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लद्दाख और सिक्किम सीमा पर भारत-चीन में तनाव बरकरार, इस बार ड्रैगन ने कर दी गलती

पश्चिमी कमान की लद्दाख (Ladakh) और सिक्किम (Sikkim) सीमा पर चीन-भारत की सेना आमने-सामने हैं. दोनों के बीच तनाव बरकरार है.

News Nation Bureau | Edited By : Nihar Saxena | Updated on: 22 May 2020, 01:23:16 PM
Indo China border Tension

पीएम मोदी को हल्का आंक ड्रैगन कर बैठा भारी चूक. (Photo Credit: न्यूज नेशन)

highlights

  • लद्दाख और सिक्किम सीमा पर चीन-भारत की सेना आमने-सामने हैं.
  • इस साल वास्तविक नियंत्रण रेखा के पार 170 चीनी मूवमेंट देखे गए.
  • भारतीय सेना भी पीछे हटने के बजाय आक्रामक तौर पर डटी.

नई दिल्ली:

कोरोना संक्रमण (Corona Virus) के दौर में आक्रामक विस्तार वाली नीतियों पर चलते हुई चीन (China) ने एक बार फिर पाकिस्तान और नेपाल के रास्ते भारत को पीछे से घेरने की कोशिश शुरू कर दी है. इसके साथ ही सीधे-सीधे भारत को चुनौती देने के लिए सीमा का अतिक्रमण जारी रखा है. फिलहाल पश्चिमी कमान की लद्दाख (Ladakh) और सिक्किम (Sikkim) सीमा पर चीन-भारत की सेना आमने-सामने हैं. दोनों के बीच तनाव बरकरार है. हालांकि स्थानीय स्तर पर अधिकारियों से बातचीत कर तनाव दूर करने की कोशिशें जरूर हो रही हैं, लेकिन कूटनीतिक स्तर पर दोनों देशों के बीच इस मसले पर कोई चर्चा नहीं हुई है. हालांकि भारत ने भी अपनी कूटनीति के जरिए चीन को घेरने के लिए संयुक्त राष्ट्र (United Nations) में अपनी सरगर्मियां तेज कर दी हैं. दोनों देशों के बीच तनाव का आलम यह है कि इस साल के पहले चार महीनों में आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, वास्तविक नियंत्रण रेखा के पार 170 चीनी मूवमेंट देखे गए. अकेले लद्दाख में 130 मूवमेंट हुए.

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इस साल अब तक चीनी सेना के 170 मूवमेंट
भारत और चीन के बीच गैर चिह्नित सीमा पर उत्तर सिक्किम और लद्दाख के पास कई इलाकों में तनाव बढ़ता जा रहा है. दोनों पक्ष वहां अतिरिक्त बलों की तैनाती कर रहे हैं. आधिकारिक आंकड़ों से पता चलता है कि लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर भारत के क्षेत्र में चीनी सैनिकों का मूवमेंट बढ़ा है. भारत ने भी डेमचक, दौलत बेग ओल्डी, गलवान नदी और लद्दाख में पैंगोंग सो झील के पास संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त सैनिकों की तैनाती की है. वास्तविक नियंत्रण रेखा के पार 170 चीनी मूवमेंट देखे गए. अकेले लद्दाख में 130 मूवमेंट हुए. बीते साल इसी अवधि के दौरान लद्दाख में ऐसे सिर्फ 110 मूवमेंट देखे गए थे.

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हर साल आक्रामक रवैया अपनाता रहा ड्रैगन
साल 2019 में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग बिश्केक और महाबलीपुरम में मिले थे, उस दौरान लद्दाख में भी चीनी सैनिकों के मूवमेंट में 75 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी. वहीं, साल 2018 में एलएसी के पार 284 मूवमेंट देखे गए. 2015 के बाद से आंकड़ों को देखें, तो कुल मूवमेंट का लगभग तीन-चौथाई वास्तविक नियंत्रण रेखा के पश्चिमी क्षेत्र में हुआ है, जो लद्दाख में पड़ता है. पूर्वी क्षेत्र, जो कि अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम में पड़ता है, यहां चीनी सैनिकों का मूवमेंट कम हुआ. आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, चीन ने सबसे अधिक हवाई मूवमेंट 2019 में किया. ऐसी 108 घटनाएं हुईं. जबकि 2018 में 78 और 2017 में 47 घटनाएं ही हुई थीं.

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दोनों देशों के बीच बातचीत बेनतीजा
राजनयिक सूत्रों के मुताबिक दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों के बीच वार्ता मंगलवार को हुई लेकिन इसका कोई नतीजा नहीं निकला. हालांकि दोनों पक्ष इस मसले पर आगे बातचीत जारी रखने के लिये तैयार हो गए हैं. गौरतलब है कि गत 05 मई को उत्तरी लद्दाख के सीमांत इलाकों में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर दोनों देशों के सैनिकों के बीच तनातनी तब हुई जब चीनी सैनिकों ने पेंगोंग झील के उत्तरी किनारे पर भारतीय ढांचागत निर्माण को धवस्त करने की कोशिश की. यह इलाका पूर्वोत्तर राज्यों के लिहाज से बेहद संवेदनशील है. चीन इस पर कब्जा कर भारत को इस क्षेत्र से भौगोलिक स्तर पर अलग-थलग करना चाहता है.

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पेंगोग ढील के किनारे चीनी सड़क विवाद की जड़
भारतीय सेना का कहना है कि पेंगोंग झील के अपने इलाके मे चीनी सेना ने सैनिकों की वाहनों से आवाजाही के लिये सड़क का निर्माण किया तो भारतीय सेना ने भी अपने सैनिकों की सुविधा के लिये सड़क का काम शुरू किया. चीन ने इसका विरोध किया तो दोनों देशों के सैनिकों के बीच तनाव पैदा हो गया. इस आशय की रिपोर्टें हैं कि चीन ने पेंगोंग झील के अपने नियंत्रण वाले इलाके में सैनिकों के लिये 80 टेंट बना लिये हैं. इस घटना के बाद चीनी दैनिक ग्लोबल टाइम्स ने भारत को चेतावनी दी कि गलवान नदी के इलाके में टकराव की स्थिति नहीं पैदा करे नहीं तो इसके बुरे नतीजे भुगतने होंगे.

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अमेरिका भी भारत के पक्ष में
भारत के शीर्ष सैन्य अधिकारी लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं. वहीं अमेरिका ने कहा है कि चीनी सैनिकों का आक्रामक व्यवहार चीन की ओर से पेश खतरे की याद दिलाता है. अमेरिका के विदेश विभाग में दक्षिण और मध्य एशिया ब्यूरो की निवर्तमान प्रमुख एलिस वेल्स ने इस संबंध में कहा कि उन्हें लगता है कि सीमा पर तनाव एक चेतावनी है कि चीनी आक्रामकता हमेशा केवल बयानबाजी नहीं होती. उन्होंने कहा, चाहे दक्षिण चीन सागर का मामला हो या भारत के साथ लगी उसकी सीमा हो, हम चीन की ओर से उकसावे और परेशान करने वाला व्यवहार देख रहे हैं. यह दिखाता है कि चीन अपनी बढ़ती ताकत का किस तरह इस्तेमाल करना चाहता है.

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First Published : 22 May 2020, 12:44:32 PM