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अजित पवार का फाइल फोटो
Ajit Pawar dies in plane crash Baramati: महाराष्ट्र की राजनीति में 'दादा' के नाम से मशहूर अजित अनंतराव पवार का सफर आज एक दुखद मोड़ पर आकर रुक गया. बारामती में हुए विमान हादसे में उनकी मौत ने पूरे राज्य को स्तब्ध कर दिया है. लेकिन उनका राजनीतिक करियर महाराष्ट्र के इतिहास में हमेशा चर्चित रहेगा. उनका एक ऐसा सफर जो सहकारी समितियों से शुरू होकर उपमुख्यमंत्री के पद तक पहुंचा था. वह कई बार सत्ता की कुर्सी पर बैठे और कभी-कभी विवादों से भी घिरे रहे.
पिता की मौत के बाद पढ़ाई छोड़ संभाली थी परिवार की जिम्मेदारी
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार 1982 में अजित पवार ने राजनीति में कदम रखा था. पिता की मौत के बाद पढ़ाई छोड़कर उन्होंने परिवार की जिम्मेदारी संभाली और एक सहकारी शुगर फैक्ट्री के बोर्ड में चुने गए. बताया जाता है कि यहीं से उनकी राजनीतिक पाठशाला शुरू हुई थी. इस दौरान उन्होंने अपने चाचा शरद पवार की छत्रछाया में तेजी से तरक्की की. जानकारी के अनुसार अजित पवार 1991 में बारामती लोकसभा सीट से पहली बार सांसद बने थे. लेकिन कुछ समय बाद उन्होंने चाचा शरद पवार के लिए सीट छोड़ दी थी. अजित पवार कुल 7 बार विधायक और 1 बार सांसद बने थे।
#WATCH | Crash landing in Baramati | Five people onboard the Mumbai-Baramati charter plane, including Maharashtra Deputy CM Ajit Pawar, died as per initial information by the DGCA.
— ANI (@ANI) January 28, 2026
Visuals from the spot. pic.twitter.com/6MHqTi6gna
करीबी लोग कहते थे 'सत्ता का जादूगर', महाराष्ट्र सरकार में कई बार रहे मंत्री
रिपोर्ट्स के अनुसार लोकसभा सीट छोड़ने के बाद उनका फोकस विधानसभा पर रहा. वह बारामती से लगातार विधायक चुने जाते रहे और हर बार महाराष्ट्र सरकार में मिट्टी संरक्षण, बिजली, योजना, जल संसाधन जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों का जिम्मा संभाला. महाराष्ट्र में वे रिकॉर्ड 5-6 बार उपमुख्यमंत्री भी बने. अजित कभी कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन में तो कभी भाजपा के साथ हमेशा सरकार का हिस्सा बने रहे. उनके करीबी लोग उन्हें 'सत्ता का जादूगर' कहते थे, क्योंकि वे हमेशा सरकार में बने रहते थे.
2019 में 80 घंटे रहे थे डिप्टी सीएम
अजित पवार के राजनीतिक करियर में 2019 में एक बड़ा ट्विस्ट आया जब उन्होंने एनसीपी के बिना भाजपा के साथ गठबंधन किया और उपमुख्यमंत्री बने, लेकिन उनका ये पद सिर्फ 80 घंटे टिका. फिर 2023 में पार्टी से अलग होकर उन्होंने अपनी एनसीपी (अजित पवार गुट) बनाई. चाचा शरद पवार से कानूनी लड़ाई लड़कर घड़ी का सिंबल हासिल किया और महायुति में शामिल होकर फिर उपमुख्यमंत्री बने. 2024 के चुनावों में बारामती से जीत दर्ज की और महाराष्ट्र की राजनीति में अपनी मजबूत पकड़ बनाए रखी.अजित पवार को 'दादा' कहकर पुकारा जाता था. जनता दरबार में आम लोगों से मिलना, विकास पर फोकस, सिंचाई और सहकारी क्षेत्र में योगदान. लेकिन विवाद भी कम नहीं रहे. सिंचाई घोटाले जैसे आरोपों ने उन्हें घेरा पर वे हर बार मजबूती से उभरे. बीते दिनों हुए बीएमसी चुनाव में वह एनसीपी शरद पवार के साथ मैदान में थे.
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