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यह तो हद ही हो गई...अब पाकिस्तान का नाम लेकर डरा रहा चीन, राष्ट्रवाद पर 'नसीहत'

चीन भी भारत की सैन्य ताकत को हल्के में नहीं ले रहा है. ऐसे में वह पाकिस्तान (Pakistan) और नेपाल (Nepal) की गीदड़ भभकी भी दे रहा है.

Nihar Ranjan Saxena | Edited By : Nihar Saxena | Updated on: 22 Jun 2020, 10:52:43 AM
India China Flags

खुद युद्ध से डरा चीनी मुखपत्र ग्लोबल टाइम्स लगातार दे रहा धमकी. (Photo Credit: न्यूज नेशन)

highlights

  • 'ग्लोबल टाइम्स' ने फिर राष्ट्रवाद के फेर में बेवकूफ नहीं बनने की दी सलाह.
  • नसीहत देते हुए लिखा कि भारतीय अर्थव्यवस्था को चीन जैसे देश की जरूरत.
  • पाकिस्तान औऱ नेपाल का नाम लेकर भी डरा रहा पीएम नरेंद्र मोदी सरकार को.

नई दिल्ली:

पूर्वी लद्दाख (Ladakh) सीमा पर भारत-चीन सेना के जवानों के बीच विगत सप्ताह हुआ हिंसक संघर्ष दोनों देशों के बीच तनाव का बड़ा कारण बना हुआ है. तनाव कम करने के प्रयासों के बीच दोनों ही पक्षों ने वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर अपने-अपने सैन्य जमावड़े को मजबूत बनाने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है. इस बीच चीनी सरकार का मुखपत्र 'ग्लोबल टाइम्स' भी लगातार भारतीय राजनीतिक प्रतिष्ठान को धमकाने का काम कर रहा है. डराने-धमकाने का अंदाज भी खासा निराला है, जो बताता है कि चीन भी भारत की सैन्य ताकत को हल्के में नहीं ले रहा है. ऐसे में वह पाकिस्तान (Pakistan) और नेपाल (Nepal) की गीदड़ भभकी भी दे रहा है. अब समाचार पत्र ने अपनी संपादकीय में दोनों देशों के बीच तनाव का असर व्यापारिक रिश्तों पर पड़ने की आशंका से मोदी सरकार को धमकाने का काम किया है. संपादकीय में चेतावनी भरे अंदाज में कहा गया है कि व्यापारिक संबंधों में गिरावट का खामियाजा सबसे ज्यादा भारत को भुगतान पड़ेगा. इसके साथ ही अखबार ने आम भारतीयों को नसीहत भी दी है कि राष्ट्रवाद (Nationalism) के फेर में बेवकूफ नहीं बनें.

दुर्भाग्यपूर्ण था हिंसक संघर्ष
अपनी संपादकीय की शुरुआत में ही अखबार ने वास्तविक नियंत्रण रेखा पर 15 जून को हुए हिंसक संघर्ष को दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया है. इसके साथ ही चेतावनी भी दी है कि इस हिंसक संघर्ष को भारत के बाहर या भीतर रह रहे राजनीतिज्ञों और कांस्पेरिसी थ्योरिस्ट चीन के खिलाफ नफरत फैलाने या राष्ट्रवाद की भावना को उभारने के लिए इस्तेमाल नहीं करें. खासकर उस सूरत में तो बिल्कुल भी नहीं जब भारत को अपनी अर्थव्यवस्था के विकास के लिए चीन जैसे पड़ोसी देश पर निर्भर रहना है.

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राष्ट्रवाद के फेर में बेफकूफ न बनें भारतीय
भारत-चीन सैनिकों के बीच हुई हिंसक झड़प के बाद से ही चीन लगातार शांति और बातचीत के जरिए मुद्दे को सुलझाने की बात कहता रहा है. हालांकि तिब्बत सीमा पर लगातार चीनी सेना युद्ध की तैयारियों में व्यस्त है और चीन की सरकारी मीडिया अलग-अलग तरीके से भारत को लगातार धमकाने का काम कर रही है. इस बार फिर चीन ने चेतावनी देते हुए कहा है कि दोनों देशों के बीच तनाव का असर अगर व्यापारिक रिश्तों पर पड़ा तो ये भारत के लिए घातक साबित हो सकता है. चीन ने भारतीयों को 'राष्ट्रवाद' के चक्कर में बेफकूफ न बनने की सलाह भी दे डाली है.

