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मोदी सरकार को बट्टा, भूख-कुपोषण के मामले में नेपाल-पाकिस्तान तक बेहतर

केंद्र सरकार गरीबी को दो वक्त की रोटी देने की तमाम योजनाओं पर काम कर रही है, लेकिन दूसरी तरफ भूख (Hunger) और कुपोषण की समस्या कम होने का नाम ही नहीं ले रही है.

News Nation Bureau | Edited By : Nihar Saxena | Updated on: 15 Oct 2021, 12:55:11 PM
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भूख-कुपोषण पर हंगर इंडेक्स ने घेरा मोदी सरकार. (Photo Credit: न्यूज नेशन)

highlights

  • 116 देशों की सूची में भारत 101वें स्थान पर
  • भारत से बेहतर स्थिति नेपाल-पाकिस्तान की
  • चीन, ब्राजील और कुवैत समेत 18 देश शीर्ष पर

नई दिल्ली:

मोदी सरकार (Modi Government) के लिए यह खबर किसी लिहाज से सुखदायी नहीं है. एक तरफ तो केंद्र सरकार गरीबी को दो वक्त की रोटी देने की तमाम योजनाओं पर काम कर रही है, लेकिन दूसरी तरफ भूख (Hunger) और कुपोषण की समस्या कम होने का नाम ही नहीं ले रही है. करेला वह भी नीम चढ़ा की तर्ज पर अब तो भूख औऱ कुपोषण पर नजर रखने वाली संस्था ग्लोबल हंगर इंडेस्क 2021 की रिपोर्ट भी अच्छे संकेत नहीं दे रही है. इस लिस्ट में भारत 101वें स्थान पर खिसक आया है. 2020 में इसी इंडेक्स में भारत 94वें स्थान पर था. हैरानी की बात है कि भारत अपने पड़ोसी देश पाकिस्तान, बांग्लादेश और नेपाल से भी कहीं पीछे है. पाकिस्तान 92वें, नेपाल और बांग्लादेश 76वें स्थान पर हैं.

116 देशों की सूची में 101वां स्थान
ग्लोबल हंगर इंडेक्स की जानकारी के मुताबिक 116 देशों की सूची में भारत को 101वें स्थान पर जगह मिली है. वहीं इस सूची में पांच से कम जीएचआई स्कोर रखने वाले चीन, ब्राजील और कुवैत समेत 18 देश शीर्ष पर हैं. ग्लोबल हंगर इंडेक्स अलग-अलग देशों में लोगों को खाने की चीजें कैसी और कितनी मिलती उसे दिखाने का माध्यम है. इसके आधार पर ही किसी देश का एक आकलन तैयार किया जाता है. यही वजह है कि ग्लोबल हंगर इंडेक्स’ का सूचकांक हर साल ताजा आंकड़ों के साथ जारी किया जाता है.

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क्या है ये इंडेक्स?
इसके जरिए दुनियाभर में भूख के खिलाफ चल रहे अभियान की उपलब्धियों और नाकामियों को दर्शाया जाता है. यह रिपोर्ट आयरलैंड की एजेंसी कन्सर्न वर्ल्डवाइड और जर्मनी के संगठन वेल्ट हंगर हिल्फ मिलकर तैयार करते हैं. इस बार रिपोर्ट में भारत में भूखमरी की व्यापकता पर चिंता जताई गई है. गौरतलब है कि 2020 में 107 देशों की सूची में भारत 94वें स्थान पर था. संस्था की रिपोर्ट के मुताबिक भारत का जीएचआई स्कोर कम हुआ है. साल 2000 में ये 38.8 था, जो 2012 से 2021 के बीच 28.8-27.5 रह गया.

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ऐसे बनता है जीएचआई स्कोर 
जीएचआई स्कोर चार संकेतकों के आधार पर तय होता है. ये हैं अल्पपोषण, चाइल्ड वेस्टिंग (पांच साल से कम उम्र के बच्चे, जिनका वज़न उनकी ऊंचाई के हिसाब से कम है, ये तीव्र कुपोषण को दर्शाता है), चाइल्ड स्टंटिंग (पांच साल से कम उम्र के बच्चे जिनकी उम्र के मुताबिक लंबाई कम है, जो लंबे समय से कुपोषण को दर्शाता है) और बाल मृत्यु दर (पांच साल से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु दर). जीएचआई ज्यादा होने का मतलब है उस देश में भूख की समस्या अधिक है. उसी तरह किसी देश का स्कोर अगर कम होता है तो उसका मतलब है कि वहां स्थिति बेहतर है.

First Published : 15 Oct 2021, 12:25:27 PM

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