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चमोली में गरुड़ ड्रोन होंगे तैनात, 32 शव मिले 206 अभी भी लापता

मजदूर जहां फंसे हैं वह दूरी लगभग 180 मीटर है और अभी भी 70 मीटर से ज्यादा की दूरी बाकी है. सुरंग के अंदर का जायजा लेकर लौटे सेना के मेजर का कहना है की टीम में लगातार काम कर रही है.

News Nation Bureau | Edited By : Nihar Saxena | Updated on: 10 Feb 2021, 07:19:19 AM
Chamoli NTPC Tunnel

एनटीपीसी की सुरंग में मलबा बन रह बचाव कार्य में बड़ी चुनौती. (Photo Credit: फाइल फोटो)

highlights

  • चमोली हादसे में अब तक 32 शव मिले, 206 अभी भी लापता
  • राहत एवं बचाव कार्यों के लिए सेना भी मुस्तैदी से जुटी
  • चेन्नई स्थित गरुड़ एयरोस्पेस तैनात करेगा तीन ड्रोन

चमोली:

एनटीपीसी (NTPC) की सुरंग में पिछले 48 घंटे से भी ज्यादा समय से मलबा निकालने की कोशिश जारी है, लेकिन अभी तक कामयाबी नहीं मिल पाई है. मजदूर जहां फंसे हैं वह दूरी लगभग 180 मीटर है और अभी भी 70 मीटर से ज्यादा की दूरी बाकी है. सुरंग के अंदर का जायजा लेकर लौटे सेना के मेजर का कहना है की टीम में लगातार काम कर रही है. कोशिश यही है कि मलबा साफ करके रेस्क्यू टीम को अंदर भेजा जाए, लेकिन ज्यादा मलवा होने के चलते अभी थोड़ा समय और लग सकता है. चमोली (Chamoli) हादसे में अबतक 32 लोगों के शव बरामद किए गए हैं और सूबे के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के मुताबिक 206 लोग अब भी लापता हैं. जिंदगियों पर तबाही बनकर टूटे ग्लेशियर ने संपत्ति को भी खासा नुकसान पहुंचाया है. इस बीच ड्रोन व सर्विस कंपनी गरुड़ एयरोस्पेस चमोली जिले में राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) द्वारा चलाए जा रहे राहत अभियान में तीन ड्रोन तैनात करेगा.

बचाव अभियान में लगे 600 से ज्य़ादा जवान
उत्तराखंड के चमोली जिले में रविवार को ग्लेशियर टूटने की घटना में कई लोगों की जान चली गई और कई लापता हैं. जिले में अब भी बचाव कार्य जारी है. ग्लेशियर टूटने के बाद अलकनंदा का जलस्तर बढ़ने के बाद राज्य में भारी तबाही का मंजर सामने आया था. इस घटना के बाद 600 से अधिक सेना, आईटीबीपी, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ के जवान बचाव कार्य में जुटे हुए हैं. ये जवान बाढ़ से प्रभावित और संपर्क से बाहर हुए गांवों में खाना, दवाईयां और अन्य जरूरी चीजें पहुंचा रहे हैं. भारतीय नौसेना के जवान भी बचाव कार्य में जुटे हुए हैं. ताजा जानकारी के मुताबिक एनटीपीसी के तपोवन-विष्णुगढ़ प्रोजेक्ट की 2.5 किलोमीटर लंबी सुरंग में 25-35 लोग फंसे हुए हैं. इन लोगों को सुरंग से बाहर निकालने के लिए बचाव कार्य जारी है. सुरंग में जलस्तर लगातार बढ़ता जा रहा है. 

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अमित शाह ने माना पावर प्रोजेक्ट तबाह
मंगलवार को राज्यसभा में अमित शाह ने जवाब देते हुए कहा कि हमें सुरंग से मलबे को कितने समय में हटा लेंगे इसको लेकर अनुमान लगाना मुश्किल है. हालांकि प्रोजेक्ट इंजीनियर से मलबों को हटाने के लिए कोई अन्य उपाय तलाश के लिए कहा गया है. उन्होंने यह भी स्वीकार किया था कि चमोली में एनटीपीसी के 480मेगावाट तपोवन- विष्णुगढ़ हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट और 13.2 मेगावाट ऋषिगंगा प्रोजेक्ट को भी भारी नुकसान पहुंचा है. ग्लेशियर टूटने से आई बाढ़ में कई घर भी बह गए थे. वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी की वैज्ञानिकों की दो टीमों का कहना है कि हैंगिंगल ग्लेशियर इस त्रासदी का कारण हो सकता है. मंगलवार को वैज्ञानिकों की दो टीमों ने प्रभावित इलाकों का एरियल सर्वे किया था.

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गरुड़ एयरोस्पेस तैनात करेगा अपने ड्रोन
इस बीच स्थित गरुड़ एयरोस्पेस के प्रबंध निदेशक अग्निश्वर जयप्रकाश ने बताया, 'हमें एनडीआरएफ ने उत्तराखंड के चमोली आपदा के लिए चलाए जा रहे बचाव और राहत कार्यो में तीन ड्रोन तैनात करने के लिए संपर्क किया.' उन्होंने कहा कि कंपनी एनडीआरएफ के बचाव और राहत कार्यो में सहयोग करने के लिए तीन प्रकार के ड्रोन तैनात करेगी. जयप्रकाश ने कहा कि एक ड्रोन को वीडियो निगरानी के लिए तैनात किया जाएगा, ताकि जमीनी बल क्षतिपूर्ति का जायजा ले सके और रियल टाइम सूचना पर भरोसा कर सकें. यह एनटीपीसी के फंसे श्रमिकों के बारे में भी जानकारी देगा, जो वहां एक बिजली संयंत्र का निर्माण कर रहे थे. उन्होंने कहा कि अन्य दो ड्रोनों का इस्तेमाल केबल बिछाने और खाद्य आपूर्ति व आपातकालीन आपूर्ति के लिए किया जाएगा.

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राहत कार्य और अन्य कामों में दक्ष हैं ये ड्रोन
जयप्रकाश ने कहा कि स्ट्रिंग ड्रोन, सामग्री को स्थानांतरित करने के लिए एक स्थान से दूसरे स्थान तक केबल बिछाएगा, जबकि यह भोजन और आपातकालीन आपूर्ति के लिए ड्रोन 20 किग्रा तक भार उठा सकता है. उन्होंने कहा, 'डिलिवरी ड्रोन का इस्तेमाल कोविड महामारी के दौरान कीटाणुनाशक दवाओं के छिड़काव के लिए किया जाता था और इसके सहयोग से टिड्डियों की रोकथाम के लिए कीटनाशकका भी छिड़काव किया जाता था.' जयप्रकाश ने कहा, 'तीन ड्रोन और चार पायलटों की हमारी टीम पहले से ही देहरादून में है और जल्द ही ड्रोन ऑपरेशन शुरू करने के लिए इसे जोशीमठ तक एयरलिफ्ट किया जाएगा.' उन्होंने कहा कि वीडियो निगरानी ड्रोन, लाइव हाई डिफिनेशन प्रसारण प्रदान करेंगे और इसमें सुरंगों या अंधेरे क्षेत्रों में इस्तेमाल होने वाली फ्लैश लाइटें लगी होंगी.

First Published : 10 Feb 2021, 07:13:29 AM

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