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ajit pawar Photograph: (ani)
Ajit Pawar Plane Crash: महाराष्ट्र के उप-मुख्यमंत्री अजित पवार की बुधवार सुबह प्लेन क्रैश में मौत हो गई है. प्लेन लैंडिंग के लिए जा रहा था, जिस दौरान यह हादसा हुआ था. बताया जा रहा है कि प्लेन में 2 पायलट समेत कुल 5 लोग सवार थे. हादसा इतना खतरनाक था कि प्लेन पूरी तरह जलकर खाक हो गया है. बता दें अजित पवार महाराष्ट्र की राजनीति का ऐसा नाम है, जिसने दशकों तक सत्ता में अपनी मजबूत पकड़ रखी है.
महाराष्ट्र के कद्दावर नेता थे अजित पवार
अजित पवार महाराष्ट्र की राजनीति के बड़े दिग्गज नेता थे. सत्ता और संगठन दोनों में ही उनकी पकड़ गहरी थी. वे NCP प्रमुख शरद पवार के भतीजे थे. अजित पवार ने साल 1982 में राजनीति में कदम रखा था. उन्होंने पहले अपने चाचा के साथ कांग्रेस में और फिर उनसे अलग होकर एनसीपी का गठन किया. यहां से उनकी भूमिका राज्य में और मजबूत हो गई.
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फिल्म जगत से पिता का संबंध
अजित पवार का जन्म 22 जुलाई को साल 1959 में हुआ था. उनका जन्म अहमदनगर जिले के देवलाली प्रवरा में अपने दादा के घर में हुआ था. उनके पिता अनंतराव पवार फिल्म जगत से जुड़े हुए थे. उन्होंने मुंबई के वी.शांताराम के राजकमल स्टूडियो में काम किया था. अजित पवार की शादी सुनेत्रा पवार से हुई थी. अजित और सुनेत्रा के दो बच्चे हैं. अजित की पढ़ाई महाराष्ट्र एजुकेशन सोसायटी हाई स्कूल बारामती से हुई है. कॉलेज में पढ़ाई करते समय उनके पिता का निधन हो गया था जिसके बाद उन्होंने पढ़ाई छोड़ दी थी.
शरद पवार का हाथ थाम पकड़ी राजनीति में रफ्तार
अजित पवार ने राजनीति में कदम अपने चाचा शरद पवार की मदद से रखा था. उनकी उंगली पकड़कर वे राजनीति में आए थे. जिस समय वे कॉलेज में थे, शरद पवार एक दिग्गज नेता बन चुके थे. अजित पवार ने पहली बार सहकारी चीनी कारखाने के बोर्ड के लिए चुनाव लड़ा था. इसके बाद वे पुणे सहकारी बैंक के अध्यक्ष रहे थे. इस पद पर वे 16 सालों तक काबिज रहे.
#WATCH | Crash landing in Baramati | Five people onboard the Mumbai-Baramati charter plane, including Maharashtra Deputy CM Ajit Pawar, died as per initial information by the DGCA.
— ANI (@ANI) January 28, 2026
Visuals from the spot show the wreckage of the aircraft. pic.twitter.com/GMmwrZwR0M
शरद पवार के लिए छोड़ी सीट!
अजित पवार ने साल 1991 में पहली बार बारामती संसदीय क्षेत्र से लोकसभा चुनाव लड़ा था और यहां उन्हें जीत भी मिली थी. मगर यह सीट उन्होंने चाचा शरद पवार के लिए छोड़ दी थी. इसके बाद शरद पवार पी वी नरसिम्हा की सरकार में रक्षा मंत्री बने थे.
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