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अमेरिका-ईरान तनाव का भारत पर क्या होगा असर Photograph: (Social Media)
Iran Protest: ईरान में इनदिनों खामेनेई सरकार के खिलाफ भारी विरोध प्रदर्शन हो रहा है. पिछले साल दिसंबर के महीने में शुरू हुआ ये विरोध प्रदर्शन अब तक 100 से अधिक शहरों में पहुंच गया है. जो ईरान की सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है. वहीं इस विरोध प्रदर्शन में अमेरिका भी दखल दे रहा है और खामेनेई की सत्ता को उखाड़ फेंकने के लिए प्रदर्शनकारियों का समर्थन कर रहा है. माना जा रहा है कि 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद से देश में ये सबसे बड़ा विरोध प्रदर्शन है. विरोध प्रदर्शन और अमेरिकी दखल के चलते भारत के लिए चिंता बढ़ गई है. क्योंकि भारत और ईरान के बीच कई रणनीतिक और आर्थिक हित जुड़े हुए हैं.
जानें खामेनेई के खिलाफ क्यों सड़कों पर उतरे लोग?
बता दें कि ईरान में खामेनेई सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन की मुख्य वजह देश में आर्थिक समस्या और महंगाई है. इसके साथ ही ईरानी रियाल में भी भारी गिरावट देखने को मिल रही है. जिसके चलते देश में महंगाई, बेरोजगारी और खाने-पीने की चीजें बेहद महंगी हो गई हैं. इन सबके चलते सबसे पहले तेहरान के ग्रैंड बाजार में दुकानदारों ने हड़ताल शुरू कर दी.
इस हड़ताल ने धीरे-धीरे विशाल प्रदर्शन का रूप ले लिया. उसके बाद प्रदर्शनकारियों ने खामेनेई सरकार के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी. इस विरोध प्रदर्शन में बड़ी संख्या में महिलाओं और युवाओं ने भाग लिया. विरोध प्रदर्शन को कुचलने के लिए सुरक्षा बलों ने कार्रवाई की जिसमें सैकड़ों लोगों की जान चली गई.
भारतीय बासमती चावल की ईरान में सबसे ज्यादा मांग
भारत और ईरान के बीच लंबे समय से मजबूत रणनीतिक और व्यापारिक रिश्ते बने हुए हैं. इसी व्यापारिक रिश्ते के चलते भारत बड़ी तादात में ईरान को बासमती चावल का निर्यात करता था. ईरान भारत का सबसे बड़ा बासमती चावल खरीदार था, लेकिन अब हालात बदल गए हैं और ये गिरकर तीसरे नंबर पर आ गया है. जानकारों का कहना है कि अगर हालात नहीं सुधरे तो चावल निर्यात में और कमी आ सकती है.
यही नहीं ईरान में विरोध प्रदर्शन के चलते कई भारतीय चावल एक्सपोर्टर का पैसा भी ईरान में फंस गया है. इंडियन राइस एक्सपोर्टर फेडरेशन के मुताबिक, करीब 1500 करोड़ रुपये से ज्यादा का बासमती चावल बंदरगाहों पर अटका हुआ है. यानी ईरान में खामेनेई के खिलाफ जारी विरोध प्रदर्शन से भारत का चावल निर्यात कम हो सकता है. यानी ईरान में प्रदर्शन के चलते भारतीय किसानों पर भी इसका असर देखने को मिलेगा.
ईरान के हालातों के चलते आई चावल निर्यात में कमी
बता दें कि बासमती जैसे प्रीमियम चावल को कोई देश तभी खरीदता है जब वहां लोगों के पास उसे खरीदने का पैसा हो. लेकिन ईरान में पिछले कुछ सालों में हालात खराब हुए हैं जिसका असर भारतीय बासमती चावल के निर्यात पर देखने को मिला है. साल 2018-19 में भारत ने ईरान को अपने कुल चावल नियार्त का 33.03 चावल भेजा, जो 2019-20 में घटकर 28.45 फीसदी पर आ गया.
तब ईरान भारतीय बासमती चावल का सबसे बड़ा आयातक था. लेकिन उसके बाद इसमें लगातार गिरावट देखने को मिली. DGCIS के आंकड़ों को देखें तो साल 2018-19 में ईरान ने भारत से 14,83,697 मीट्रिक टन बासमती चावल खरीदा, जबकि 2019-20 में यह घटकर 13,19,156 पर आ गया. वहीं 2022-23 में इसमें और गिरावट आई और ये गिरकर सिर्फ 9,98,877 मीट्रिक टन रह गया. जबकि 2024-25 में ये गिरकर 8,55,133 मीट्रिक टन पर आ गया.
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इन भारतीय प्रोडक्ट्स पर भी पड़ेगा असर
भारत ईरान को सिर्फ चावल ही निर्यात नहीं करता बल्कि इसके अलावा चाय, कॉफी, ताजा फल, मसाले, डेयरी प्रोडक्ट्स, दालें और चीनी का भी निर्यात करता है. साल 2024-25 में भारत ने ईरान को करीब 11 हजार टन चाय का निर्यात किया था. ईरान में विरोध प्रदर्शन और अमेरिका के दखल के चलते भारत में इन सभी उत्पादों से जुड़े लोगों की चिंता भी बढ़ गई है.
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