अमेरिका के उकसावे में नहीं आए भारत
इसके साथ ही 'ग्लोबल टाइम्स' ने नई दिल्ली प्रशासन को भी ऐहतियात बरतने को कहा है. खासकर किसी तीसरे देश यानी अमेरिका के उकसावे में नहीं आने को कहा है. अखबार अपनी संपादकीय में लिखता है कि किसी तीसरे देश के उकसाने पर विवाद एक कड़वाहट भरे कूटनीतिक युद्ध में तब्दील हो सकता है या इसके असर भारत-चीन सीमा पर कई और हिंसक झड़प के रूप में सामने आ सकता है. उसने सलाह दी है कि भारत की मोदी सरकार शांति और धैर्य के साथ काम लेते हुए पूरे मामले की जांच कर संबंधों की बेहतरी और सीमा पर शांति और स्थायित्व बनाए रखने की दिशा में काम करे.

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चीन ही है भारत का बड़ा साझेदार
इस संपादकीय में भारतीयों को 'राष्ट्रवाद' की आड़ में बेफकूफ न बनने की सलाह दी गई है. इसमें कहा गया है कि भारत को चीन जैसे साथी कि आर्थिक और सामरिक रूप से ज़रुरत है. चीन ही भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है और भारत के विकास की नीव विदेशी निवेश है जिसका बड़ा हिस्सा चीन से ही आ रहा है. अखबार ने रिटायर्ड सैन्य अधिकारी रंजीत सिंह का भी जिक्र करते हुए कहा है कि नई दिल्ली के सत्ता प्रतिष्ठान और आम लोगों को उनसे बचने की जरूरत है. वह लिखता है रंजीत सिंह जैसे लोग छद्म राष्ट्रवाद का नारा देकर चीन को 'मुंहतोड़' जवाब देने की वकालत कर रहे हैं. गौरतलब है कि रंजीत सिंह ने एक टीवी डिबेट में चीनी उत्पादों के बायकॉट की मांग रखी थी.

चीनी निवेश का दिया उदाहरण
अखबार लिखता है कि भारत के 30 बड़े स्टार्टअप में से 18 में चीन ने ही निवेश किया है. इसके अलावा घरेलू सामन, टीवी, माइक्रोवेव, एयरकंडीशनर, मोबाइल फोन, लैपटॉप जैसी सभी ज़रूरी चीजें भारत में चीन से ही आयात की जा रही हैं. चीन से भारत को काफी सस्ते में सभी सामान मिलता है, अगर वह कहीं और से ये सब लेना चाहता है तो इसकी कीमत काफी भारी पड़ सकती है. इसके साथ ही अखबार भारत को एशियाई द्वीप खासकर चीन-पाकिस्तान के साथ तनाव न बढ़ाने की वकालत भी करता है. वह धमकाने वाले अंदाज में लिखता है कि इन दो देशों के साथ भारत सबसे लंबी सीमा साझा करता है.

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पड़ोस में दोस्त रखने की नसीहत
इसके साथ ही अखबार लिखता है कि भारत में दावा किया जा रहा है कि वे अब मेड इन इंडिया इक्विपमेंट के जरिए 4G इंटरनेट उपलब्ध कराने वाले हैं, हालांकि सच ये है कि भारत में एक भी ऐसा टेलिकॉम प्रदाता नहीं है जो कि 3G या 4G इंटरनेट के लिए जरूरी इक्विपमेंट्स का उत्पादन करता हो. चीन ने भारत को सलाह दी है कि उसकी सबसे बड़ी सीमा चीन और पाकिस्तान से लगी हुई है और दोनों ही देशों से तनाव उसे काफी भारी पड़ सकता है. चीन के मुताबिक भारत और चीन में अच्छे रिश्ते बनाने की 100 वजह हैं लेकिन कुछ लोगों के बहकावे में आकर चीन के खिलाफ अफवाहें उड़ाई जा रही हैं. चीन ने चेतावनी देते हुए कहा है कि पड़ोस में दुश्मन के रहने से अच्छा होता है कि कोई दोस्त रहे.

First Published : 22 Jun 2020, 10:52:43 AM

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