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Corona तीसरी लहर पर बुद्धिजीवियों ने मोदी सरकार पर दबाव डालने विपक्ष को लिखा पत्र

इतिहासकार रोमिला थापर (Romila Thapar) और इरफान हबीब तथा अर्थशास्त्री कौशिक बसु समेत 185 से ज्यादा बुद्धिजीवियों ने विपक्षी पार्टियों को खुला पत्र लिखा है.

News Nation Bureau | Edited By : Nihar Saxena | Updated on: 04 Jun 2021, 06:44:43 AM
Romila Thapar Irfan Habib

मोदी सरकार को सलाह मानने औऱ दबाव बनाने के लिए विपक्ष को पत्र. (Photo Credit: न्यूज नेशन)

highlights

  • रोमिला थापर, इरफान हबीब और कौशिक बसु पत्र लेखन में आगे
  • बुनियादी सेवाओं की मारामारी के बीच केंद्र सरकार नहीं मान रही सलाह
  • कई विदेशी विश्वविद्यालयों के शिक्षक भी दे रहे मोदी सरकार को सलाह

नई दिल्ली:

देश में कोरोना वायरस (Corona Virus) संक्रमण की दूसरी लहर भले ही धीमी पड़ती दिखाई दे रही हो, लेकिन महामारी की तीसरी लहर को लेकर हर कोई आशंकित हैं. अब इतिहासकार रोमिला थापर (Romila Thapar) और इरफान हबीब तथा अर्थशास्त्री कौशिक बसु समेत 185 से ज्यादा बुद्धिजीवियों ने विपक्षी पार्टियों को खुला पत्र लिखा है. इस पत्र में विपक्षी दलों से अपील की है कि वे अपने प्रभाव का इस्तेमाल यह सुनिश्चित करने में करें कि केंद्र सरकार (Modi Government) और राज्य सरकार महामारी की तीसरे लहर से निपटने के लिए पूरी तैयारी रखे.

बुनियादी सेवाओं के लिए मारामारी
पत्र में कहा गया है कि लाखों भारतीय बुनियादी स्वास्थ्य सेवाओं जैसे अस्पताल के बिस्तर, वेंटिलेटर, ऑक्सीजन, आवश्यक दवाएं, एम्बुलेंस आदि का उपयोग करने के लिए हाथ-पांव मार रहे हैं. पत्र में दूसरी लहर के दौरान सड़क पर मृतकों और नदियों में शवों के तैरने का जिक्र करते हुए कहा गया है कि इन घटनाओं की तस्वीरों ने दुनिया के मन को झकझोर दिया है. उन्होंने कहा कि यह देखना सुखद है कि महामारी के बीच ज्यादातर पार्टियां लोगों के हित में दल की सीमा से परे जाकर काम करने को इच्छुक हैं.

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केंद्र ने नहीं तैयार किया टास्क फोर्स
बयान में कहा गया कि केंद्र सरकार के साथ सहयोग करने और मिलकर काम करने की पेशकश के बाद भी भारत सरकार ने न तो सलाहों का स्वागत किया और न ही वास्तव में एक ऐसा कार्य बल तैयार किया, जिसमें सभी पार्टियों, राज्य सरकारों, विशेषज्ञों और सिविल सोसाइटी के लोग साथ होकर इस संकट से निपटें. इस पत्र पर हस्ताक्षर करनेवालों में मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित और कार्यकर्ता विजवाड़ा विल्सन, एमनेस्टी इंटरनेशनल के पूर्व महासचिव सलिल शेट्टी, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के पूर्व अध्यक्ष सुखदेव थोराट, यूपीएससी के पूर्व सदस्य पुरुषोत्तम अग्रवाल और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी, यूनिवर्सिटी ऑफ सियेना (इटली), यूनिवर्सिटी ऑफ साउ पाउलो, यूनिवर्सिटी ऑफ पेनसिल्वेनिया और प्रिंसटन यूनिवर्सिटी के शिक्षक हैं.

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First Published : 04 Jun 2021, 06:34:21 AM

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