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PM Modi गरवी गुजरात से नए भारत तक का सफर... 'अग्निपथ से राजपथ'

Written By : निहार रंजन सक्सेना | Edited By : Nihar Saxena | Updated on: 07 Oct 2022, 05:13:09 PM
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7 अक्टूबर को प्रधानमंत्री के सार्वजनिक जीवन के 21 साल पूरे. (Photo Credit: न्यूज नेशन)

highlights

  • पीएम मोदी ने हिंदू जड़ों को अपनाकर धर्म को भारतीय राजनीति का अभिन्न अंग बनाया
  • ट्विटर, इंस्टाग्राम और फेसबुक प्लेटफॉर्म पर पीएम नरेंद्र मोदी के सबसे ज्यादा फॉलोअर्स
  • मई 2014 से अब तक 51 राज्यों में विधानसभा चुनाव हुए, जिनमें से बीजेपी ने 26 जीते

नई दिल्ली:  

आज अक्टूबर महीने की 7 तारीख है. आप पूछ सकते हैं तो इसमें खास बात क्या है... हर महीने 7 तारीख आती है. खास यह है कि ठीक 21 साल पहले 51 साल की उम्र में 7 अक्टूबर 2001 को नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने गुजरात के मुख्यमंत्री पद की पहली बार शपथ ली थी. इस लिहाज से आज 7 तारीख को बतौर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) को सार्वजनिक जीवन में संवैधानिक पद संभालते हुए 21 साल हो गए. नरेंद्र मोदी 12 साल 227 दिनों तक गुजरात के मुख्यमंत्री रहे, जो गुजरात (Gujarat) के मुख्यमंत्री बतौर सबसे लंबा कार्यकाल है. चलिए एक बार पीएम मोदी के संवैधानिक पदों को आंकड़ों में देखते हैं. अगर नरेंद्र मोदी के गुजरात के मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के कार्यकाल को मिला लिया जाए, तो वह निर्वाचित सरकार के सबसे लंबे समय तक सेवा करने वालों में से एक हैं. कुल मिलाकर आज 7 अक्टूबर तक पीएम नरेंद्र मोदी ने 7,670 दिनों के लिए चुनी हुई सरकार के मुखिया का पद संभाला है. 22 मई 2014 तक 4,610 दिन गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में और प्रधानमंत्री के रूप में 3,660 दिन. प्रधानमंत्री के रूप में लंबे समय तक सेवा करने वालों में पीएम नरेंद्र मोदी से आगे पंडित जवाहर लाल नेहरू (Jawaharlal Nehru), इंदिरा गांधी (Indira Gandhi) और मनमोहन सिंह (Manmohan SIngh) ही हैं. पंडित नेहरू 6,130 दिनों तक पीएम रहे, इंदिरा गांधी 5,829  दिनों तक और मनमोहन सिंह 3,656 दिनों तक. जिस समय पीएम मोदी का 29 मई 2024 को दूसरा कार्यकाल समाप्त होगा, वह पीएमओ में रहते हुए मनमोहन सिंह को पीछे छोड़ देंगे. पंडित नेहरू और इंदिरा गांधी को पीछे छोड़ने के लिए उन्हें मार्च 2031 के बाद तक प्रधानमंत्री रहना होगा. हालांकि पीएम नरेंद्र मोदी को एक चीज इंदिरा गांधी और मनमोहन सिंह से आगे खड़ा करती है और वह यह है कि उन्होंने अभी तक एक भी चुनाव हारा नहीं है. यहां वे देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू के समकक्ष खड़े नजर आते हैं. इंदिरा गांधी ने 1977 में चुनाव हारा था, तो मनमोहन सिंह 1999 में दक्षिण दिल्ली से लोकसभा चुनाव हार गए थे. जाहिर है इन 21 सालों में सार्वजनिक जीवन के निर्वाचित पदाधिकारी के रूप में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वैश्विक स्तर पर सबसे लोकप्रिय नेताओं में से एक बन चुके हैं. इसके साथ ही उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (BJP) को चुनाव जीतने वाली मशीन में बदल कर रख दिया है. उन्होंने खुले तौर पर अपनी हिंदू (Hindutva) जड़ों को अपनाकर धर्म को भारतीय राजनीति का अभिन्न अंग बना दिया है. भले ही विपक्ष उन्हें थामने के लिए तमाम हथकंडे अपना रहा हो, पीएम नरेंद्र मोदी ने एक भरोसेमंद जननेता के रूप में अपनी स्थिति मजबूत कर चुके हैं. 

