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silent heart attack Photograph: (Freepik)
Heart Attack Symptoms: 37 वर्षीय महिला को हाल ही में साइलेंट हार्ट अटैक आया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, बताया जा रहा है कि महिला OPD में जांच करवाने आई थी क्योंकि उसके पेट में गड़बड़ थी. महिला के सीने में अक्सर जलन महसूस होती थी, जो पानी पीने के बाद ठीक हो जाती थी. साथ ही कभी-कभी भारीपन महसूस होता था और पीठ में हल्का दर्द होता था. वो इसे हार्ट अटैक नहीं बल्कि गैस समझ रही थी क्योंकि दर्द कुछ समय बाद गायब हो जाता था. इतना ही नहीं जब डॉक्टर ने उसे जांच के लिए कहा तो उसकी ईसीजी रिपोर्ट, बीपी और शुगर के साथ पल्स रेट भी सामान्य होता था. इस वजह से उसे पता नहीं लगा कि वह हार्ट अटैक का शिकार हो रही है.
कैसे लगा पता?
डॉक्टरों ने सभी रिपोर्टों के सही होने पर एक अन्य ट्रोपोनिन टेस्ट करवाने की सलाह दी. इस टेस्ट में साफ हुआ की महिला को एकबार दिल का दौरा साइलेंट तरीके से पड़ चुका है. इस टेस्ट में खास प्रोटीन की जांच की गई जिसमें उसकी सीने की मांसपेशियों को नुकसान पहुंचा हुआ था. हालांकि, पीड़िता को सीने में दर्द, सांस लेने में तकलीफ और जबड़े तथा बांहों में तेज दर्द भी महसूस होता था. जांच में पाया गया कि महिला को पीसीओएस था.
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साइलेंट हार्ट अटैक क्या होता है और क्यों है खतरनाक?
साइलेंट हार्ट अटैक में लक्षणों की कमी होती है. जैसे उसे सीने में दर्द नहीं होता या इतना हल्का होता है कि डर का अहसास नहीं होता है. इसमें सांस फूलने की तकलीफ भी हल्की लगती है. इसके लक्षण इतने हल्के होते हैं कि कई बार हफ्तों या महीनों तक भी जांच करवाने पर पता नहीं लग पाता है और दिल को नुकसान पहुंच चुका होता है. ये खतरनाक इसलिए होता है क्योंकि दूसरी बारी अटैक आने पर मृत्यु दर काफी बढ़ जाती है. साइलेंट हार्ट अटैक महिलाओं को हो सकता है और जिन्हें डायबिटीज होता है, वे ज्यादा रिस्क में होते हैं.
सामान्य हार्ट अटैक से कैसे अलग होता है साइलेंट अटैक?
सामान्य हार्ट और साइलेंट अटैक में लक्षणों का अंतर इसलिए होता है क्योंकि सामान्य अटैक में सीने में तेज दर्द होता है, जो असहनीय होता है. वहीं, साइलेंट अटैक में लक्षण बिल्कुल हल्के होते हैं. सामान्य अटैक के बारे में तुरंत पता लग जाता है और इसलिए उसकी जांच भी जल्दी हो जाती है. मगर साइलेंट अटैक में अक्सर ECG रिपोर्ट भी क्लीयर नहीं हो पाती है.
महिलाओं में इसके लक्षण क्यों अलग होते हैं?
दरअसल, हेल्थ एक्सपर्ट्स का मानना है कि साइलेंट अटैक महिलाओं में कई कारणों से हो सकता है. 40 से अधिक आयु की महिलाएं इससे सबसे ज्यादा प्रभावित होती है. पीसीओएस-पीसीओडी और शरीर में एस्ट्रोजन कम होने से भी ये होता है. महिलाओं को मेनोपॉज के बाद साइलेंट अटैक का खतरा बढ़ जाता है. जो महिलाएं मधुमेह से पीड़ित है, उन्हें भी इसका खतरा रहता है. वो भी पुरुषों की तुलना में अधिक.
महिलाओं में साइलेंट अटैक के लक्षण क्या होते हैं?
- थकान महसूस करना.
- अचानक तनाव होना.
- सांस लेने में तकलीफ होना.
- जबड़े, गर्दन या पीठ में हल्का दर्द.
- मांसपेशियों में खिंचाव होना.
- पसीना आना.
- पेट में दर्द रहना.
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