने शुक्रवार (29 अगस्त) से मुंबई के आजाद मैदान में आमरण अनशन शुरू कर दिया है. सुबह 10 बजे से मोर्चा औपचारिक रूप से शुरू हुआ और हजारों की संख्या में मराठा समाज के लोग पूरे महाराष्ट्र से मुंबई पहुंच चुके हैं. जरांगे पाटील ने सरकार को चुनौती देते हुए कहा है कि “बिना आरक्षण लिए हम मुंबई से नहीं जाएंगे, चाहे जेल में डाल दो या गोली मार दो.” आंदोलनकारियों की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन सतर्क हो गया है.
मुंबई पुलिस हाई अलर्ट पर, CRPF और RAF की तैनाती
मुंबई पुलिस और प्रशासन के लिए यह प्रदर्शन बड़ी चुनौती बन गया है. आजाद मैदान और आसपास के इलाकों में CRPF, RAF और मुंबई पुलिस की कई टुकड़ियां तैनात की गई हैं. प्रशासन ने भारी भीड़, सुरक्षा और यातायात नियंत्रण को ध्यान में रखते हुए कड़े इंतज़ाम किए हैं. आपको बता दें कि समर्थक एक दिन पहले से ही मुंबई की ओर कूच कर चुके थे, प्रदर्शनकारियों की भीड़ को देखते हुए दक्षिण मुंबई के कई महत्पूर्ण रास्तों को बंद कर दिया गया जिसके कारण दक्षिण मुंबई में कई रास्तों पर भारी ट्रैफिक जाम भी लग गया है. गणेशोत्सव की तैयारियों के बीच यह आंदोलन मुंबई में कानून-व्यवस्था और सुरक्षा दोनों के लिहाज से प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया है.
हाईकोर्ट की शर्तें और पुलिस की रणनीति
बॉम्बे हाईकोर्ट ने जरांगे पाटील को प्रदर्शन की सिर्फ एक दिन की अनुमति दी है. 29 अगस्त को सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे तक ही मोर्चा निकाला जा सकता है. इसके लिए 5,000 लोगों की सीमा तय की गई है और सिर्फ 5 गाड़ियों को मैदान तक जाने की इजाजत मिली है, जबकि बाकी वाहनों को वाडी बंडर में पार्क करने का निर्देश दिया गया है. प्रदर्शन के दौरान माइक्रोफोन, स्पीकर और पदयात्रा पर पूरी तरह से पाबंदी है. पुलिस ने भीड़ प्रबंधन के लिए सख्त प्लान तैयार किया है ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से बचा जा सके.
जरांगे पाटील का आक्रामक तेवर
जरांगे पाटील ने हाईकोर्ट की शर्तों को “अन्यायपूर्ण” बताया और साफ कहा कि “मराठा समाज की लड़ाई लंबी है, एक दिन का मोर्चा काफी नहीं.” उन्होंने अपने समर्थकों को सख्त निर्देश दिए हैं कि मुंबईकरों को कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए और पुलिस प्रशासन के साथ पूरा सहयोग करना होगा. पाटील ने कहा कि जब तक मराठा समाज को OBC आरक्षण नहीं मिलता, वह अनिश्चितकालीन आमरण अनशन जारी रखेंगे.
वहीं गणेशोत्सव की तैयारियों के बीच इस आंदोलन ने महाराष्ट्र सरकार की चिंता बढ़ा दी है. प्रशासन को डर है कि यदि स्थिति नियंत्रण से बाहर हुई तो कानून-व्यवस्था पर गहरा असर पड़ सकता है. सरकार ने जरांगे पाटील के साथ बातचीत की कोशिशें हैं, लेकिन पाटील ने अब तक किसी समझौते के संकेत नहीं दिए हैं. उनका कहना है कि सरकार बार-बार आश्वासन देती है लेकिन ठोस कदम नहीं उठाती. फिलहाल मुंबई में हाई अलर्ट है और सभी की निगाहें आजाद मैदान में चल रहे इस मराठा आरक्षण संग्राम पर टिकी हुई हैं.
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