सबसे ज्यादा फॉलोअर्स रखने वाले सक्रिय राजनेता
अगर सोशल मीडिया को लोकप्रियता का पैमाना माना जाए तो पीएम नरेंद्र मोदी आज वास्तव में दुनिया के सबसे लोकप्रिय नेताओं में से एक हैं. उनकी ट्विटर, इंस्टाग्राम और फेसबुक की संयुक्त सोशल मीडिया फॉलोइंग 200 मिलियन के करीब है. इंडोनेशिया के राष्ट्रपति जोको विडोडो  76.5 मिलियन सोशल मीडिया फॉलोइंग के साथ भारी अंतर के बीच दूसरे स्थान पर आते हैं. अगर हम अच्छी-खासी सोशल मीडिया फॉलोइंग रखने वाले भूतपूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और बराक ओबामा की गिनती कर लें , तो भी पीएम मोदी सोशल मीडिया पर फॉलो किए जाने वाले दूसरे नेता हैं. बराक ओबामा के संयुक्त फॉलोअर्स की संख्या 223.4 मिलियन के करीब है. यही नहीं, वर्तमान में राष्ट्राध्यक्षों के रूप में सार्वजनिक जीवन जी रहे पांच सबसे अधिक फॉलो किए जाने वाले वैश्विक नेताओं की चर्चा करें, तो भी ट्विटर, इंस्टाग्राम और फेसबुक प्लेटफॉर्म पर पीएम मोदी के सबसे ज्यादा फॉलोअर्स हैं. 

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पीएम मोदी सर्वाधिक लोकप्रिय वैश्विक नेता
अमेरिकी फर्म मॉर्निंग कंसल्ट के 6 से 13 सितंबर के बीच कराए गए सर्वेक्षण में पीएम नरेंद्र मोदी 75 फीसदी की अप्रूवल रेटिंग के साथ विश्व के सर्वाधिक लोकप्रिय नेता बनकर उभरे हैं. रोचक बात यह है कि पीएम मोदी 70 फीसदी से अधिक अप्रूवल रेटिंग हासिल कर लगातार कई हफ्तों से वैश्विक स्तर पर लोकप्रिय नेताओं के क्रम में शीर्ष पर बने हुए हैं. सर्वेक्षण बताता है कि जब कोरोना संक्रमण ने दुनिया भर को अपनी चपेट में लिया हुआ था, तब अप्रैल-मई 2020 के बीच पीएम नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता 84 फीसदी अप्रूवल रेटिंग के साथ चरम पर थी. हालांकि 2021 में कोरोना की दूसरी लहर के दौरान केंद्र सरकार की जबर्दस्त आलोचना के बीच उनकी अप्रूवल रेटिंग 63 फीसदी के सबसे निचले स्तर पर थी. इसके बाद से तो पीएम नरेंद्र मोदी की अप्रूवल रेटिंग 74 फीसदी या इससे अधिक बनी हुई है और इस कारण वह वैश्विक स्तर पर लोकप्रिय नेताओं में शीर्ष पर बने हुए हैं. उनके बाद मैक्सिको के राष्ट्रपति आंद्रे मैनुएल लोपेज ओब्राडोर का नंबर आता है, जो दूसरे पायदान पर हैं. 

