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वेनेजुएला पर अमेरिका की सैन्य कार्रवाई के बाद क्यों परेशान हैं किंम जोंग उन? Photograph: (Social Media)
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के वेनेजुएला पर सैन्य कार्रवाई और निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी को लेकर कई देशों ने आलोचना की है, जबकि कई देश ऐसे भी हैं जिन्होंने इस कार्रवाई को जरूरी बताया है. जिन देशों ने ट्रंप के इस अभियान की आलोचना की है उनमें उत्तर कोरिया का नाम भी शामिल है. यही नहीं जब से ट्रंप ने वेनेजुएला में सैन्य अभियान चलाया है तब से ही उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन बौखलाए हुए हैं. उनकी बौखलाहट का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि जैसे ही अमेरिकी सेना के अभियान की जानकारी दुनिया को हुई. उत्तर कोरिया ने अपनी हाइपरसोनिक मिसाइल का परीक्षण कर दिया.
वेनेजुएला पर सैन्य कार्रवाई से क्यों परेशान हैं किम?
वेनेजुएला पर अमेरिका की सैन्य कार्रवाई से उत्तर कोरिया के सुप्रीम लीडर किम जोंग उन की परेशानी के कई कारण हो सकते हैं. इसमें सबसे पहली वजह उत्तर कोरिया में तानाशाही सरकार है जिसकी डोर किम जोंग उन के हाथ में है. ऐसे ही हालात वेनेजुएला में हैं. किम जोंग उन और निकोलस मादुरो दोनों वामपंथी विचारधारा वाले हैं और दोनों ही अपने देश को तानाशाही के जरिए चला रहे हैं. जिसके चलते वहां की जनता परेशान है. जो इन तानाशाहों के खिलाफ आवाज तक नहीं उठा सकती.
ट्रंप की सैन्य कार्रवाई से खौफ में है उत्तर कोरिया का तानाशाह?
ऐसे में वेनेजुएला में ट्रंप की सैन्य कार्रवाई का खौफ उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन को भी सता रहा है. क्योंकि ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान किम जोंग उन ने उनसे मुलाकात की थी, लेकिन उस मुलाकात के बाद भी उत्तर कोरिया का परमाणु कार्यक्रम नहीं रुका और किम अपनी मनमानी करते रहे. वेनेजुएला पर सैन्य कार्रवाई किम के लिए भी एक संदेश हो सकता है. जिसका डर उन्हें सता रहा है. यही वजह है कि वेनेजुएला पर सैन्य कार्रवाई के तुरंत बाद किम ने अपनी 'अत्याधुनिक' हाइपरसोनिक मिसाइल का परीक्षण भी कर डाला. जो इस बात की ओर इशारा है कि अगर अमेरिका ने उत्तर कोरिया पर भी वेनेजुएला जैसी कार्रवाई करने की कोशिश की तो किम जोंग उन पीछे नहीं हटेंगे.
कब किया था उत्तर कोरिया ने बैलिस्टिक मिसाइलों का परीक्षण?
दरअसल, रविवार को जापान और साउथ कोरिया ने कहा कि उन्होंने उत्तर कोरिया की राजधानी प्योंगयांग के पास दो बैलिस्टिक मिसाइलों के परीक्षण के बारे में पता चला. जो उत्तर कोरिया का इस साल का पहला परीक्षण था. इसके बाद सोमवार को कोरियन सेंट्रल न्यूज एजेंसी ने भी हाइपरसोनिक मिसाइलों के परीक्षण के बारे में जानकारी दी.
जिसमें नॉर्थ कोरिया के लिए उसके आधिकारिक नाम का इस्तेमाल किया गया. खबर में किम के हवाले से कहा गया कि परीक्षण ने "डीपीआरके के परमाणु फोर्स की तैयारी" को दिखा दिया है. केसीएनए ने किम जोंग उन के हवाले से लिखा कि, "हमारे परमाणु बलों को व्यावहारिक आधार पर स्थापित करने और उन्हें वास्तविक युद्ध के लिए तैयार करने में हाल ही में महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की गई हैं."
दुनिया को लगातार अपनी ताकत दिखा रहे किम
बता दें कि किम जोंग उन आए दिन उत्तर कोरिया में मिसाइल और हथियारों का परीक्षण कर दुनिया को अपनी ताकत देखाते रहते हैं. रविवार को किए गए मिसाइल परीक्षण भी इसी का हिस्सा हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, किम जोंग उन ने कहा कि इन सैन्य गतिविधियों का उद्देश्य परमाणु युद्ध निवारक को धीरे-धीरे उच्च-विकसित आधार पर स्थापित करना है. यानी न्यूक्लियर वॉर डेटरेंस करना है.
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दरअसल, जब दो पक्षों के पास परमाणु हथियार होते हैं तो वे दोनों एक दूसरे पर हमला नहीं करते. ऐसे में माना जा सकता है कि न्यूक्लियर हथियार होना दोनों के बीच जंग को टालता देता है. किम ने आगे कहा कि, "यह क्यों आवश्यक है इसका उदाहरण हाल ही में हुए भू-राजनीतिक संकट और जटिल अंतरराष्ट्रीय घटनाओं से मिलता है." बता दें कि किम ऐसा कहकर वेनेज़ुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी की ओर इशारा कर रहे थे.
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