रूबल नागी कौन हैं? जिन्हें मिला शिक्षण जगत का 'नोबेल पुरस्कार' GEMS

Rouble Nagi: ग्लोबल टीचर प्राइज 2026 की विजेता रूबल नागी हैं. रूबल नागी ने भारत में सामुदायिक शिक्षण केंद्रों और भित्तिचित्र-आधारित कक्षाओं के माध्यम से शिक्षा में परिवर्तन लाने के लिए इस खिताब से सम्मानित किया गया है.

Rouble Nagi: ग्लोबल टीचर प्राइज 2026 की विजेता रूबल नागी हैं. रूबल नागी ने भारत में सामुदायिक शिक्षण केंद्रों और भित्तिचित्र-आधारित कक्षाओं के माध्यम से शिक्षा में परिवर्तन लाने के लिए इस खिताब से सम्मानित किया गया है.

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Namrata Mohanty
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rouble nagi Photograph: (rouble nagi)

Rouble Nagi: मुंबई की कला और सामाजिक विज्ञान की शिक्षिका रूबल नागी को 10 लाख डॉलर का GEMS, ग्लोबल टीचर प्राइज 2026 का सम्मान प्राप्त हुआ है. इस अवॉर्ड को शिक्षण जगत का नोबेल पुरस्कार भी कहा जाता है. इस खिताब की घोषणा दुबई में आयोजित विश्व सरकार शिखर सम्मेलन में की गई, जहां राष्ट्राध्यक्षों, नीति निर्माताओं और समाज में परिवर्तन लाने वाले व्यक्तियों को एक साथ लाने के लिए वैश्विक मंच सजाया जाता है.

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कौन हैं रूबल नागी?

रूबल नागी एक भारतीय शिक्षाविद, समाजिक कार्यकर्ता और कलाकार है. बताया जाता है कि रूबल के पढ़ाने के तरीके में सिर्फ किताबें नहीं बल्कि कला भी शामिल है. रूबल एक संस्थान भी चलाती हैं जिसका नाम Rouble Nagi Art Foundation है. इस फाउंडेशन के जरिए उन्होंने भारत में 800 से ज्यादा शिक्षण केंद्र स्थापित किए हैं, खासतौर पर उन इलाकों में जहां बच्चे कभी स्कूल तक नहीं पहुंच पाते थे.

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दीवारों पर सजाई क्लास

रूबल एक और बात के लिए चर्चित रहती हैं. दरअसल, रूबल ने बच्चों को पढ़ाने के लिए दीवारों पर इंटरैक्टिव शैक्षिक म्यूरल्स यानी चित्र बनाते थे. इनमें साक्षरता, गणित, विज्ञान, इतिहास, स्वास्थ्य और पर्यावरण जैसे विषय रंगों और रूपकों के जरिये सिखाये जाते हैं. इसे लिविंग वॉल्स ऑफ लर्निंग कहते हैं. उनके इन डिजाइनों से बच्चे पढ़ाई करने के लिए जिज्ञासा प्रकट करते थे. इतना ही नहीं उनके माता-पिता, अड़ोस-पड़ोस के लोगों को भी ये खूब भांती थीं. 

नागी का शिक्षा मॉडल सबसे अलग

रूबल नागी का एजुकेशन मॉडल उन बच्चों पर फोकस करता है, जो गरीबी, बाल मजदूरी या अनियमित स्कूलिंग जैसी समस्याओं से जूझते हैं. ऐसे बच्चे रोज तय समय पर स्कूल नहीं आ पाते हैं. इसलिए, उनका स्कूलिंग टाइम फलेक्सिबल और बच्चों के अनुसार होता है. यानी बच्चा जब उपलब्ध हो, तब भी उसकी पढ़ाई रुकती नहीं है. इससे शिक्षा उनके जीवन की मजबूरी से टकराती नहीं, बल्कि उसी के अनुसार ढल जाती है.

क्यों खास है यह मॉडल?

इस मॉडल की एक खास बात यह है कि इसमें कम लागत और रिसाइकल मैटेरियल्स का इस्तेमाल होता है. महंगी किताबों या संसाधनों की जगह, रोजमर्रा की चीजों से बच्चों को पढ़ाया जाता है- जैसे दीवारों पर बने चित्र, रंग, पुराने कागज, बोतलें या स्थानीय सामग्रियां. इससे बच्चे देखकर, छूकर और प्रयोग करके सीखते हैं, जो उन्हें जल्दी और लंबे समय तक समझ में आता है. 

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