वैश्विक भ्रमण करने वाले पीएम
वैश्विक नेताओं से गर्मजोशी से गले मिलना और उनके संग आमजनों खासकर प्रवासी भारतीयों से आत्मीयता से मिलने-जुलने की शैली से पीएम मोदी के विदेश दौरे अब तक के कार्यकाल की पहचान रहे हैं. प्रधानमंत्री के रूप में पीएम नरेंद्र मोदी अब तक  60 देशों के 112 विदेश दौरे कर चुके हैं. उनकी तुलना में पूर्ववर्ती पीएम मनमोहन सिंह ने अपने दो कार्यकाल में 73 विदेश दौरे किए थे. यह आंकड़ा अभी और दूर तक जाएगा, क्योंकि बतौर प्रधानमंत्री मोदी के कार्यकाल के दो साल अभी भी बाकी हैं. प्रधानमंत्री के रूप में पीएम मोदी ने सबसे ज्यादा 7 बार अमेरिका का दौरा किया है. इसके बाद जर्मनी का नंबर आता है, जहां पीएम मोदी आधा दर्जन बार गए. फ्रांस, रूस और चीन पीएम मोदी पांच बार गए. पीएम पद के दूसरे साल यानी 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 28 देशों का दौरा किया, जो एक साल के लिहाज से सबसे ज्यादा है. 2020 के कोरोना संक्रमण के बाद पीएम मोदी के विदेश दौरे कुछ कम हो गए हैं. इस साल वह अपने 72वें जन्मदिन से कुछ घंटे पहले उजबेकिस्तान से शंघाई सहयोग संगठन की बैठक में भाग लेकर लौटे. वहां उनकी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की मुलाकात अंतरराष्ट्रीय सुर्खियां बनीं.

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भीड़ जुटाने वाले बीजेपी के सबसे बड़े नेता
अपने वक्तृत्व कौशल और भीड़ को मंत्रमुग्ध कर देने की क्षमता की बदौलत पीएम नरेंद्र मोदी आज देश के सबसे भरोसेमंद राजनेता हैं. भारतीय जनता पार्टी को चुनाव दर चुनाव इसका बहुत फायदा भी मिला है. 2014 में मोदी ने अपने चुनाव प्रचार की अगुवाई खुद की. नतीजतन 1984 के बाद पूर्ण बहुमत के साथ केंद्र में सरकार बनाने वाली भारतीय जनता पार्टी पहली गैर कांग्रेसी पार्टी बन कर उभरी. 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने 37.36 फीसदी वोट हासिल कर 303 सीटों पर जीत दर्ज की. बीते सालों में हुए लगभग हर चुनाव में पीएम मोदी के 'एक्स फैक्टर' रहते हुए बीजेपी का चुनाव परिणामों पर दबदबा कायम रहा. 2014 से देश में हुए आधे से ज्यादा विधानसभा चुनावों में बीजेपी ने जीत हासिल की है, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, हरियाणा और लगभग पूरे उत्तर भारत में बीजेपी का विजयी अभियान जारी रहा. आंकड़ों की भाषा में बात करें तो मई 2014 से अब तक 51 राज्यों में विधानसभा चुनाव हुए, जिनमें से बीजेपी ने 26 जीते. बीजेपी की राष्ट्रीय प्रतिद्वंद्वी पार्टी कांग्रेस को महज 9 राज्यों में ही जीत मिली. 

हिंदू जड़ों से जुड़ाव
बीते तमाम सालों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक ऐसा राजनेता बन कर सामने आए हैं, जिन्हें सार्वजनिक स्तर पर हिंदू रीति-रिवाज के तहत पूजा-पाठ करने में कभी कतई कोई संकोच नहीं रहा. 2014 में पहली बार प्रधानमंत्री बनने के बाद पीएम मोदी सीधे वाराणसी जाकर गंगा आरती में भाग लेते हैं. इस संक्षिप्त धार्मिक दौरे ने आने वाले सालों की आधारशिला रख मार्ग प्रशस्त कर दिया था. पीएम मोदी हिंदुत्व के प्रतीकों को अपने साथ लेकर चलने वाले नेता हैं. केदारनाथ की पवित्र गुफा में ध्यान साधना हो या फिर अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का शिलान्यास पीएम मोदी सार्वजनिक रूप से अपनी धार्मिक पहचान दिखाने में काफी सक्रिय रहे हैं. पीएम मोदी के देश के कई प्राचीन मान्यता प्राप्त मंदिरों में दर्शन करने जाने से हिंदू वोट बैंक मजबूत हुआ है. इसने पीएम मोदी की छवि 'गर्वित हिंदू' की बनाई है, जो अपने धर्म का जश्न मनाने से नहीं चूकता. 

