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Galwan Valley Clash: माइनस टेंपरेचर में 8 घंटे तक चली थी खूनी हिंसा, जानिए क्या हुआ था उस रात?

पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी (galwan valley clash) में भारत और चीनी ( India-China ) सैनिकों के बीच हुई हिंसक झड़प को आज पूरा एक साल हो गया है.

News Nation Bureau | Edited By : Mohit Sharma | Updated on: 15 Jun 2021, 04:09:09 PM
galwan valley clash

galwan valley clash (Photo Credit: news nation)

highlights

  • गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प को आज पूरा एक साल हो गया
  • गलवान में हुई इस हिंसा में भारत के 20 जवान शहीद हो गए थे
  • गलवान घाटी में चीन के कम से कम 45 सैनिक हताहत हुए थे

नई दिल्ली:

पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी (galwan valley clash) में भारत और चीनी ( India-China ) सैनिकों के बीच हुई हिंसक झड़प को आज पूरा एक साल हो गया है. पूरा देश आज एकजुट होकर गलवान के शहीदों को श्रद्धांजलि दे रहा है. गलवान में हुई इस हिंसा में भारत के 20 जवान शहीद हो गए थे, जबकि इतना ही नुकसान चीन को भी हुआ था. वो बात अलग है कि चीन को यह बात स्वीकारने में लगभग एक साल लग गया. गलवान हिंसा के समय चीन ने कई वीडियो जारी कर भारत पर उकसावे का आरोप लगाया था. लेकिन सैटेलाइट इमेजरी और गूगल अर्थ से खुलासा हुआ है कि यह स्थान LAC से करीब 50 किलोमीटर भीतर भारत की ओर है. जिसने साफ कर दिया कि चीनी सैनिकों ने ही भारतीय सीमा में घुसकर हमारे सैनिकों पर हमला किया. 

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चीन को अपने 50 सैनिक गंवाने पड़े

वहीं, भारतीय सैनिकों ने भी जवाबी कार्रवाई में चीनी सैनिकों के दांत खट़्टे कर दिए, परिणामस्वरूप चीन को अपने 50 सैनिक गंवाने पड़े. वहीं, रूसी की एक सरकारी न्यूज एजेंसी तास ने कुछ दिन पहले ही लिखा था कि गलवान घाटी में चीन के कम से कम 45 सैनिक हताहत हुए थे. हालांकि भारतीय सेना के उच्चाधिकारियों का दावा है कि यह संख्या 50 के आसपास थी. वहीं, गलवान में हिंसा के बाद से चीन के हौसले पस्त दिखाई पड़ रहे हैं। भारतीय जांबाजों ने चीनी सेना PLA के सैनिकों के मनोबल को तोड़ दिया है. हालांकि अब दोनों ही पक्ष बातचीत की पटरी पर आ गए हैं, लेकिन पैंगोंग झील से अपने सैनिक पीछे लेने को लेकर चीन की अपने ही देश में काफी किरकिरी हो रही है.

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आखिर क्या हुआ था उस रात

दरअसल, भारत-चीन सीमा एलएसी पर 15 जून की रात घटी उस घटना से पहले ही तनाव शीर्ष पर था। दोनों ही ओर से सीमा पर सैनिकों की संख्या बढ़ा दी गई थी. 6 जून को दोनों पक्षों के बीच हुई वार्ता में आपसी सहमति के आधार पर अपने-अपने सैनिक पीछे हटाने की प्रक्रिया शुरू हुई थी. इस बीच एक भारतीय कमांडर ने क्षेत्र में चीनी कैंप को देखा और उसको निरीक्षण करने पहुंचा. जिसको लेकर दोनों सैनिकों की ओर से कहासुनी हुई और यह विवाद लड़ाई में तब्दील हो गया. जिसके चलते सैनिक घायल हुए और मौतें भी हुईं. जानकारी के अनुसार हिंसा में घायल हुए 20 में से 17 जवानों ने निगेटिव टेंपरेचर में दम तोड़ा. एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार सीमा के पास भारतीय इलाके में पेट्रोलिंग पॉइंट 14 के निकट चीनी सेना ने अपना टेंट लगाया हुआ था. जिसको हटाने भारतीय सैनिक वहां पहुंचा था. इस बीच चीने सैनिकों ने भारतीय जवान पर पत्थर से हमला कर दिया. तभी शोर मचने पर अन्य चीनी सैनिकों ने कंटीले तार लिपटे डंडों और लोहे के छड़ों के साथ हल्ला बोल दिया. जिसके बार भारतीय सैनिकों की ओर से भी जवाबी कार्रवाई की गई. यह संघर्ष 8 घंटे तक चला था. 

First Published : 15 Jun 2021, 04:09:09 PM

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