/newsnation/media/media_files/2026/01/14/iran-america-tension-2026-01-14-13-52-19.jpg)
Explainer: ईरान में भड़का जनआंदोलन अब सामान्य विरोध से आगे बढ़कर क्रांति जैसे हालात की ओर बढ़ता दिख रहा है. महंगाई, दमनकारी नीतियों और राजनीतिक स्वतंत्रता की कमी के खिलाफ शुरू हुआ यह आंदोलन 18वें दिन भी थमने का नाम नहीं ले रहा. इस बीच, सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के नेतृत्व वाला शासन प्रदर्शनकारियों पर अभूतपूर्व सख्ती बरत रहा है. मानवाधिकार संगठनों के मुताबिक, अब तक 2,000 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और 10,000 से अधिक को हिरासत में लिया गया है. यही नहीं ईरान में हो रहे प्रदर्शनों और सख्ती को लेकर लगातार अमेरिका भी ईरान पर दबाव बना रहा है.
यहां तक की जंग की चेतावनी भी दी जा चुकी है. लेकिन खामेनेई हैं कि मानते ही नहीं. देश में तख्तापलट का खतरा मंडरा रहा है. बावजूद खामेनेई अपनी अकड़ में दनादन फैसले ले रहे हैं. प्रदर्शनकारी इरफान सुल्तानी को सरेआम फांसी देने का उनका फैसला कहीं ईरान में तख्तापलट के लिए ताबूत में अंतिम कील की तरह साबित न हो.
कौन है इरफान सुल्तानी, एक नाम जो आंदोलन का प्रतीक बन गया
इन हिंसक हालातों के बीच 26 वर्षीय इरफान सुल्तानी का मामला अंतरराष्ट्रीय ध्यान का केंद्र बन गया है. मध्य ईरान के फार्दिस में कपड़ों की दुकान चलाने वाले सुल्तानी को 8 जनवरी को शासन-विरोधी प्रदर्शन में शामिल होने के आरोप में उनके घर से गिरफ्तार किया गया था. महज कुछ दिनों के भीतर उन पर ‘मोहारेबेह’ (अल्लाह के खिलाफ युद्ध छेड़ना) का आरोप लगाया गया और मौत की सजा सुना दी गई.
मानवाधिकार समूहों का कहना है कि हालिया आंदोलन के दौरान सुल्तानी पहले व्यक्ति हो सकते हैं जिन्हें सार्वजनिक रूप से फांसी दी जाए. रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्हें बीच चौराहे पर फांसी दिए जाने की आशंका है जिसका उद्देश्य प्रदर्शनकारियों में डर फैलाना बताया जा रहा है. लेकिन इसकी हर स्तर पर आलोचना हो रही है.
/filters:format(webp)/newsnation/media/media_files/2026/01/14/iran-info-graphic-2026-01-14-13-40-15.jpg)
अंतरराष्ट्रीय दबाव और अलगाव
सुल्तानी को फांसी दिए जाने की वैश्विक स्तर पर निंदा हो रही है. यदि पश्चिमी देश ईरान पर और कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाते हैं, तो ईरान की अर्थव्यवस्था और चरमरा जाएगी. इतिहास गवाह है कि आर्थिक बदहाली अक्सर तख्तापलट या क्रांतियों का आधार बनती है.
सत्ता के भीतर दरार
ऐसी फांसी की घटनाओं के बाद अक्सर सत्ताधारी ढांचे (जैसे कि रिवोल्यूशनरी गार्ड्स या धार्मिक नेतृत्व) के भीतर असंतोष पनपने लगता है. यदि सुरक्षा बलों का एक हिस्सा जनता के साथ खड़ा हो जाए या नेतृत्व के फैसलों से असहमत हो जाए, तो तख्तापलट की संभावना बढ़ जाती है.
प्रतीकात्मक चेहरा
दरअसल इरफान सुल्तानी अब केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि शासन के खिलाफ 'प्रतिरोध का प्रतीक' बन चुके हैं. जब किसी आंदोलन को एक 'शहीद' मिल जाता है, तो उसे दबाना शासन के लिए और अधिक कठिन हो जाता है.
न्याय प्रक्रिया पर गंभीर सवाल
ब्रिटिश अखबार द गार्जियन के अनुसार, 11 जनवरी को सुल्तानी की एक संक्षिप्त सुनवाई हुई, जिसके बाद उन्हें मौत की सजा सुना दी गई. परिवार को बताया गया है कि फांसी से पहले उन्हें सिर्फ 10 मिनट की अंतिम मुलाकात की अनुमति मिलेगी.
हेंगॉव ऑर्गनाइजेशन फॉर ह्यूमन राइट्स की सदस्य अरिना मोरादी के अनुसार, सुल्तानी को कानूनी सलाह, बचाव का अधिकार और केस फाइल तक पहुंच जैसे बुनियादी अधिकारों से वंचित रखा गया है. परिवार का कहना है कि इरफान कभी राजनीतिक कार्यकर्ता नहीं थे वह सिर्फ अपनी पीढ़ी की आवाज़ बने थे.
परिवार की पीड़ा और कानूनी जद्दोजहद
परिवार के करीबी सूत्रों के मुताबिक, गिरफ्तारी के चार दिन बाद ही मौत की सजा की जानकारी दे दी गई थी. सुल्तानी की बहन, जो एक लाइसेंस प्राप्त वकील हैं, कानूनी रास्तों से लड़ाई लड़ने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन उन्हें केस दस्तावेज़ों तक पहुंच नहीं दी जा रही. यह स्थिति ईरान की न्यायिक पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्न खड़े करती है.
अमेरिका की चेतावनी और अंतरराष्ट्रीय दबाव
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि ईरान प्रदर्शनकारियों को फांसी देना शुरू करता है तो अमेरिका कड़ा जवाब देगा. ट्रंप पहले ही प्रदर्शनकारियों को समर्थन का संदेश दे चुके हैं. विश्लेषकों का मानना है कि यदि सुल्तानी को सरेआम फांसी दी जाती है, तो आंदोलन धीमा नहीं, बल्कि और तेज हो सकता है और इससे ईरान पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ेगा.
ईरान का पलटवार और क्षेत्रीय तनाव
ईरान के राष्ट्रीय सुरक्षा प्रमुख अली लारीजानी ने ट्रंप की धमकी पर पलटवार करते हुए आरोप लगाया है कि ट्रंप और इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ईरान में हिंसा के लिए जिम्मेदार हैं. यह बयान क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा सकता है.
आगे क्या? एक फांसी, कई परिणाम
इरफान सुल्तानी की संभावित फांसी सिर्फ एक व्यक्ति का मामला नहीं रह गया है. यह ईरान के आंदोलन का टर्निंग पॉइंट बन सकती है या तो शासन डर के जरिए नियंत्रण मजबूत करेगा, या फिर यह कदम खामेनेई शासन के अंत की शुरुआत साबित हो सकता है. फिलहाल, ईरान की सड़कों पर गूंजता गुस्सा और अंतरराष्ट्रीय नजरें दोनों एक निर्णायक मोड़ की ओर इशारा कर रही हैं.
यह भी पढ़ें - Explainer: अमेरिका–ईरान युद्ध की आशंका, जानें ऐसे हालात में किसके साथ होगा कौन सा देश?
/newsnation/media/agency_attachments/logo-webp.webp)
Follow Us