Explainer: अमेरिका–ईरान युद्ध की आशंका, जानें ऐसे हालात में किसके साथ होगा कौन सा देश?

Explainer: मध्य पूर्व में तनाव जब भी चरम पर पहुंचता है, दुनिया की नजरें अमेरिका और ईरान पर टिक जाती हैं. दोनों देशों के बीच दशकों से चला आ रहा टकराव किसी भी वक्त युद्ध में बदल सकता है.

Explainer: मध्य पूर्व में तनाव जब भी चरम पर पहुंचता है, दुनिया की नजरें अमेरिका और ईरान पर टिक जाती हैं. दोनों देशों के बीच दशकों से चला आ रहा टकराव किसी भी वक्त युद्ध में बदल सकता है.

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Dheeraj Sharma
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America Iran War

Explainer: मध्य पूर्व में तनाव जब भी चरम पर पहुंचता है, दुनिया की नजरें अमेरिका और ईरान पर टिक जाती हैं. दोनों देशों के बीच दशकों से चला आ रहा टकराव किसी भी वक्त युद्ध में बदल सकता है. जुबानी जंग और चेतावनी के बीच अब सबकी निगाहें भी दोनों देशों में संभावित युद्ध पर टिकी हुई हैं. लेकिन यह सिर्फ दो देशों की लड़ाई नहीं होगी, बल्कि इसमें कई क्षेत्रीय और वैश्विक शक्तियां शामिल हो सकती हैं. सवाल यही है कि अगर अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध हुआ, तो कौन सा देश किसके साथ खड़ा होगा?

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अमेरिका बनाम ईरान, संघर्ष की पृष्ठभूमि

अमेरिका और ईरान के रिश्ते 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद से तनावपूर्ण रहे हैं. ईरान का परमाणु कार्यक्रम, इजरायल को लेकर उसकी नीति, खाड़ी क्षेत्र में प्रभाव बढ़ाने की कोशिश और अमेरिका के सैन्य ठिकानों पर ईरान समर्थित गुटों के हमले- ये सभी कारण दोनों देशों को बार-बार टकराव के करीब ले आते हैं.

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अमेरिका के साथ खड़े हो सकते हैं ये देश

1. इजरायल

इजरायल अमेरिका का सबसे करीबी रणनीतिक सहयोगी है. वह ईरान को अपने अस्तित्व के लिए सबसे बड़ा खतरा मानता है. ईरान समर्थित हिज्बुल्लाह और हमास पहले से ही इज़रायल के खिलाफ सक्रिय हैं. ऐसे में किसी भी युद्ध में इजरायल का अमेरिका के साथ खड़ा होना लगभग तय माना जाता है.

2. नाटो के कुछ देश

ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी जैसे नाटो देश अमेरिका को कूटनीतिक और तकनीकी समर्थन दे सकते हैं. हालांकि, यूरोपीय देश सीधे युद्ध में उतरने से बचना चाहेंगे और उनकी भूमिका खुफिया जानकारी, लॉजिस्टिक्स या समुद्री सुरक्षा तक सीमित रह सकती है.

3. खाड़ी क्षेत्र के देश

सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और बहरीन जैसे देश ईरान को क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्वी मानते हैं. इन देशों में अमेरिका के सैन्य अड्डे मौजूद हैं. हालांकि, ये देश खुलकर युद्ध में शामिल होने से पहले अपने आर्थिक और आंतरिक सुरक्षा हितों पर विचार करेंगे.

ईरान के साथ खड़े हो सकते हैं ये देश और गुट

1. रूस

रूस और ईरान के बीच रणनीतिक साझेदारी है, खासकर सीरिया जैसे मुद्दों पर। रूस अमेरिका का विरोधी भी माना जाता है. युद्ध की स्थिति में रूस ईरान को कूटनीतिक समर्थन, हथियार और खुफिया मदद दे सकता है, हालांकि सीधे सैन्य हस्तक्षेप की संभावना कम है.

2. चीन

चीन ईरान से ऊर्जा आपूर्ति और व्यापारिक रिश्तों के कारण जुड़ा हुआ है. वह अमेरिका के खिलाफ वैश्विक संतुलन चाहता है. चीन सैन्य रूप से नहीं, बल्कि आर्थिक और कूटनीतिक स्तर पर ईरान के पक्ष में खड़ा हो सकता है.

3. ईरान के समर्थित गुट (प्रॉक्सी फोर्स)

ईरान की सबसे बड़ी ताकत उसके समर्थित गैर-सरकारी सशस्त्र गुट हैं:

-हिज़्बुल्लाह (लेबनान)

- हूती विद्रोही (यमन)

- इराक और सीरिया में शिया मिलिशिया

- हमास (अप्रत्यक्ष समर्थन)

ये गुट इजरायल, अमेरिका और उसके सहयोगियों पर कई मोर्चों से हमला कर सकते हैं.

मध्यस्थ की भूमिका निभाने वाले देश

- भारत

भारत के अमेरिका और ईरान दोनों से अच्छे संबंध हैं. युद्ध की स्थिति में भारत शांति, कूटनीति और अपने नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देगा. भारत खुलकर किसी भी पक्ष का समर्थन करने से बचेगा.

- तुर्की और कतर

ये देश मध्यस्थ की भूमिका निभा सकते हैं. तुर्की नाटो सदस्य होते हुए भी ईरान से संवाद बनाए रखता है, जबकि कतर पहले भी अमेरिका-ईरान के बीच संदेशवाहक की भूमिका निभा चुका है.

युद्ध हुआ तो दुनिया पर क्या असर पड़ेगा?

अगर अमेरिका-ईरान युद्ध होता है, तो इसके असर वैश्विक होंगे:

- तेल की कीमतों में भारी उछाल

- होरमुज़ जलडमरूमध्य में संकट, जहां से दुनिया का बड़ा हिस्सा तेल सप्लाई होता है

- वैश्विक बाजारों में अस्थिरता

- भारत सहित कई देशों की अर्थव्यवस्था पर दबाव

पूरी दुनिया को झकझोर सकता है अमेरिका-ईरान युद्ध

अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध की स्थिति में दुनिया साफ तौर पर दो गुटों में बंट सकती है. एक तरफ अमेरिका, इजरायल और कुछ खाड़ी व पश्चिमी देश होंगे, तो दूसरी ओर ईरान, उसके समर्थित गुट और रूस-चीन का परोक्ष समर्थन. यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस टकराव को युद्ध में बदलने से रोकने के लिए लगातार कूटनीतिक प्रयास करता रहा है, क्योंकि इसका असर पूरी दुनिया को झकझोर सकता है. 

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