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बीजेपी में भी 'सबका साथ सबका विकास'
राजनीतिक नेता के रूप में पीएम मोदी के बल पर ही भारतीय जनता पार्टी ने अपना भी कायाकल्प किया. मूलतः 'ब्राह्मण-बनिया' की पार्टी मानी जाने वाली बीजेपी आज एक ऐसी पार्टी में बदल चुकी है, जो हाशियों पर रहने वाले समुदायों को भी अधिक से अधिक प्रतिनिधित्व देती है. केंद्र में सत्ता में रहते हुए बीते आठ सालों में बीजेपी ने अपना सामाजिक दायरा बढ़ाकर अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) और दलित नेताओं से लेकर जनजातीय समुदाय के नेताओं को अपने भीतर समाहित कर लिया है. जून 2020 में पीएम मोदी ने पार्टी कार्यकर्ताओं को वीडियो से जरिये संबोधित करते हुए कहा था कि लोकसभा में बीजेपी का प्रतिनिधित्व 113 ओबीसी, एसटी के 43 और एससी के 52 सांसद कर रहे हैं. इसका अर्थ यह निकला कि लोकसभा में बीजेपी के 37.2 फीसदी सांसद ओबीसी, 14.1 फीसदी एसटी और 17.4 फीसदी एससी से हैं. बीते साल केंद्रीय मंत्रिमंडल के विस्तार के समय भी पीएम मोदी ने 27 ओबीसी मंत्री बनाए, जिनमें से पांच को कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया गया. पीएम मोदी के मंत्री यादव, गुर्जर, जाट, ठाकोर, लोध आदि जातियों का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं. मंत्रिमंडल में 12 एससी और 8 एसटी मंत्री भी हैं. मोदी सरकार मंत्रिमंडल के इस रूप-स्वरूप को 'इंद्रधनुष परिषद' की संज्ञा देती है, जो हालिया भारतीय राजनीति इतिहास में तो देखने में नहीं आया. जाहिर है सावधानीपूर्वक संतुलन से साधे गए जातिगत समीकरणों के बल पर बीजेपी उन राज्यों में भी चुनावी सफलता का स्वाद चखने में सफल रही, जहां संबंधित समुदाय बड़ी भूमिका निभाते हैं. 

