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वेनेजुएला संकट Photograph: (X)
नए साल की शुरुआत के साथ ही राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वेनेजुएला में एक बड़े पैमाने पर हमले का आदेश देकर दुनिया को चौंका दिया. इस सैन्य कार्रवाई के तहत वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को गिरफ्तार कर लिया गया. हालांकि, इस ऑपरेशन के बाद अमेरिका के भीतर एक नई कानूनी और राजनीतिक बहस छेड़ दी है, क्योंकि प्रशासन ने इसके लिए कांग्रेस (संसद) से कोई मंजूरी नहीं ली थी.
हमला करने के लिए अनुमति अनिवार्य होगी?
अभी दो महीने पहले, 2 नवंबर को व्हाइट हाउस की चीफ ऑफ स्टाफ सूसी विल्स ने स्पष्ट रूप से कहा था कि वेनेजुएला की धरती पर किसी भी हमले के लिए कांग्रेस की अनुमति अनिवार्य होगी. उन्होंने इसे 'युद्ध' की श्रेणी में रखा था. लेकिन अब बिना किसी विधायी प्रक्रिया के इस ऑपरेशन को अंजाम देना ट्रंप प्रशासन के पिछले बयानों पर सवालिया निशान लगाता है. सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रशासन पिछले कुछ समय से न्याय विभाग (Justice Department) से इस तरह के हमलों के लिए नई कानूनी व्याख्या की मांग कर रहा था.
गिरफ्तारी पर क्या कह रहा है ट्रंप प्रशासन?
अमेरिकी प्रशासन इस हमले को युद्ध के बजाय एक 'लॉ एनफोर्समेंट' (कानून प्रवर्तन) कार्रवाई के रूप में पेश कर रहा है. सीनेटर माइक ली के अनुसार, विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इसे अमेरिकी कर्मियों की सुरक्षा के लिए उठाया गया कदम बताया. वहीं, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर तर्क दिया कि मादुरो पर नशीली दवाओं के आतंकवाद (नार्कोटैररिज्म) के गंभीर आरोप हैं और वह इन आरोपों से सिर्फ इसलिए नहीं बच सकते क्योंकि वे राष्ट्रपति भवन में रहते हैं.
तो क्या पूरा गेम तेल का है?
शनिवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ट्रंप के बयानों ने इस ऑपरेशन के उद्देश्यों को और अधिक जटिल बना दिया. उन्होंने केवल गिरफ्तारी की बात नहीं की, बल्कि वेनेजुएला के तेल बुनियादी ढांचे के पुनर्निर्माण और देश को "सही तरीके से चलाने" की बात भी कही. विशेषज्ञों का मानना है कि ये टिप्पणियां केवल अपराधी को पकड़ने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि सीधे तौर पर 'रिजीम चेंज' (शासन परिवर्तन) का संकेत देती हैं.
1989 के पनामा हमले से तुलना
इतिहासकार इस घटना की तुलना 1989 के पनामा आक्रमण से कर रहे हैं. उस समय राष्ट्रपति जॉर्ज एच.डब्ल्यू. बुश ने पनामा के नेता मैनुअल नोरिएगा को नशीली दवाओं के आरोपों में पकड़ने के लिए सेना भेजी थी. साल 1989 में तत्कालीन कानूनी सलाहकार विलियम बर्र ने एक मेमो लिखा था, जिसमें राष्ट्रपति को विदेशी धरती पर किसी नागरिक को पकड़ने का "अंतर्निहित संवैधानिक अधिकार" दिया गया था, भले ही वह अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन हो. माना जा रहा है कि ट्रंप प्रशासन भी इसी पुरानी और विवादित कानूनी व्याख्या का सहारा ले रहा है.
दुनिया ने क्या कहा?
चीन ने इस कार्रवाई को "एक संप्रभु राष्ट्र के खिलाफ बल का नग्न प्रयोग" करार दिया है. वेनेजुएला, पनामा की तुलना में एक बड़ा देश है और वहां के तेल संसाधनों पर कई वैश्विक शक्तियों की नजर है. ऐसे में मादुरो की गिरफ्तारी के बाद वहां स्थिरता बनाए रखना अमेरिका के लिए एक बड़ी चुनौती होगी. फिलहाल, यह स्पष्ट है कि राष्ट्रपति ट्रंप एक बार फिर अपनी शक्तियों की सीमाओं को चुनौती दे रहे हैं. यह देखना दिलचस्प होगा कि अमेरिकी कांग्रेस और अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस पर क्या रुख अपनाता है.
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