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Photograph: (Photo- AI)
Explainer: ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी नौसेना ने बड़ा रणनीतिक कदम उठाया है. निमित्ज-क्लास सुपरकैरियर USS अब्राहम लिंकन (CVN-72) को दक्षिण चीन सागर से मिडिल ईस्ट की ओर रवाना किया गया है. हालांकि पेंटागन ने इसे रूटीन मूवमेंट नहीं, बल्कि एक स्ट्रैटेजिक डिटरेंस मिशन के तौर पर देखा है. जानकारों की मानें तो यह सिर्फ एक जहाज नहीं, बल्कि समुद्र पर तैरता हुआ एक 'अभेद्य किला' और 'विनाशकारी एयरबेस' है. आइए जानते हैं कि आखिर यह जहाज कितना ताकतवर है और ट्रंप ने इसे ईरान के लिए ही क्यों चुना है.
तैरता हुआ वायुसेना स्टेशन है USS अब्राहम लिंकन
USS अब्राहम लिंकन अमेरिकी नौसेना के निमित्ज-क्लास (Nimitz-class) का परमाणु ऊर्जा से चलने वाला एयरक्राफ्ट कैरियर है. इसकी ताकत का अंदाजा आप इसके विशालकाय आकार और घातक हथियारों से लगा सकते हैं.
ये सिर्फ एक युद्धपोत नहीं, बल्कि एक चलता-फिरता एयरबेस और पूर्ण युद्ध प्रणाली है. इसमें एक एयरक्राफ्ट कैरियर के साथ कई मिसाइल-लैस जहाज, पनडुब्बियां और सपोर्ट वेसल्स शामिल होते हैं. USS अब्राहम लिंकन कैरियर स्ट्राइक ग्रुप-3 (CSG-3) का हिस्सा है. इसके साथ Carrier एयरविंग9 (CVW-9) तैनात है.
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ग्रुप में कौन-कौन से जहाज और पनडुब्बियां?
इस कैरियर स्ट्राइक ग्रुप में शामिल हैं एक एयरक्राफ्ट कैरियर जिसका नाम है USS अब्राहम लिंकन. वहीं 3 से गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर्स (Arleigh Burke क्लास), इसके अलावा 1 से 2 न्यूक्लियर अटैक सबमरीन (Virginia या Los Angeles क्लास), 1 से 2 सपोर्ट शिप्स (तेल, हथियार और रसद आपूर्ति के लिए). यानी कुल मिलाकर यह एक ऐसा युद्ध समूह है जो हवा, समुद्र और पानी के नीचे तीनों मोर्चों पर एक साथ लड़ सकता है.
कितने सैनिक और कितनी एयर पावर?
इस ग्रुप में कुल 7,000 से 8,000 नौसैनिक और मरीन तैनात रहते हैं. अकेले कैरियर पर ही 5,000 से ज्यादा लोग होते हैं.
एयर विंग में करीब 65-70 लड़ाकू और सपोर्ट विमान शामिल हैं, जिनमें...
- F/A-18 Super Hornet
- F-35C स्टील्थ फाइटर
- EA-18G Growler (इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर)
- E-2D Hawkeye (रडार और निगरानी)
- MH-60 Seahawk हेलीकॉप्टर
बता दें कि ये विमान दिन-रात हमले, निगरानी और रक्षा तीनों काम कर सकते हैं.
मिसाइल और हथियारों की ताकत
इस ग्रुप के डिस्ट्रॉयर्स और पनडुब्बियों पर सैकड़ों टोमाहॉक क्रूज मिसाइलें तैनात होती हैं. माना जाता है कि पूरा ग्रुप मिलकर 500 से 1,000 से ज्यादा टोमाहॉक मिसाइलें दाग सकता है. इसके अलावा एयर-टू-एयर, एयर-टू-ग्राउंड मिसाइलें, स्मार्ट बम और एडवांस्ड एयर डिफेंस सिस्टम मौजूद हैं.
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USS अब्राहम लिंकन की प्रमुख विशेषताएं और ताकत
1. लंबाई और वजन: यह जहाज लगभग 1,092 फीट (332 मीटर) लंबा है. इसका वजन 1 लाख टन से भी ज्यादा है। यह इतना बड़ा है कि इसके डेक पर 4.5 एकड़ की खाली जगह है.
2. विमानों की फौज: इस जहाज पर एक साथ 85 से 90 लड़ाकू विमान और हेलिकॉप्टर तैनात किए जा सकते हैं. इसमें अत्याधुनिक F-35C लाइटनिंग II और F/A-18 सुपर हॉर्नेट जैसे विमान शामिल हैं.
3. परमाणु ऊर्जा: यह जहाज दो परमाणु रिएक्टरों से चलता है. इसका मतलब है कि इसे ईंधन भरने के लिए सालों तक किसी बंदरगाह पर रुकने की जरूरत नहीं है. यह बिना रुके 20 से 25 साल तक समुद्र में ऑपरेशन चला सकता है.
4. चालक दल: इस 'तैरते शहर' में करीब 5,600 से अधिक नौसैनिक और एयरक्रू सदस्य रहते हैं.
अगर ईरान से जंग हुई तो क्या असर पड़ेगा?
सैन्य विश्लेषकों के मुताबिक, यह ग्रुप अकेले ही ईरान को तबाह करने के लिए काफी है.
- नौसेना को भारी नुकसान
- मिसाइल बेस और कमांड सेंटर्स को तबाह
- होर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण कर सकता है
हालांकि ईरान के पास बैलिस्टिक मिसाइलें, ड्रोन और प्रॉक्सी मिलिशिया हैं, जो अमेरिकी ठिकानों और सहयोगियों के लिए खतरा बन सकते हैं.
डराने के लिए ताकत या युद्ध की तैयारी?
USS अब्राहम लिंकन की तैनाती को 'शो ऑफ फोर्स' माना जा रहा है. इसका मकसद सीधा संदेश देना है अगर हालात बिगड़े, तो अमेरिका पूरी ताकत से जवाब देगा. कई बार इतनी ताकत का प्रदर्शन ही युद्ध को रोकने का सबसे प्रभावी तरीका बन जाता है.
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