पीएम मोदी का संक्षिप्त नारों और विशिष्ट सांकेतिक शब्दावली से प्यार
प्रगति, जाम, उदय, उड़ान, पंच प्राण, 5पी, लाइफ मूवमेंट, एके-49, आरएसवीपी... पीएम मोदी के संक्षिप्त नारों और विशिष्ट सांकेतिक शब्दावली से भारतीय अब भली-भांति परिचित हो चुके हैं. प्रधानमंत्री का पदभार संभालने के बाद से पीएम मोदी ने दर्जनों संक्षिप्त सांकेतिक शब्दावली और नारे गढ़े हैं. इनके जरिये जहां एक तरफ वे केंद्र सरकार की प्रमुख योजनाओं को पेश करते रहे, वहीं दूसरी तरफ अपने विरोधियों पर तीखा निशाना भी साधते रहे. उदाहरण के तौर पर 2017 में पीएम मोदी ने आमजन के लिए हवाई यात्रा किफायती बनाने के लिए क्षेत्रीय संपर्क योजना UDAN शुरू की, जिसका विस्तार से अर्थ निकलता था 'उड़े देश का आम नागरिक'. पीएम मोदी ने बिजली क्षेत्र को संकट से उबारने के लिए UDAY 'उज्जवल डिस्कॉम एश्योरेंस योजना' लांच की. फिर वह जलवायु के अनुकूल व्यवहार को अपनाने के लिए 'लाइफस्टाइल फॉर द एनवॉयरमेंट' LiFE आंदोलन लेकर आए. यही नहीं, पीएम मोदी ने देश के पुलिस बल को SMART बनाने का आह्वान किया, जिसका विस्तार से अर्थ निकलता था, 'स्ट्रिक्ट एंड सेंसटिव, मॉर्डन एंड मोबाइल, अलर्ट एंड अकाउंटेबल, रिलायबल एंड रिसपांसिव समेत टेक्नो-सेवी एंड ट्रैंड'. हिंदी में SMART की पूर्ण व्याख्या का अर्थ होता है सख्त और संवेदनशील, आधुनिक और मोबाइल, सतर्क और जवाबदेह, विश्वसनीय और उत्तरदायी समेत तकनीकी-प्रेमी और प्रशिक्षित. नए भारत के विजन को साकार करने के लिए उन्होंने 5Ps का फॉर्मूला पेश किया, जिसका मतलब निकलता है प्रदर्शन (परफॉर्मेंस), प्रक्रिया (प्रोसेस), व्यक्तित्व (पर्सोना), खरीद (प्रोक्योरमेंट) और तैयारी (प्रिपेयर). यही नहीं, पीएम मोदी ने अपनी संक्षिप्त सांकेतिक शब्दावली से अपने विरोधियों पर भी तीखा निशाना साधा. उदाहरण के तौर अरविंद केजरीवाल की दिल्ली में 49 दिन की सरकार पर तंज कसते हुए पीएम मोदी ने 'AK-49' शब्द गढ़ा. गांधी परिवार को निशाना बनाते हुए 'RSVP' को उन्होंने अपने कटाक्ष बतौर पेश किया, जिससे उनका आशय था, 'राहुल, सोनिया, वाड्रा और प्रियंका'.  इसी तरह उन्होंने 2019 से पहले विपक्षी दलों की एकजुटता का मजाक बनाते हुए 'महागठबंधन' को 'महमिलावट' करार दिया. 

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पीएम मोदी ने कई चीजें कीं पहली बार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अब तक का आठ वर्ष के कार्यकाल में कुछ बातें पहली बार हुईं, जो भविष्य के लिए सुनहरी यादें बन चुकी हैं. मसलन...

  • 2014 में प्रधानमंत्री पद के शपथ ग्रहण समारोह में सार्क देशों के राष्ट्राध्यक्षों को निमंत्रित करने वाले वह पहले भारतीय पीएम बने.
    पीएम मोदी ने जनवरी 2015 में बराक ओबामा को भारतीय गणतंत्र दिवस पर मुख्य अतिथि बतौर निमंत्रित किया. यह पहली बार था कि भारतीय प्रधानमंत्री किसी अमेरिकी राष्ट्रपति की गणतंत्र दिवस पर मेजबानी कर रहे थे.
  • जुलाई 2017 में इजरायल की यात्रा करने वाले नरेंद्र मोदी भारत के पहले प्रधानमंत्री बने. इस दौरे को कई विश्लेषकों ने इजरायल पर भारत के बदली स्थिति बतौर निरूपित किया.
  • 2018 में भी वह फिलीस्तीन की यात्रा करने वाले वह पहले भारतीय प्रधानमंत्री रहे.
  • बीते साल ही वह पहले भारतीय प्रधानमंत्री थे, जिसने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक की अध्यक्षता की. 

पीएम मोदी को वैश्विक सम्मान

  • 2019 में रूस ने उन्हें अपने सर्वोच्च सम्मान 'ऑर्डर ऑफ सेंट एंड्रयु द अपोज्ल' सम्मान से नवाजा. इसी साल संयुक्त अरब अमीरात ने उन्हें सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार 'ऑर्डर ऑफ जाएद' प्रदान किया.
  • 2020 में पीएम मोदी को तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी सेना के शीर्ष सेना अवार्ड 'द लीजन ऑफ मेरिट' से सम्मानित किया.  
  • 2021 में टाइम पत्रिका ने पीएम मोदी को दुनिया के 100 प्रभावशाली लोगों की सूची में शामिल किया.

First Published : 07 Oct 2022, 05:10:41 PM

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