घर में नकली पौधा क्यों नहीं लगाना चाहिए? सबसे ज्यादा Artificial Plants बनाने वाला चीन भी ऐसा क्यों नहीं करता

Artificial Plants For Home: घर सजाने के लिए हम में से कई लोग आर्टिफिशियल प्लांट्स का इस्तेमाल कर रहे हैं. लेकिन इसे फेंग शुई के हिसाब से सही नहीं माना जा रहा.

Artificial Plants For Home: घर सजाने के लिए हम में से कई लोग आर्टिफिशियल प्लांट्स का इस्तेमाल कर रहे हैं. लेकिन इसे फेंग शुई के हिसाब से सही नहीं माना जा रहा.

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Priya Singh
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Artificial Plants For Home

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Artificial Plants For Home: घर को सजाने का चलन बदला है. पहले लोग गमले में मिट्टी डालते थे, अब प्लास्टिक में पत्ते खोंसते हैं. देखने में हरा-भरा. छूने पर बेजान. यह इक्कीसवीं सदी का एक अजीब विरोधाभास है कि हम सुविधा के नाम पर जिंदगी को किनारे कर रहे हैं. घरों में नकली पौधे लगाए जा रहे हैं. सवाल यह है कि असली पौधों की जगह नकली पौधे क्यों? जवाब सीधा है - कोई झंझट नहीं रहता. न पानी देना पड़ता है, न धूप की चिंता रहती है और न ही मुरझाने का डर. बस पौधा लगा दिया और निश्चिंत हो गए.

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असली पौधे और नकली पौधे में अंतर

Artificial Plants For Home Blooming Floret

निश्चिंतता और निर्जीवता में बारीक फर्क है. नकली पौधा दिखता तो हरा है, लेकिन करता कुछ नहीं. इससे न हवा साफ होती है, न ऑक्सीजन बनती है और न ही ये ताजी खुशबू देता है. यह ठीक वैसे ही है जैसे किसी की तस्वीर से प्यार हो सकता है पर बातचीत नहीं. असली पौधे में जान होती है. जान यानी रिश्ता. आप पानी डालिए तो वो पीता है. धूप दीजिए तो बढ़ता है. देखभाल कीजिए तो फूल खिलाता है. यह एक्सचेंज है. एक्सचेंज का मतलब लेन-देन नहीं इन्वेस्टमेंट यानी कि जुड़ाव. इस जुड़ाव में एक सुकून है जो मन को छूता है. प्रकृति से कनेक्शन बनता है तो घर में एक अलग ऊर्जा आती है. वही ऊर्जा जो प्लास्टिक के पत्तों से नहीं आ सकती, चाहे वो कितने भी चमकदार क्यों न हों.

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चीन का मार्केटिंग खेल

Artificial Plants For Home Pure Home

दुनिया में सबसे ज्यादा नकली पौधे चीन बनाता है. एक्सपोर्ट करता है. दूसरे देशों को बेचता है. लेकिन खुद अपने घरों में क्या लगाता है? असली पौधे. यह दोहरा खेल नहीं, यह समझदारी है. वहां फेंग शुई केवल किताबों में नहीं, जीवन में है. वे जानते हैं कि संतुलन प्लास्टिक से नहीं, प्रकृति से आता है. तो फैक्ट्री में बनाओ नकली, लेकिन घर में लगाओ असली. बिजनेस अलग, जिंदगी अलग.

वास्तु के हिसाब से क्या है सही?

Blooming Floret Artificial Plants For Home

वास्तु और ऊर्जा की बातें करने वाले भी यही कहते हैं. जो चीज जीवित नहीं, वो घर में ठहराव लाती है. इससे सुस्ती आती है और घर का माहौल भारी होता है. यह भले ही आपको तुरंत न दिखे. लेकिन यह धीरे धीरे असर करता है. उदाहरण के लिए नमक ज्यादा खाने से तुरंत बीमारी नहीं होती, लेकिन असर तो होता ही है. विज्ञान भी इसे मानता है. रिसर्च बताते हैं कि हरियाली के बीच रहने से तनाव कम होता है. मन हल्का रहता है. लेकिन यह हरियाली असली होनी चाहिए.

नकली पौधों से आंखे भले धोखा खा लें, मन और शरीर नहीं खाते. वे जानते हैं कि जो जिंदा नहीं, उससे जिंदगी नहीं मिलती. सजावट चाहिए तो असली पौधे लगाइए. मनी प्लांट, तुलसी, स्नेक प्लांट. ये कुछ ऐसे पौधे हैं, जो थोड़े पानी और धूप में भी जीवित रहते हैं. बदले में इन्हें लगाने से ताजगी और ऑक्सीजन मिलती है. साथ ही, यह भी महसूस होता है कि घर में कुछ ऐसा है जो जीवित है, बढ़ रहा है और सांस ले रहा है.

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