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वेनेजुएला से पहले अमेरिका ने उखाड़ फेंकी थी इस देश के तानाशाह की सत्ता Photograph: (TruthSocial@realDonaldTrump)
अमेरिका ने आखिरकार वेनेजुएला पर सैन्य हमला कर राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के गिरफ्तार कर लिया. यही नहीं मादुरो की गिरफ्तार के कुछ घंटे बाद ही उन्हें अमेरिका भी लेकर आ गए. राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के साथ उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को भी गिरफ्तार कर अमेरिका लाया गया है. वेनेजुएला के राष्ट्रपति की गिरफ्तारी के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एलान किया कि जब तक वेनेजुएला में एक नई सरकार का "सुरक्षित, उचित और विवेकपूर्ण" हस्तांतरण नहीं हो जाता, तब तक अमेरिका वेनेजुएला का "शासन" संभालेगा.
मादुरो की गिरफ्तारी के बाद क्या बोले ट्रंप?
वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की. जिसमें उन्होंने साफ कहा कि, "हम तब तक देश का शासन संभालेंगे जब तक कि हम एक सुरक्षित, उचित और विवेकपूर्ण हस्तांतरण नहीं कर लेते." ट्रंप ने इस बात पर जोर देते हुए कहा कि, अमेरिका मादुरो जैसी किसी अन्य सरकार को दोबारा जड़ पकड़ने नहीं देगा."
इसके साथ ही ट्रंप ने जमीनी स्तर पर सैन्य उपस्थिति की बात कही और वेनेज़ुएला के बुनियादी ढांचे के पुनर्निर्माण और तेल संसाधनों पर नियंत्रण के लिए अमेरिकी कंपनियों की संभावनाओं पर भी चर्चा की, जो वेनेजुएला की गिरती अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण कारक है. इसके अलावा, ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर वेनेज़ुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की पहली तस्वीर भी साझा की. जिसमें मादुरो के हाथों में हथकड़ी और आंखों पर पट्टी दिख रही है और वे अमेरिकी युद्धपोत यूएसएस इवो जिमा पर सवार नजर आ रहे हैं.
वेनेजुएला से पहले इस देश से उड़ाख फेंकी थी तानाशाह की सत्ता
वेनेजुएला कोई पहला देश नहीं है जहां की तानाशाही सत्ता को अमेरिका ने उखाड़ फेंका हो. इससे पहले भी अमेरिका एक देश के तानाशाह के शासन को उखाड़ फेंका और उसे फांसी पर लटका दिया. दरअसल, हम बात कर रहे हैं इराक की. जहां के तानाशाह सद्दाम हुसैन की सत्ता को 2003 में अमेरिका ने उखाड़ फेंका था और उसे फांसी पर लटका दिया था.
अमेरिका ने उखाड़ फेंकी थी सद्दाम हुसैन की सत्ता
दरअसल, मार्च 2003 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश के नेतृत्व में अमेरिका ने इराक पर हमला किया. इस हमले की वजह सद्दाम हुसैन की सरकार के पास मौजूद सामूहिक विनाश के हथियारों (WMD) को नष्ट करना बताया गया. 9/11 हमलों के बाद शुरू हुए व्यापक आतंकवाद विरोधी युद्ध के रूप में भी इस हमले को देखा गया. अमेरिका, ब्रिटेन और कई अन्य देशों की सेनाओं के एक साथ मिलकर सद्दाम हुसैन की सरकार को तुरंत गिरा दिया और अमेरिका ने इराक पर नियंत्रण कर लिया. सद्दाम हुसैन को पकड़ने और आखिर में फांसी दिए जाने के बाद, अमेरिका ने गठबंधन अंतरिम प्राधिकरण (CPA) की स्थापना की, जिसने इराक के पुनर्निर्माण और राजनीतिक परिवर्तन की देखरेख के लिए एक अस्थायी सरकार के रूप में कार्य किया.
अमेरिका ने इराक को कैसे चलाया?
अमेरिका द्वारा उठाए गए पहले कदमों में से एक था डी-बाथिफिकेशन. जो एक ऐसी नीति थी जिसका उद्देश्य सद्दाम हुसैन की बाथ पार्टी के सभी सदस्यों को सत्ता के पदों से हटाना था. हालांकि इसका लक्ष्य सद्दाम हुसैन के वफादारों के प्रभाव को समाप्त करना था, लेकिन इस नीति के कारण इराक की सेना का विघटन और हजारों कुशल पेशेवरों को सिविल सेवा से भी हटाया गया. कहा जाता है कि अमेरिका ने एक नए इराकी संविधान के निर्माण पर भी काम किया, जिसे 2005 में मंजूरी दी गई. इस संविधान ने एक संघीय संसदीय प्रणाली की स्थापना की और स्वतंत्रता और लोकतंत्र के अधिकारों का वादा किया.
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2005 में पहली बार हुए इराक में चुनाव
इराक में 2005 में पहले बहुदलीय चुनाव हुए, जो लोकतांत्रिक सरकार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम था. देश को आधिकारिक तौर पर 2004 में एक इराकी सरकार को सौंप दिया गया था, लेकिन अमेरिकी सेनाएं इराक में बनी रहीं और नवगठित सरकार को सुरक्षा, प्रशिक्षण और सहायता प्रदान करती रहीं. लोकतांत्रिक सरकार स्थापित करने के शुरुआती प्रयासों के बावजूद, इराक में आक्रमण के बाद का दौर विद्रोह, सांप्रदायिक हिंसा और आईएसआईएस जैसे चरमपंथी समूहों का उदय हुआ. 2007 में, राष्ट्रपति बुश ने व्यवस्था बहाल करने के लिए सैनिकों की संख्या बढ़ाने का आदेश दिया, जिससे देश के कुछ हिस्सों में अस्थायी रूप से स्थिरता आई. हालांकि, अमेरिकी सेना की वापसी के काफी समय बाद भी इराक में विद्रोह और हिंसक चरमपंथ का प्रकोप जारी रहा.
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